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अधूरा पड़ा है सीधी-बहरी महान नहर का काम,84.99 करोड़ की लागत से बनाई जानी है नहर

सीधी — गर्मी का मौसम फिर से इस वर्ष की दस्तक दे रहा है परंतु सीधी-बहरी महान नहर के काम में लगा ब्रेक अभी तक खुल नहीं पाया है। निर्माण कंपनी के यहां ईडी के पड़े छापे के बाद अधूरे कार्यों की खोज खबर लेने वाला कोई नहीं रह गया है। पूर्व में काम कर चुके पेटी ठेकेदार भी भुगतान की आस में बैठे हुए हैं। अधूरी पड़ी नहर की न तो प्रशासन और न ही अधिकारी खबर ले रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि गुलाब सागर महान परियोजना अंतर्गत पहले चरण में खड्डी से सीधी तक की नहर का निर्माण कराया गया और फिर बाद में इसी नहर को सीधी से आगे बहरी तक ले जाने की प्रक्रिया शुरू करायी गई। नहर निर्माण कंपनी मेन्टेना ने किसी तरह खड्डी से सीधी तक की नहर तो बना डाली लेकिन दूसरे चरण के काम को तीव्रता के साथ नहीं किया जा रहा है। करीब 25 किमी की मुख्य नहर अभी भी पूरी तरह से नहीं बन पाई है। माइनर नहरों का काम तो अधर में ही लटका हुआ है। इतना ही नहीं महान नहर को नये कार्य से जोडऩे का काम भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। एक तरफ नहर निर्माण का कार्य मंथर गति से और आधा-अधूरा चल रहा है तो दूसरी तरफ नहर निर्माण कंपनी ऊपर से दवाब बनाकर 60 फीसदी किये गये काम का 90 प्रतिशत से ज्यादा का भुगतान प्राप्त कर लिया है। पूर्व में भी कंपनी ने कुछ इसी तरह से ज्यादा भुगतान ले लिया था। 

कंपनी पर छापे के बाद से बढ़ा और अवरोध


बताया जाता है कि बीते महीने मेन्टेना कंपनी के यहां ईडी का छापा पड़ गया जिस कारण कंपनी के कर्ता-धर्ता छापे में ही व्यस्त हो गए और अब तो सदमे से नहीं उबर पा रहे हैं। ईडी के छापे के दौरान कंपनी के सारे रिकार्ड सीज हो चुके हैं। कुल मिलाकर पहले कोरोना ने तो अब ईडी के छापे ने सीधी-बहरी महान नहर निर्माण में ग्रहण लगा दिया है। निर्माण कार्य के लिए तय समयसीमा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है पर नहर निर्माण अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पा रहा है। नहर निर्माण को लेकर जिन किसानों ने उम्मीद लगा रखी थी कि उनके खेतों की नहर के पानी से सिंचाई होगी वह भी अधर में पड़ा हुआ है। इतना जरूर है कि कंपनी आधा-अधूरा काम करने के बाद भी पूरे फायदे में देखी जा रही है। 

माइनर नहरों को कैसे देंगे पानी?
 

करीब 84.99 करोड़ की लागत से बन रही महान नहर के दूसरे चरण का कार्य भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है। मसलन मुख्य नहर से माईनर नहरों को पानी देना मुश्किल ही होगा। बता दें कि तेंदुआ से सीधी और सीधी के बाद खजुरी के आगे तक नहर को इतना गहरा कर दिया गया है कि यहां के आसपास के खेतों को मुख्य नहर से पानी पहुंचाना कठिन ही नहीं मुश्किल भरा रहेगा। कंपनी द्वारा नहर निर्माण में ड्राइंग डिजाइन की अनदेखी तो की ही जा रही है नक्शे के विपरीत निर्माण कार्य कराने का भी आरोप लग रहे हैं। नहर निर्माण में कंपनी विभागीय निर्देशों का पालन नहीं कर रही बावजूद इसके कोई कुछ भी नहीं कर पा रहा है। 

गुणवत्ता की अनदेखी 

गुलाबसागर महान नहर निर्माण में शुरू से ही गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। गुणवत्ता की अनदेखी के कारण ही खड्डी से सीधी तक की बन चुकी नहर कई बार टूट चुकी है। अब सीधी से बहरी तक की निर्माणाधीन नहर भी कुछ इसी नक्शे कदम पर तैयार हो रही है। ठेेकेदार मनमानी तौर पर नहर को घूमा फिराकर निकाल रहे हैं तो माइनर नहरो में पानी किस हिसाब से पहुंचाया जाएगा इसका ध्यान नहीं रखा जा रहा है। अभी तक जिस नहर का निर्माण हुआ है उसका मुआयना करने पर कोई नहीं बता सकता कि यह खेतो में पानी पहुंचाने के लिए बनी है या फिर नदी के आकार में नहर बनाई जा रही है। नहर निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार उठ रहे सवालों के बाद भी न तो क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि संज्ञान ले रहे और न ही प्रशासन किसी तरह की कार्यवाही कर रहा है। विभागीय अधिकारी तो केवल ठेकेदार की हां में हां मिला रहे हैं। 

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