अज़ब-गज़बपंचांग पुराण

मां विंध्यवासिनी ने आरती के समय निकाली जीभ, अद्भुत चमत्कार का वीडियो कैमरे में हुआ कैद,Video

मां विंध्यवासिनी एक ऐसी जागृत शक्तिपीठ है जिसका अस्तित्व सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी रहेगा. यहां देवी के 3 रूपों का दर्शन बड़े सौभाग्य से भक्तों को प्राप्त होता है। मां की अलौकिक शक्ति हुआ अद्भुत चमत्कार के हजारों किस्से कहानियां है।

पुराणों में गिनती क्षेत्र विख्यात और महत्व तपोभूमि के रूप में विस्तार से बताया गया है कि मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है यह देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। मां विंध्यवासिनी के अद्भुत चमत्कार व अलौकिक शक्ति से हर कोई भली बात वाकिफ है।इन दिनो एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर बाहर हो रहा है जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर में आरती के समय अचानक मां विंध्यवासिनी अपनी जी बाहर निकाली और फिर अंदर कर ली यह सब वाक्य कैमरे में कैद हो गया है और अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।वायरल वीडियो कब का है और इसमें कितनी सच्चाई है इस बात की प्रमाणिकता विंध्य न्यूज़ नहीं करता है।

बता दें कि इन दिनों मां विंध्यवासिनी का आरती का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि मां विंध्यवासिनी आरती के समय अपने जीभ दो नही बल्कि तीन बार बाहर निकालती हैं और फिर अंदर कर लेती है। इस दौरान पुजारी द्वारा मां विंध्यवासिनी की पूजा आराधना हो रही होती है। इस दौरान पुजारी ढोल नगाड़े घंटा, शंख और घड़ियाल की धोनी भी सुनाई दे रहा है।

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर में नवरात्र को लेकर खास इंतजाम किए गए हैं।विंध्याचल की देवी मां विंध्यवासिनी विंध्याचल की पहाड़ियों में गंगा की पवित्र धाराओं की कल-कल करती ध्वनि प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरती है। त्रिकोण यंत्र पर स्थित विंध्यांचल विंध्यवासिनी देवी लोकहित महालक्ष्मी महाकाली तथा मां सरस्वती का रूप धारण करती है। विंध्यवासिनी देवी विंध्य पर्वत पर स्थित मधु तथा कैटभ नामक असुरों का सर्वनाश करती है। और भगवती यंत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं कहा जाता है कि जो मनुष्य इस स्थान पर तपस्या करता है उसे अवश्य प्राप्ति होती है ऐसी मान्यता है कि यहां विभिन्न संप्रदाय के उपासक हो मनवांछित फल देने वाली मां विंध्यवासिनी देवी अपने अलौकिक शक्ति के साथ यहां हमेशा विराजमान रहती हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित पुरोहितों की मान्यता है कि सृष्टि आरंभ सोने से पहले और प्रलय के बाद भी इस क्षेत्र का वजूद कभी खत्म नहीं हो सका यहां पर संकल्प मात्र से उपवास को को मनवांछित सिद्धि प्राप्त होती है इस कारण यह क्षेत्र सिद्ध पीठ के रूप में देश भर में विख्यात है आदिशक्ति की शाश्वत लीला भूमि मां विंध्यवासिनी के धाम में पूरे वर्ष भक्तों का आना जाना लगा रहता है चैत्र व शारदीय नवरात्र के अवसर पर यहां देश के कोने कोने से लोगों का दल पहुंचता है ब्रह्मा विष्णु व महेश जी भगवती की मात्री भाव से उपासना करते हैं तभी से सृष्टि की व्यवस्था करने में समर्थ होते हैं इसकी पुष्टि मार्कंडेय पुराण श्री दुर्गा सप्तशती की कथा से भी होती है।

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