सामान्य ज्ञान

सावन महीने में नहीं खाया जाता दूध और दही, कहते हैं “सावन साग न भादो दही, कुवार दूध न कातिक मही”,यहां जाने

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस महीने में पूरी श्रृद्धा और भक्ति के साथ महादेव की पूजा की जाती है। इसके साथ ही सावन के महीने में कुछ चीजों का सेवन करने को मना किया जाता है।इनमें दूध, दही, बैंगन और हरी पत्‍तेदार सब्जियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा लहसुन, प्‍याज और मांस मदिरा का सेवन करने से भी रोका जाता है। पूर्व में भी इन कविताओं में भारतीय जलवायु, मौसम और परिवेश का ध्यान रखते हुए गहन शोध किया गया है। जो आज पढ़े लिखे समाज में लुप्तप्राय हैं। जिले के प्रख्यात वैद्य रहे स्व.शिवसहाय सिंह अपने शिष्यों व रोगियों को मौसम के निषिद्ध भोजन इस प्रकार समझाते थे- सावन साग न भादो दही, कुवार दूध न कातिक मही। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि मौसम विशेष में शारीरिक रासायनिक क्रियायें बदल जाया करती हैं। जलालपुर के इजरी गांव निवासी रामकुमार वैद्य अपनी कविताओं और गानों में खान-पान की दिनचर्या सुनाया करते थे। जो परम्पराओं से ही ग्रहण किया गया था।

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लोगों के बीच में दूध, दही को लेकर ऐसी धार्मिक मान्‍यता प्रचनित है कि सावन में दूध और दही से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है, इसलिए ऐसा मानते हैं कि दूध और दही खाने से बचना चाहिए। जबकि इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि सावन का महीना बारिश का होता है और इस महीने में घास और पेड़-पौधों पर कई प्रकार के कीड़े-मकोड़े पनपते हैं। इस घास और पौधों को गाय-भैंस चारे के तौर पर खाती हैं। इस तरह ये कीड़े घास-फूस के साथ इनके पेट में पहुंचने का डर होता है और यहां से ये दूध में भी मिल सकते हैं। इसलिए दूध पीने को मना किया जाता है। दूध से ही दही और पनीर बनता है कि इसलिए डेयरी उत्‍पादों को खाने से मना किया जाता है।

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धार्मिक मान्‍यताओं का अनुसरण करते हुए कुछ लोग सावन में बैंगन और पत्‍तेदार सब्जियां नहीं खाते हैं। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार बैगन को अशुद्ध माना जाता है। तो वहीं विज्ञान कहता है कि सावन के महीने में बैंगन में कीड़े पड़ जाते हैं। वहीं हरी पत्‍तेदार सब्जियों में भी कीड़े लग जाते हैं। अगर आप इन सब्जियों को खाएंगे तो संभव है कि आपके पेट में जाकर ये कीड़े और बैक्‍टीरिया बीमारी पैदा कर सकते हैं और आप बीमार हो सकते हैं।

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सावन के महीने में कुछ लोग धार्मिक कारणों से नमक का त्‍याग कर देते हैं या फिर नमक का प्रयोग केवल एक वक्‍त के खाने में करते हैं। वैज्ञान‍िक तर्क यह है कि इस बारिश के इस मौसम में हमारे शरीर में सोडियम की मात्रा पहले से ही काफी बढ़ी रहती है। ऐसे में सोडियमयुक्‍त न‍मक लेना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप नमक छोड़ नहीं सकते हैं तो सावन के महीने में सेंधा नमक का प्रयोग करें तो बेहतर होगा।

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धार्मिक मान्‍यताएं कहती हैं कि सावन का महीना भगवान भगवान शिव की भक्ति का महीना होता है और ऐसे में हमें मन को अशुद्ध करने वाली चीजें प्‍याज लहसुन नहीं खाना चाहिए। ये वस्‍तुएं तामसिक होती हैं हमें सत्‍कर्म के मार्ग से भ्रमित करती हैं। यह आपके मन को भक्ति के मार्ग से भटका कर गलत दिशा में ले जाती हैं ऐसा माना जाता है कि मसालेदार भोजन खाने से मन में बुरे विचार आते हैं वहीं वैज्ञान‍िक तर्क यह है कि सावन के महीने में हमारा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ऐसे में प्‍याज और लहसुन से बनी सब्जियां अधिक गरिष्‍ठ होने की वजह से पचा पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

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