व्यापार

मुकेश अंबानी-किशोर बियानी-जेफ बेजॉस के बीच कॉरपोरेट जगत की सबसे बड़ी कानूनी लड़ाई,शतरंज की बिसात को समझिए

भारत का खुदरा व्यापार 2025 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। दुनिया के दो सबसे अमीर आदमी जेफ बेजोस और मुकेश अंबानी अपने नियंत्रण के लिए लड़ रहे हैं।

भारत का खुदरा व्यापार 2025 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। दुनिया के दो सबसे अमीर आदमी जेफ बेजोस और मुकेश अंबानी अपने नियंत्रण के लिए लड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, NCLT, NCLAT, CCI और आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में Reliance और Amazon के बीच लड़ाई छिड़ी हुई है। कोई भी पक्ष घुटने टेकने को तैयार नहीं है। दुनिया भर के निवेशकों की नजर भी इस जंग के नतीजे पर है.

बेजोस की ई-कॉमर्स कंपनी ऐमजॉन (Amazon) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और फ्यूचर ग्रुप (Future Group) की डील को रोकने के लिए अपनी पूरी जान लगा रखी है। दोनों पक्षों के बीच 2019 से कानूनी जंग चल रही है। दरअसल यह पूरी लड़ाई देश के रिटेल बिजनस पर कब्जे को लेकर है। दोनों कंपनियों के लिए किशोर बियाणी की फ्यूचर रिटेल (Future Retail) की अहम भूमिका है। कंपनी के देश के 400 से अधिक शहरों में 1,800 रिटेल स्टोर हैं। यही वजह है कि ऐमजॉन और रिलायंस इसे अपने पाले में करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं।

कहाँ से शुरू हुआ व्यापार का कारवा
रिटेल किंग के नाम से मशहूर किशोर बियानी ने 2001 में देश की पहली हाइपरमार्केट रिटेल स्टोर चेन बिग बाजार की शुरुआत की थी। लेकिन 2019 तक उन पर कर्ज का बोझ बढ़ गया। फ्यूचर ग्रुप का कर्ज 12,778 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। देश की जानी-मानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA ने फ्यूचर ग्रुप को नेगेटिव रेटिंग दी है। उस समय बियानी ने फ्यूचर कूपन में 49 फीसदी हिस्सेदारी अमेजन को 1,500 करोड़ रुपये में बेची दी थी। नवंबर 2019 में, इसे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से भी हरी झंडी मिली।

ऐमजॉन ने सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत में दी चुनौती

2020 में कोरोना फ्यूचर ग्रुप की हालत और खराब हुई। अप्रैल 2020 तक, फ्यूचर रिटेल की बिक्री सामान्य से 75 प्रतिशत कम थी और कंपनी काफी दबाव में थी। उसी साल अगस्त में, बेयोंक बियाणी ने रिटेल के साथ अपने रिटेल, होलसेल, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग कारोबार को बेचने के लिए 24,713 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए। Amazon ने इसे सिंगापुर की एक आर्बिट्रेशन कोर्ट में चुनौती दी थी।

एमेजॉन ने कहा कि उसने अपने और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया है। मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने 25 अक्टूबर, 2020 को एमेजॉन के पक्ष में एक अंतरिम निर्णय देते हुए फ्यूचर-रिलायंस समझौते को निलंबित कर दिया। तब से एमेजॉन ने सौदे को बंद करने के लिए सेबी, सीसीआई और स्टॉक एक्सचेंज को लिखा है। फ्यूचर ग्रुप ने इसके खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत वर्तमान में यह तर्क दे रही थी कि सीसीआई ने 20 नवंबर, 2020 को रिलायंस-फ्यूचर्स समझौते को हरी झंडी दे दी थी।

दिसंबर 2020 में दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने फ्यूचर रिटेल को कोई राहत नहीं दी लेकिन साथ ही कहा कि फ्यूचर रिटेल ने रिलायंस के साथ डील को मंजूरी देने में कोई गलती नहीं की। एमेजॉन ने जनवरी 2021 में इसे डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। इसी बीच 20 जनवरी 2021 को सेबी ने रिलायंस-फ्यूचर्स एग्रीमेंट को भी हरी झंडी दे दी। एमेजॉन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर आर्बिट्रेशन अवार्ड के फैसले को लागू करने की मांग की है।

