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Manjoor के 3 साल बाद भी 37 करोड़ के कार्यों को पूरा कराने में पीआईयू को छूट रहा पसीना,कार्यपालन यंत्री को जिले से हटाने की उठने लगी मांग

Manjoor : सिंगरौली 1 सितंबर – सीएम शिवराज सिंह चौहान भले ही ऊर्जा धानी के नाम से विख्यात सिंगरौली जिले के विकास के लिए पैसा पानी की तरह बहाने की बात करते हैं लेकिन जिले में एक ऐसा विभाग है जिससे पैसे तो बहुत मिले लेकिन उन पैसों का सही जगह सदुपयोग होता नहीं दिख रहा है.

 

Manjoor : दरअसल जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फण्ड से क्रियान्वयन एजेंसी पीआईयू के पास करीब 14 कार्य ऐसे हैं जिन्हें पूर्ण कराने में पसीने छूट रहे हैं। आरोप है की चर्चित कार्यपालन यंत्री जहां सुस्त हैं। वहीं मीडिया के सवालों पर चुप्पी साध ले रहे हैं.
गौरतलब हो कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फण्ड से वर्ष 2019 से लेकर 2021 के बीच पीआईयू को शासकीय महाविद्यालय देवसर का भवन निर्माण, बहुउद्देश्यी हाल एवं शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय देवसर के खेल मैदान में बाउण्ड्रीवाल निर्माण, अजा सीनियर कन्या छात्रावास क्र.2 देवसर,  जनजाति सीनियर बालक छात्रावास निवास, कन्या आश्रम नवीन बंजारी, अजा सीनियर छात्रावास बालक सरई, अजा सीनियर बालक छात्रावास देवसर,कन्या क्र.1, बालक क्र.1 बैढऩ 50-50 सीटर, अजा जूनियर बालक छात्रावास चितरंगी, कृषि विज्ञान केन्द्र में बाउण्ड्रीवाल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य शाउमावि गोपला, बगैया में भवन निर्माण, पुराने जिला चिकित्सालय में विद्युत लाईन मरम्मत कार्य व टायलेट रिपेयर तथा रेनोवेशन कार्य  सहित करीब 14 कार्यों के लिए 37 करोड़ 10 लाख से अधिक रकम मंजूर है। किन्तु इन कार्यों को पूर्ण कराने में विभाग को पसीने छूट रहे हैं. Manjoor
वर्ष 2019 में स्वीकृत कार्यों को पूर्ण कराने के लिए करीब डेढ़ साल का वक्त दिया गया था। इसके बावजूद करीब ढाई साल बाद भी उक्त भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। आरोप लगाया जा रहा है कि पीआईयू के कार्यपालन यंत्री संविदाकारों पर दबाव नहीं बना पा रहे हैं. Manjoor
इसके पीछे कई कारण बताये जा रहे हैं। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि पीआईयू के चर्चित कार्यपालन यंत्री कासिम अंसारी यहां एसडीओ से लेकर कार्यपालन यंत्री का जिम्मा संभाल चुके हैं। इसके बाद उनका तबादला हो गया था। फिर 2020 में जैसे ही भाजपा की सरकार बनी वापसी कराने में सफल हो गये. Manjoor
सिंगरौली में लगातार कई सालों से पदस्थ रहने के कारण कई संविदाकारों पर दबाव नहीं बना पा रहे हैं और न ही गुणवत्तायुक्त निर्माण कार्य हैं। जिसके कारण आये दिन विभाग की किरकिरी होती रहती है। इसके बावजूद पीआईयू  के कार्यपालन यंत्री पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।  चर्चा है की कार्यपालन यंत्री पर जहां सत्ताधारी के कुछ नेता मेहरबान हैं। वहीं भोपाल में बैठे उक्त विभाग के आका कृपा बरसा रहे हैं. Manjoor
कार्यपालन यंत्री से कलेक्टर भी खफा
गुणवत्ताविहीन भवनों सहित अन्य निर्माण कार्यों को लेकर कलेक्टर तक शिकायत पहुंच रही है। साथ ही निर्धारित समय सीमा में उक्त निर्माण कार्य पूर्ण न किये जाने पर पीआईयू के कार्यपालन यंत्री से कलेक्टर खफा हैं। सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं की कई समीक्षा बैठकों में कलेक्टर राजीव रंजन मीना पीआईयू के कार्यों के धीमी प्रगति से काफी खफा हैं और वे चेतावनी भी दे चुके हैं। इसके बावजूद पीआईयू के कार्यपालन यंत्री पर कोई असर नहीं पड़ रहा है और आरोप है कि वे अपने गति से कामकाज निपटा रहे हैं। अब कार्यपालन यंत्री को जिले से हटाने की मांग शुरू हो गयी है. Manjoor
महाविद्यालय भवन का निर्माण कार्य सुर्खियों में
शासकीय महाविद्यालय देवसर के भवन निर्माण कार्य को लेकर संविदाकार के साथ-साथ क्रियान्वयन एजेंसी पीआईयू भी सवालों के घेरे में आ गये हैं। दीवाल के टूटने और उसमें लीपापोती करने को लेकर निर्माण कार्य के गुणवत्ता की पोल भी खुल गयी है। यह मामला अब कलेक्टर तक पहुंच गया है.सूत्रों से ज्ञात हुआ है की कलेक्टर उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित करने का मन बनाया है ताकि लापरवाहों पर कार्रवाई की जा सके। इस भवन के गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य को लेकर क्षेत्र के नागरिक भी सवाल उठाने लगे हैं. Manjoor

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