बॉलीवुड

अतरंगी में सारा अली खान ने अपने दो आशिकों के बीच फंसी,कर्रा अभिनय से कर दिया सबको घायल

प्रवीण दुबे, वरिष्ठ पत्रकार अपने फेसबुक में शेयर की यह बाते

कल रात अतरंगी रे देखा. सारा अली खान,मुझे बहुत पसंद नहीं थीं. मैं उन्हें अभिनेत्री के बजाय स्टार किड्स की श्रेणी में रखता था मगर इस फिल्म ने मेरा भ्रम तोड़ दिया. क़माल का अभिनय उन्होंने इस फिल्म में किया है…फिल्म का ट्रेलर देखकर ऐसा लगता था कि कोई ऐसी फिल्म होगी जिसमें पत्नी के पूर्व प्रेमी से मिलवाने के लिए कोई उदार पति बैचेन होगा. इस विषय पर पहले भी मूवी बन चुकी हैं…हम दिल दे चुके सनम में अजय देवगन भी एश्वर्या के लिए ऐसा ही करते दिखे थे..

बहरहाल, देखने से पहले वैसा कोई भारी उत्साह नहीं था..मगर फिल्म वाकई अतरंगी है…एक अलग ही एंगल है इसमें, जो अनायास आपको कहीं कहीं लगे रहो मुन्नाभाई के संजय दत्त के कैरेक्टर की भी याद दिला जाएगा. यहाँ कहानी बताकर आपका उत्साह और वक़्त दोनों मैं ज़ाया नहीं करूंगा…सिर्फ इतना कहूंगा कि बांधकर रखेगी ये फिल्म…ऐसे दौर में जब फिल्मों में हीरोइन के दो-दो आशिक़ हों तो सबसे पहले वर्जनाओं को तोड़ने वाले दृश्य बलात ठूंसे जाते हैं लेकिन तब भी एक साफ़ सुथरी मनोरंजक फिल्म बनाना, ये बताता है कि दर्शक आज भी एक्टिंग देखता है, बेडरूम सीन नहीं…सारा ने अपनी अभी तक की फिल्मों का सर्वश्रेष्ठ अभिनय किया है…उनकी एक्टिंग से प्यार हो जाएगा आपको…इस सबके बावज़ूद फिल्म को खींच कर ले जाने में सबसे बड़ी भूमिका धनुष की है..बेहतरीन अभिनय है उनका… डांस भी कर्रा किया है उन्होंने..सीमा विश्वास में भी बहुत बारूद बाकी है अभी तक.. एक महत्वपूर्ण किरदार का जिक्र छूट रहा है…धनुष के दोस्त की भूमिका में आशीष वर्मा ने भी बेहतरीन अभिनय किया है… ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर फिल्मे आने में सहूलियत ये होती है कि आप गाने आगे बढ़ा सकते हैं लेकिन इस फिल्म का संगीत भी बहुत अच्छा है और गाना पूरा सुनने/देखने का आपका मन होगा.. कुल मिलाकर मनोरंजक है फिल्म…सारा अब मुझे वैसे ही पसंद आने लगीं जैसी बेताब से लेकर वारिस तक उनकी मम्मी अमृता सिंह पसंद आती थीं…. हाँ…उदास होने या रोने वाले सीन में वे अभी थोड़ी कमज़ोर नज़र आती हैं…. वक़्त और सहूलियत हो तो देखिएगा…कहानी को लेकर ज़रूर तर्क-वितर्क हो सकते हैं….

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