बड़े शराब कारोबारियों पर कार्रवाई करने से आबकारी का परहेज, 15 लीटर शराब जप्त कर वाहवाही लूट रहा आबकारी अमला

सिंगरौली 21 नवम्बर। बड़े शराब कारोबारियों पर आबकारी महकमा कार्रवाई करने से गुरेज कर रही है। लीटर, दो लीटर शराब की बिक्री करने वाले कारोबारी आरोपियों पर कार्रवाई करते हुए आबकारी पुलिस इन दिनों वाहीवाही लूट रही है। शराब के माफियाओं पर आबकारी महकमा का दरियादिली समझ से परे है

गौरतलब हो कि सिंगरौली जिले के अधिकांश गांवों में देशी-विदेशी शराब के साथ-साथ महुए की शराब व्यापक पैमाने पर पानी की तरह बिक्र रही है। आरोप है कि आबकारी महकमा कार्रवाई के नाम पर महज कोरमपूर्ति करते हुए वाहवाही लेने का भरपूर प्रयास कर रही है। इन दिनों आबकारी महकमे की नींद खुली और शराब माफियाओं पर बड़े दिल दिलाते हुए 1-1, 2-2 लीटर शराब की बिक्री करने वाले आरोपियों पर कार्रवाई करते हुए अपनी पीठ थपथपा रही है। जानकारी के अनुसार आबकारी उप निरीक्षक नीलिमा मार्को एवं आबकारी दल द्वारा वृत्त देवसर में ग्राम बरगवां, बाघडीह, देवरी, उज्जैनी, तेंदुआ में छोटेलाल बंसल, हेमराज प्रजापति, तिलकधारी प्रजापति, इतवरिया बियार, पानमती जायसवाल, लालन सिंह के यहाँ अवैध शराब ठिकानों पर दबिश देकर कुल 6 प्रकरण आबकारी अधिनियम की धारा 34 (1) (क) (च) के तहत मामला पंजीबद्ध किए गए। जिसमें कुल 80 किलोग्राम महुआ लाहन, 15 लीटर हाथभट्टी शराब जप्त किया गया। जिसकी अनुमानित कीमत 7000 रु. है। कार्रवाई में आबकारी मुख्य आरक्षक शिवेन्द्र सिंह परिहार, आबकारी आरक्षक आलोक सिंह, रामनरेश साहू, भास्कर दत्त राल्ही ने सहयोग प्रदान किया। इधर शराब माफियाओं पर जिले का आबकारी महकमा कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है यह बात किसी से छुपी नहीं है। शराब कारोबारियोंं पर जिला आबकारी अधिकारी से लेकर मुख्य आरक्षक भी दरियादिली दिखा रहे हैं।

मिलावटी शराब की बिक्री जोरों पर
जिले में यूरिया मिलाकर शराब की बिक्री धड़ल्ले के साथ की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण अंचलों में हाथभ_ी महुआ के शराब में नशा बढ़ाने के लिए यूरिया मिक्स की जा रही है। यह कारोबार आज से नहीं दशकों से चला आ रहा है। किन्तु पुलिस व आबकारी अमला इससे बेखबर है। शायद उन्हें किसी बड़े हादसे का इंतजार है। हादसा होने के बाद ही उक्त अमले की नींद खुलेगी। चर्चाएं यहां तक हैं कि महुए के शराब का व्यापक पैमाने पर कार्य करने वाले माफियाओं, शराब माफियाओं से बेहतर तालमेल है। इसीलिए इन पर कार्रवाई केवल चुनाव के वक्त की जाती है और चुनाव के बाद उन्हें कारोबार के लिए खुली छूट मिल जाती है। जहां से अच्छा आवक है।

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