सतना में निगमायुक्त सहित अधिकारी कमाई में जुटे !

नगर निगम सतना में आयुक्त के पद पर जो भी अधिकारी आता है उसे मात्र चौराहों के सौंदर्यीकरण की चिंता रहती है या सिविल लाइन क्षेत्र के साफ-सफाई और सुंदरता की रहती है जहां शासकीय अधिकारियों का निवास स्थल है जहां से संपत्ति कर के रूप में एक भी पैसा नगर निगम सतना में जमा नहीं होता राजेंद्र नगर ,खूथीं, धवारी इत्यादि शहर में कई ऐसे इलाके हैं जहां छोटी-छोटी तंग गलियों मे लोग नारकीय जीवन गुजार रहे हैं वह कभी किसी जनप्रतिनिधि या शासकीय अधिकारियों की नजर नहीं जाती कि वहा भी सुधार का कार्य कराया जाए कभी-कभी चुनाव के पहले वोट मांगने के लिए उम्मीदवार अवश्य पहुंचते हैं और आश्वासन देते हैं कि चुनाव जीतने के बाद वे यहां का सुधार अवश्य कराएंगे पर चुनाव जीतने के बाद इन बस्तियों में झांकने भी नहीं जाते।

बता दें कि यहां के रहवासियों से संपत्ति कर नगर निगम सतना द्वारा अवश्य वसूला जाता है पर सुविधा कुछ भी नहीं दी जाती इसी प्रकार गंदी बस्ती उन्मूलन के लिए बड़े-बड़े बिल्डरों से जो आश्रय शुल्क लेकर गंदी बस्ती के सुधार में लगाना चाहिए जिसमें नगर निगम के खाते से पैसा भी नहीं लगता है वे नगर निगम के अधिकारी आश्रय शुल्क भी बड़े बिल्डरों से मिलकर जमा नहीं कराते ऐसे अधिकारियों के विरूद्ध भी सतना के आयुक्त कोई कार्यवाही नहीं करते उल्टे ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और इंजीनियरों को संरक्षण देते हैं ।

सतना में निगमायुक्त सहित अधिकारी कमाई में जुटे !उदाहरण के तौर पर लगभग 1 वर्ष पूर्व से सतना के चौराहों के सौंदर्यीकरण में किए गए भ्रष्टाचार की जांच के लिए संभागीय कार्यालय, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास रीवा, संभाग रीवा, रीवा द्वारा दिनांक 12 जनवरी 2021 को एक द्वितीय स्मरण पत्र अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार संबंधित फाइल उपलब्ध कराने हेतु आयुक्त सतना नगर निगम को लिखा लेकिन आयुक्त द्वारा फाइल उपलब्ध नहीं कराई गई बल्कि उन्हीं भ्रष्ट इंजीनियरों को भ्रष्टाचार करने के लिए दो करोड रुपए और मिल रहे हैं जबकि गंदी बस्तियों में सुधार के लिए नगर निगम सतना में जमा होने वाले 18 करोड रूपये जो आश्रय शुल्क के रूप में जमा होना चाहिए नहीं कराए गये

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