कबीरदास हत्या के आरोपियों को आजीवन कारावास,पति की हत्या मे पत्नी भी थी शामिल

तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश देवसर के न्यायालय से हुआ फैसला

सिंगरौली 7 मार्च। बरगवां थाना क्षेत्र के ग्राम मनिहारी निवासी कबीरदास वैश्य की अंधी हत्या करने वाले मृतक की पत्नी व पड़ोसी युवक आरोपी को तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश श्यामसुंदर झा देवसर के न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा एवं अलग-अलग धाराओं में अर्थदंड का फैसला सुनाया गया है। मध्यप्रदेश शासन की ओर से उक्त प्रकरण की पैरवी अपरलोक अभियोजन मारकंडेय मणि त्रिपाठी ने किया है।

उक्त आशय की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजन मारकंडेय मणि त्रिपाठी ने बताया की बरगवां थाना क्षेत्र के ग्राम मनिहारी निवासी कमलेश वैश्य ने 2 जून 18 को बरगवां थाने में रिपोर्ट किया कि उसका बड़ा भाई कबीरदास वैश्य 8 अगस्त 2016 की सुबह घर से बिना किसी को बताए गायब है। जिसकी तलाश की गई लेकिन कोई पता नहीं चला । कमलेश वैश्य की सूचना पर बरगवां पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर तलाश में जुट गई इसी बीच पुलिस की जांच के दौरान पता चला कि कबीर दास की पत्नी रामकली एवं उसका पड़ोसी रामायण प्रसाद बैश्य को संदिग्ध हालत में देख लिया था और उसने इसका विरोध किया था। जहां मृतक का पड़ोसी रामायण एवं रामकली दोनों योजनाबद्ध तरीके से दोनों आरोपियों ने कबीरदास के साथ बैठकर शराब पिलाए और उसका गला दबाकर मार डाला । तत्पश्चात शव को बोरे में भरकर बंधा गांव स्थित एक जगह गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया इस संबंध में आरोपी रामायण प्रसाद वैश्य ने कुछ लोगों को ऐसी घटना कर दिया है इसके बारे में बताया था। पुलिस को यही से कुछ सबूत हाथ लगे और 21 जून 2018 को बरगवां पुलिस ने दोनों आरोपियों को चिन्हित स्थान पर ले गई एसडीएम देवसर के अनुमति उपरांत चिन्हित स्थान पर खुदाई की गई खुदाई के दौरान मानव की खोपड़ी व हड्डियां तथा कपड़ा बरामद हुआ था । उन्होंने आगे बताया कि पुलिस के पूछताछ के दौरान आरोपी रामायण एवं मृतक की पत्नी रामकली ने दारू पिलाकर कबीर दास की हत्या करना स्वीकार कर लिया था ।

अपराधियों के द्वारा आरोप को स्वीकार किए जाने के बाद पुलिस ने इस आधार पर आरोपियों के विरुद्ध भादवि की धारा 302, 201 एवं 34 के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लेते आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया था। जहां न्यायालय के द्वारा आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था। अपरलोक अभियोजन ने आगे बताया कि बरगवां थाने के तत्कालीन निरीक्षक नागेंद्र प्रताप सिंह ,सुरेंद्र यादव, उपेंद्र मणि शर्मा उक्त मामले की गहनता से जांच करते हुए न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किया। अंधी हत्या होने के कारण गवाह नहीं मिल पाए थे । लेकिन पुलिस ने विवेचना के दौरान जो साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किया तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश श्यामसुंदर झा के द्वारा परिस्थितियां जन साक्ष्य के आधार पर दोनों आरोपियों को भादवि की धारा 302 में आजीवन कारावास व 2000रुपये का अर्थदंड भादवि की धारा 201 में 7 वर्ष की सजा व 1000 रुपये अर्थदंड का फैसला सुनाया गया है । यह भी बताया गया है कि दोनों आरोपी 23 जून 18 से न्यायिक अभिरक्षा में थे एक आरोपी रामायण प्रसाद वैश्य कैंसर से पीडि़त होने पर 6 जनवरी 2020 से पेरोल पर था।

मृतक के माता-पिता का हुआ था डीएनए टेस्ट
अपर लोक अभियोजन ने बताया कि खुदाई के दौरान मानव की खोपड़ी व हड्डियां तथा कपड़ा मिलने के बाद कबीरदास के रूप में पहचान की गई थी । किंतु इसकी पुष्टि के लिए मृतक की मां गुलबसिया एवं पिता राममिलन वैश्य का ब्लड सैंपल लेकर डीएनए परीक्षण के लिए सागर लैब भेजा गया था। परीक्षण उपरांत इस बात की पुष्टि हुई कि मृतक युवा पुरुष था और सैंपल माता-पिता से मिलान खाता है।

प्रेम प्रसंग बना हत्या का कारण
इस संबंध में अपर लोक अभियोजन देवसर ने बताया कि मृतक कबीरदास की पत्नी रामकली उर्फ रैमन एवं उसके गांव के पडोसी रामायण बैश्य के बीच अवैध संबंध था और दोनों में प्रेम प्रसंग चल रहा था । मृतक ने दोनों आरोपियों को संदिग्ध परिस्थितियों में संबंध बनाते देख लिया था। जहां दोनों आरोपी मृतक को रास्ते से हटाने के लिए ऐसा खौफ नाक कदम उठाया और योजनाबद्ध तरीके से मृतक को शराब पिलाकर गला दबाकर निर्मम हत्या कर दिया गया था। इस सनसनीखेज अंधी हत्या की गुत्थी सुलझाने में सराहनीय बरगवांं पुलिस की भूमिका सराहनीय रही।

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