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इंदौर में डॉक्टर के फार्मूला पर हैदराबाद से नशे का घोल रहे थे जहर, अब तक खपा चुके हैं 1 अरब का ड्रग

इंदौर — ड्रग्स वाली आंटी’ उर्फ प्रीति जैन के रैकेट का भंडाफोड़ करने के बाद इंदौर पुलिस ड्रग माफिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई में जुटी हुई है. बीते 5 जनवरी को पुलिस ने 70 किलो एमडीएमए ड्रग के साथ पुलिस ने मंगलवार को पांच कारोबारी को गिरफ्तार किया था। बुधवार को इन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से 7 दिन के पुलिस रिमांड पर सौपा गया है।  पुलिस ने संभावना जताई है कि अब तक में करीब 100 करोड़ रुपए तक की ट्रक्स इंदौर सहित अन्य जिलोंं में खपाई जा चुकी है।

गौरतलब है कि ड्रग तस्करी की खबर मिलते ही तेलंगाना पुलिस ने व्यापारी के कई ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की है।करोड़ रुपये कीमती मिथाइलीन डाइऑक्सी मेथैमफेटामाइन (एमडीएमए) सहित पकड़ाए तस्कर वेदप्रकाश और दिनेश अग्रवाल मंदसौर के तार एक डॉक्टर से जुड़े हुए है। शक है आरोपितों ने एमडीएमए का फॉर्मूला इस डॉक्टर से सीखा था। पुलिस उसके खिलाफ सबूत एकत्र कर रही है। इतनी अधिक मात्रा में ड्रग मिलने पर एटीएस, एसटीएफ और आइबी भी पड़ताल में जुट गई है।सूत्र की माने तो ड्रग को इंदौर और आसपास के इलाकों में लाने का जिम्मा मंदसौर के चिमन नाम के शख्स का था. वह हैदराबाद के वेदप्रकाश व्यास से नशा खरीदता और उसे कई अलग-अलग तरीकों से इंदौर और अन्य शहरों तक लाता. 


पकड़े गए आरोपी क्राइम ब्रांच ने 70 करोड़ की ड्रग के साथ व्यापारी दिनेश पिता नारायणलाल अग्रवाल निवासी बालाजी हाइट महालक्ष्मी नगर, अक्षय उर्फ चीकू पिता दिनेश अग्रवाल निवासी. होराइजन सिटी लसुड़िया, चिमन पिता मदनलाल अग्रवाल निवासी प्रेम कालोनी स्टेशन रोड मंदसौर, वेदप्रकाश पिता बिहारीलाल व्यास निवासी जलवायु विहार हैदराबाद तेलंगाना और मांगी बैंकटेश पिता मांगी आइलहिया निवासी प्रकाशम पंतुलू उषामुल्लापुंडी जेटीमेडला रंगारेड्डी हैदराबाद को पकड़ा था। 

आरोपियों के बैंक अकाउंट को खंगाल रही पुलिस 70 किलो की कंसाइनमेंट के साथ पकड़े गए ड्रग माफियाओं पर अब पुलिस ने आर्थिक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, पुलिस अब उनके बैंक अकाउंट और उनके सोर्स ऑफ इनकम के माध्यम तलाशने में जुट गई है। तो वहीं आरोपियों के मोबाइल से भी बड़ा खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। एसएसपी इंदौर हरिनारायण चारी मिश्रा का कहना है कि जिस तरीके से मुख्य आरोपी 2013 से हैदराबाद मैं रह रहा था ऐसे में आशंका है कि वहां पहुंचते ही उसने ड्रग सप्लाई का धंधा शुरू कर दिया होगा ऐसे में बहुत आवश्यक हो जाता है कि ऐसे लोगों और ठिकानों की तलाश करना जहां से वह पैसा कमाता था और ड्रग्स के धंधे में लगाता था। 

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विदेशों में करते थे सप्लाई पुलिस का कहना है कि इंदौर में भी कुछ लोगों से उसके तार जुड़े होने के सबूत मिले हैं पुलिस उन सबूतों को वेरीफाई करने में लगी हुई है, बहुत सारे नाम ऐसे भी हैं जिन्हें कोड वर्ड में रखा गया है उन कोड वर्ड को क्रैक करने का काम भी साइबर पुलिस के द्वारा किया जा रहा है। एसएसपी का कहना है कि साउथ अफ्रीका भेजे जाने की अभी जानकारी मिली है आशंका यह भी है कि इसके पहले भी यह लोग मध्य प्रदेश और देश के अलग-अलग हिस्सों सहित दूसरे देशों में भी ड्रग सप्लाई का काम कर चुके हैं, ऐसे में इनके उन सभी कांटेक्ट को पुलिस खंगालने में जुटी हुई है। 

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मंदसौर का डॉक्टर ड्रग का बनाता था फार्मूला
पुलिस ने मंदसौर के डॉक्टर द्वारा फार्मूला तैयार करने पर कहा कि यह कोई विशेष फार्मूला नहीं है क्योंकि आरोपी खुद फार्मा लाइन से जुड़ा रहा है ऐसे में उसने फार्मूला पहले ही ले लिया होगा और उसके आधार पर सिंथेटिक ड्रग तैयार कर रहा था, साथ ही उनका कहना है कि यह बात बिल्कुल सही है कि इतना बड़ा कंसाइनमेंट लेकर आ रहा था तो यह कोई पहला मौका नहीं था इसके पहले भी इंदौर या दूसरे राज्यों में यह ड्रग सप्लाई लगातार करता रहा होगा। वही उनका कहना है कि हैदराबाद पुलिस से भी संपर्क किया है वह भी अपने स्तर पर उसके कांटेक्ट वेरीफाई करने में लगे हुए हैं क्योंकि यह भी पता चला है कि हैदराबाद में भी यह कुछ लोगों से ड्रग्स खरीद कर इंदौर और दूसरे इलाकों में भेजता था।

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100 करोड़ से ज्यादा की ड्रग्स खपा चुका है चिमन
वेद प्रकाश की हैदराबाद में मेडिसिन लैब है, जिसमें दवाइयां बनाई जाती हैं. पुलिस इस बात की तफ्तीश करने हैदराबाद जाएगी कि कहीं लैब में ड्रग तो तैयार नहीं हो रहा था. आरोपी वेद प्रकाश व्यास के ड्राइवर ने पूछताछ में बताया कि अब तक 100 करोड़ से ज्यादा की ड्रग्स इंदौर में खफा चुके हैं. कोरोना काल में भी आरोपी नशे की खेप लेकर आते थे. कभी ट्रकों के अंदर मुर्गी दाना की कोडिंग कर ड्रग्स लाते तो कभी पीथमपुर की फार्मा कंपनियों में सप्लाई किए जाने वाले पाउडर बताकर.

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