तारीख पर मिली तारीख

इस याचिका में किशोर बियाणी और फ्यूचर ग्रुप के दूसरे डायरेक्टर्स को हिरासत में लेने और उनके एसेट्स को जब्त करने की मांग की गई। फ्यूचर ग्रुप ने अपनी दलील में कहा कि ऐमजॉन की डील फ्यूचर कूपंस के साथ थी, फ्यूचर रिटेल का साथ नहीं। फ्यूचर रिटेल मध्यस्थता अदालत के फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है। इस बीच फ्यूचर-रिलायंस डील को सेबी और स्टॉक एक्सचेंजेज ने सशर्त मंजूरी दे दी।

रिलायंस के साथ विलय को मंजूरी देने के लिए शेयरधारकों की बैठक बुलाने के लिए फ्यूचर ने 26 जनवरी 2021 को एनसीएलटी से संपर्क किया। लेकिन 2 फरवरी 2021 को हाईकोर्ट ने सिंगापुर की अदालत के फैसले को बरकरार रखा और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। अगले दिन फ्यूचर ने इसे डिवीजन बेंच में चुनौती दी। खंडपीठ ने कहा कि फ्यूचर रिटेल का अमेज़ॅन के साथ कोई समझौता नहीं था और शुरुआत में समझौते को समाप्त करने का कोई कारण नहीं था। इसके खिलाफ अमेजन सुप्रीम कोर्ट गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी को फ्यूचर-रिलायंस विलय योजना को मंजूरी देने से रोक दिया।

उधर दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने 18 मार्च, 2021 को ने केवल मध्यस्थता पंचाट के फैसले को सही ठहराया बल्कि बियाणी और फ्यूचर ग्रुप के दूसरे डायरेक्टर्स की एसेट्स जब्त करने का भी आदेश दिया। उन्होंने साथ ही बियाणी और दूसरे डायरेक्टर्स को कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा कि उन्हें जेल क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए। लेकिन फ्यूचर की अपील पर बड़ी बेंच ने इस पर रोक लगा दी। ऐमजॉन ने फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पंचाट के अंतरिम आदेश पर उसका फैसला आने तक दूसरी अदालतों को इस मामले से दूर रहने को कहा।

6 अगस्त, 2021 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच फ्यूचर ग्रुप आर्बिट्रेशन आर्बिट्रेशन के फैसले का पालन करने और देश के मध्यस्थता कानून के तहत लागू होने के लिए बाध्य थी। इस बीच फ्यूचर ने 18 मार्च के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट को इस मामले में कोई प्रतिकूल आदेश देने से रोक दिया था.

मध्यस्थ ने फ्यूचर रिलायंस के साथ समझौते पर अंतरिम रोक को रद्द करने के लिए अदालत में आवेदन किया, लेकिन 21 अक्टूबर, 2021 को इसे खारिज कर दिया गया। फ्यूचर रिटेल ने फिर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने मध्यस्थ न्यायाधिकरण के अंतरिम आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. 8 नवंबर को फ्यूचर ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर शेयरधारकों और लेनदारों की बैठक आयोजित करने की अनुमति मांगी। Amazon ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर कर फ्यूचर्स-रिलायंस एग्रीमेंट में किसी भी ऑर्डर को अंतिम फैसला आने तक निलंबित करने की मांग की है।

11 नवंबर, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर और एमेजॉान की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। 17 दिसंबर को इस मामले में एक और मोड़ आया जब सीसीआई ने फ्यूचर कूपंस में ऐमजॉन के निवेश को दी गई मंजूरी को निलंबित कर दिया। सीसीआई ने कहा कि ऐमजॉन ने इस मामले में कमीशन को गुमराह किया था।

ऐमजॉन ने सीसीआई के ऑर्डर के खिलाफ एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया जो इस हफ्ते इस पर सुनवाई कर सकती है।दूसरे शब्दों में इस मामले में कोई भी पक्ष घुटने टेकने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट, NCLT, NCLAT, CCI और आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में Reliance और Amazon के बीच लड़ाई छिड़ी हुई है।

दुनिया भर के निवेशक इस कानूनी लड़ाई को देख रहे हैं। वे उत्सुक हैं कि क्या विदेशी मध्यस्थता न्यायाधिकरण का तत्काल निर्णय भारत में मान्य है। यह विदेशी निवेशकों को भारत में निष्पादित समझौते की वैधता का परीक्षण करने की अनुमति देगा। समझौते को लागू करने के मामले में भारत विश्व बैंक की रैंकिंग में वेनेजुएला, सीरिया और सेनेगल से पीछे है।

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