छत्तीसगढ़

Viral Photo: IAS ने जब मरीजों के बराबर में रखा जूता,तेवर देख लोग बोले-गनीमत है कि सिर पर नही रखा

सिविल सर्विस एग्जाम को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा में सफल होने के लिए अभ्यर्थी कई साल तक तैयारी करते हैं। कोचिंग क्लास, गूगल और कई सारे नोट्स के जरिए रणनीति बनाकर परीक्षा पास  कर आईएएस बनते हैं ऐसे में कई बार अधिकारियों के देखने और सोचने के नजरिए के साथ तेवर भी बदल जाते हैं कुछ ऐसा ही दिखा छत्तीसगढ़ में जहां एक प्रशिक्षु आईएएस अस्पताल पहुंचे और भर्ती मरीजों को बेड में अपना जूता टिका कर आधिकारिक रौब झाड़ रहे थे।

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक तस्वीर वायरल हो रही है। जो अखबार की कटिंग है। जहां एक अधिकारी अस्पताल में एक महिला मरीज के बिस्तर पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। फोटो के साथ कैप्शन में लिखा है, ‘जब हम मरीजों को देखने गए तो यह छत्तीसगढ़ के एक प्रशिक्षु अधिकारी सोनकर का अंदाज था। अब लोग कह रहे हैं कि छत्तीसगढ़ की यह ताजा घटना है. इस तस्वीर को लेकर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. वैसे सोशल मीडिया की जनता भी इस तरह की तस्वीरें देखकर काफी गुस्से में है.इस फोटो को शेयर करने वाले ने लिखा है, ‘गनीमत है कि अभी ट्रेनी हैं, वरना जूता मरीज के सिर पर भी रख सकते थे साहब जी’ तो आइए हैं पूरी बात

मिली जानकारी के मुताबिक वायरल हो रही यह तस्वीर अभी की नहीं, बल्कि 2016 की है। तस्वीर में दिख रहे अधिकारी डॉ. जगदीश सोनकर हैं, जो उस समय छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज के अनुमंडल पदाधिकारी थे. सोनकर 2013 बैच के आईएएस हैं। वहीं, @pari_tweets नाम के एक यूजर ने 2016 में कन्नन गोपीनाथन के उस ट्वीट से एक ट्वीट शेयर कर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे यह खबर फिर सामने आई। इस ट्वीट में सोनकर की कुछ तस्वीरों के अलावा इस अखबार की कटिंग भी नजर आ रही है. तो इससे एक बात साबित होती है कि हालिया पोस्ट में किया गया दावा भ्रामक है। अर्थात इस पोस्ट का वर्तमान से कोई लेना-देना नहीं है।

यह तस्वीर वायरल होने के बाद से कई तरह से जांच करने की कोशिश की। जब हमने Google रिवर्स इमेज का उपयोग करके समाचार पत्र काटने वाली तस्वीरों को खोजने की कोशिश की, तो खोज परिणामों में एक ही छवि वाले कई समाचार लेख मिले। 4 मई 2016 को मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। जहां लिखा है, यह दुखद घटना तब हुई जब डॉ. जगदीश सोनकर ने एक सरकारी अस्पताल का नियमित दौरा किया। इस दौरान उन्होंने इलाज करा रहे कुपोषित बच्चों की माताओं से बात करते हुए कहां था।

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