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माड़ा थाना पुलिस खनन माफिया को बचाने के फिराक में,वन मुंशी की मौत पर कर रही लीपापोती ?

सिंगरौली — जिले के वनांचल कोयले का प्रचुर भंडार है जमीन से दो-चार फीट खोदने के बाद ही कोयला निकलने लगता है ऐसे में यहां माफिया सक्रिय है हाल ही में वन मुंसी की संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने के बाद परिवार सहित ग्रामीण मुखर हो गए हैं परिजनों ने आरोप लगाया है कि यह हादसा नहीं हत्या है लेकिन पुलिस हादसे के नजरिए से ही देख रही है। फिलहाल अभी तक पुलिस को कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।

बता दें कि माड़ा थाना क्षेत्र में झरिया व नादों अवैध खदान संचालित है इन अवैध खदानों से उत्खनन रोकने के लिए पुलिस व जंगल विभाग ने कोई भूत कार्यवाही नहीं की जिससे खनन माफिया के गुर्गे अंधेरा होते ही जंगल में खनन करने पहुंच जाते थे खनन इस कदर हुआ कि वहां लंबी सुरंग बन गई है ग्राम पंचायत नादो जंगल में तो खदान के का क्षेत्र काफी बड़ा हो गया है। सूत्रों की माने तो वन कर्मी ने खनन रोकने के लिए प्रयास किया तो माफिया के गुर्गों ने वन कर्मी को रास्ते से हटा दिया हो। फिलहाल पुलिस हादसा ही मान रही है।

अंधेरे में हो रहा कोयले का अवैध उत्खनन व परिवहन

मिली जानकारी के मुताबिक अंधेरा होते ही अवैध खदानों से ट्रैक्टर ट्राली वह साइकिलोंं से कोयले का परिवहन शुरू हो जाता है और एक बार जब कोयला परिवहन करने वाली वाहनों और साइकिललो का दौर शुरू हो जाता है तो दिल के उजाला होने से पहले तक यह सिलसिला लगातार चलता रहता है। सूत्र बताते हैं कि कोयले के इस अवैध उत्खनन में पुलिस व वन विभाग की मिलीभगत रहती है यही वजह है की ग्रामीण भी अवैध उत्खनन की शिकायत करने का साहस नहीं जुटा पाते और यदि कभी कभार शिकायत थाने में की भी जाती है तो पुलिसकर्मी ही मोतियों को खबर दे देते हैं कि अमुक व्यक्ति के द्वारा अवैध उत्खनन की शिकायत की जा रही है माफिया शिकायतकर्ता के पास पहुंच जाते हैं और फिर उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है।

होटलों व ईट भट्ठा में खपाया जाता है कोयला


बताया जाता है कि अवैध खदानों से कोयले का उपयोग क्षेत्र में चल रहे होटलों व सैकड़ों ईट भट्टों में किया जाता है वन काटी गई महंगी लकड़िया घरों के निर्माण व भट्टों मैं भेजा जाता है लेकिन हैरानी इस बात की है कि इतने बड़े अस्तर पर चल रहे गोरखधंधे पर ना तो कभी पुलिस ने और ना ही वन विभाग ने नकेल कसने की कोशिश की। और जब अब वन विभाग के अधिकारियों ने इसे संज्ञान में लिया है इससे साबित होता है कि खनन माफिया की पकड़ कितनी मजबूत है।

वन मुंशी की मौत के बाद क्षेत्र में दहशत


जिस दिन से वन मुंशी का संदिग्ध परिस्थितियों में जो मिला है। उस दिन सें क्षेत्र में दहशत का माहौल है साथ ही उसके बाद कई हत्या की घटनाएं होते जा रहे हैं। जिसको लेकर पुलिस की सक्रियता क्षेत्र में बढ़ गई है उधर खनन माफिया के गुर्गे अंडर ग्राउंड होनेे में अपनी भलाई समझ रहे हैं। अब क्षेत्र में ना तो ट्रैक्टर ट्रालियों से और ना साइकिलो से कोयले का परिवहन हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि जंगल को खोखला करने वाले बाहर के नहीं बल्कि गांव के ही दबंग लोग कोयले का अवैध उत्खनन व परिवहन में लिप्त हैं और इन दबंग किस्म के लोगों को पुलिस प्रशासन का खुला संरक्षण है जिससे शासन को लाखों रुपए की राजस्व की क्षति हो रही है।

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