अनूठी पहल....पार्थिव शरीर से लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड तक का सफर -विकास - विंध्य न्यूज़


खुद के खर्च पर पार्थिव शरीरों को पहुंचाते हैं मुक्तिधाम,

समाजसेवी विकास पचौरी की एक और उपलब्धि,

विदिशा. युवा समाजसेवी विकास पचौरी द्वारा विदिशा नगर और आसपास की जा रही अनूठी निशुल्क अंतिम सेवा को लिम्का बुक ऑफ रेकार्डस् ने भी मान्यता दे दी है। अब विकास का नाम इस बुक में दर्ज कर लिया गया है, गुरूवार को विकास ने मीडिया के सामने इस संस्था का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हुए इस खुशी को साझा किया। दरअसल पिछले 4 सालों से शहर के समाजसेवी विकास पचौरी ज्ञात-अज्ञात लोगों के मृत पार्थिव शरीर को उनके घर से निशुल्क शमशान घाट तक ले जाने का काम कर रहे…. उनकी ऐसी सेवा को देखते हुए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड ने अपने रिकॉर्ड में शामिल करते हुए उन्हें सर्टिफिकेट भेजा है…. प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विकास पचौरी जनकल्याण फाउंडेशन के सभी सदस्यों ने इस उपलब्धि के बारे में जानकारी दी… विकास पचौरी ने बताया कि 28 मार्च 2016 से लेकर 3 मार्च 2019 तक के डाटा को उन्होंने देखते हुए जिसमें कुल 1309 पार्थिव देह को मुक्तिधाम तक पहुंचाया था जबकि अब तक करीब तीन हजार के लगभग पार्थिव देह वह मुक्तिधाम तक पहुंचा चुके हैं… उक्त 3 साल के आंकड़े के आधार पर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड उन्हें यह प्रशस्ति पत्र देकर वर्ष 2020 की पुस्तक में शामिल करने का निर्णय लिया है….


80 घण्टे बोलने का हैं रिकार्ड 

9 फरवरी से पहले विदिशा और 1 मार्च गंजबासौदा में निशुल्क रक्त परीक्षण और कार्ड बनाने की मुहिम में अब तक एक लाख 73 हजार तक पहुंच चुकी है।यह रेकार्ड भी अभी उनकी प्रतीक्षा कर रहा है।विकास पचौरी का कहना है कि वे इस अभियान को सिर्फ रिकॉर्ड के लिए नहीं बल्कि अपने जिले के हर शहर में एक रक्त समूह का डायरेक्टरी तैयार करने के लिए काम कर रहे हैं अब सिरोंज के साथ कुरवाई,शमशाबाद सहित अन्य शहरों में भी इसी प्रकार से रक्त परीक्षण कर वहां के निवासियों की रक्त समूह के एक डायरेक्टरी तैयार करेंगे, ताकि समय पड़ने पर किसी की भी जान बचाई जा सके, इसके पहले भी विकास पचौरी ने लगातार 80 घण्टे बोलने का रिकार्ड बनाते हुए इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराया था।