एमपी के इस भूतहा गांव की सच्चाई आई सामने,इस वजह से रोज बदल बदल जाते हैं रास्ते,ग्रामीण घर जाने होते हैं परेशान

सिंगरौली- दुनियाभर में ऐसे कई स्थान है जिन्हें शापित माना जाता है। अर्थात किसी शाप के चलते अब यह या तो भुतहा है या फिर उजाड़ पड़े हैं। हालांकि ऐसे भी स्थान है जो किसी शाप के चलते अब एक तीर्थ बन गए हैं। लेकिन हम आज आपको मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के एक ऐसा रहस्यमयी गांव हैं जहां हर रोज नए रास्ते बन जाते हैं। कुछ लोग रोड बदलने के पीछे भुतहा बजे मानते थे लेकिन धीरे-धीरे जागरूकता होने के बाद लोग समझ गए कि कंपनी वाले जरूरत के हिसाब से रोड बदल देते हैं इसके पीछे की बजह जानने के लिए पढ़िए यह खबर।

बता दें कि देश में बिजली उत्पादन के लिए विभाग सिंगरौली जिला राजस्व के मामले में मध्यप्रदेश में सबसे अधिक कमाउ वाला जिला बन चुका है। एनसीएल की कई परियोजनाएं कोयले के उत्खनन में लगी हुई है। जिले के नगर निगम क्षेत्र में भी कोयले का उत्खनन किया जाता है। जिला मुख्यालय से सटे मुहेर गांव में कोयले का प्रचुर भंडार है जिसके चलते गांव के चारों तरफ खुली खदान संचालित हो गई है इन परिस्थितियों में गांव वालों को इन खदानों के बीच से होकर ही मुख्यालय आना जाना होता है। ग्रामीण कहते हैं कि खदान क्षेत्र में कई दशक से हर रोज रास्ते बदल जाते हैं जिसके चलते हुए अपने घर पहुंचने का रास्ता भी भूल जाते हैं।

खदानों में रोज बदल जाते हैं रास्ते

इस गांव के लोगों का कहना है कि गांव का रास्ता भूल भुलैया है गांव का हर आदमी कई बार गांव का रास्ता भटक कर खदान क्षेत्र पर चले जाते हैं ग्रामीण कहते हैं कि सुबह जिस रास्ते से गुजर कर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं लेकिन शाम होते-होते जब वह वापस आते हैं तो उस रास्ते को एनसीएल उजाड़ देता है और नई जगह एक नया रास्ता बना देता है। जिसके चलते ग्रामीण आए दिन अपने घर जाते समय रास्ता भटक जाते हैं। ग्रामीण कभी एनसीएल के पहाड़ में तो कभी खदान की नीचे वाले रास्ते पर चले जाते हैं।

ब्लास्टिंग से ग्रामीण परेशान

मुहेर गांव के लोग एमसीएल के अम्लोरी खदान से होते हुए अपने गांव पहुंचते हैं लेकिन एनसीएल में ओवी हटाने का काम कर रहे संविदा कर ज्यादा प्रोडक्शन के लिए मानक से ज्यादा बारूद इस्तेमाल कर ब्लास्टिंग करते हैं जिसके चलते ब्लास्टिंग से बड़े-बड़े पत्थर बोल्डर मुहेत और अमलोरी मार्ग पर फैल जाता है कई बार तो बड़ा हादसा सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मियों की समझदारी ने बड़ी घटना को रोक दिया। ब्लास्टिंग के समय सीआईएसफ राहगीरों को खदान क्षेत्र के पहले रोक दिया जाता है और ब्लास्टिंग होते ही रास्ते को चालू कर दिया जाता है।

गांव के लोग प्रदूषित हवा लेने को मजबूर

विस्फोटक का हर दिन उपयोग करने के चलते पूरा पर्यावरण प्रदूषित हो चुका है पर्यावरण प्रदूषण के बाद भी ग्रामीण मजबूर खदानों के बीच रह रहे हैं ग्रामीणों के हालातों की जानकारी लेने का समय ना तो सरकार में बैठे नुमाइंदों को है और ना ही जिला प्रशासन को अगर है तो सिर्फ कोयले की कि ज्यादा से ज्यादा कोयला का उत्पादन कैसे किया जाए। ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधा सड़क पानी बिजली स्वास्थ्य शिक्षा के लिए मरहूम है।

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