सिंगरौली-नसबंदी अभियान में 1 बेड में 2 महिलाओं को लेटाया,कोविड-19 गाइड लाइन की उड़ी धज्जियां, CMHO महिलाओं में व्यस्त!

अस्पताल प्रबंधन ने नसबंदी अभियान के तहत महिलाओं का ऑपरेशन के उपरांत सभी महिलाओं को एक ही वार्ड में एक बेड पर दो महिलाओं को लेटाया जा रहा है। जबकि जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार लगातार कोरोना वायरस की तीसरी लहर को लेकर चिंतित है।

सिंगरौली 12 जनवरी। जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही फिर से सामने आई है। अस्पताल प्रबंधन ने नसबंदी अभियान के तहत महिलाओं का ऑपरेशन के उपरांत सभी महिलाओं को एक ही वार्ड में एक बेड पर दो महिलाओं को लेटाया जा रहा है। जबकि जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार लगातार कोरोना वायरस की तीसरी लहर को लेकर चिंतित है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन सरकार और जिला प्रशासन की इस चिंता को और बढ़ा रहा है। बताया जाता है कि सीएमएचओ महिलाओं की दरबार खूब करते हैं वह अपने जरूरी काम भी दरबार के चक्कर में छोड़ देते हैं.

दरअसल जिले में पिछले तीन दिन से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। मंगलवार को जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में नसबंदी कराए जाने के लिए महिलाओं का अभियान के तहत ऑपरेशन किया जा रहा था। ऑपरेशन उपरांत सभी महिलाओं को आईसीयू, पीआईसीयू वार्ड के ठीक सामने वाले वार्ड में एक बिस्तर पर दो-दो महिलाओं को एक साथ लिटाया गया था। इतना ही नहीं इस दौरान यदि कोई कोरोना वायरस का बड़ा बिस्फोट होता है तो निश्चित रूप से कहीं ना कहीं अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही ही मानी जाएगी। क्योंकि एक वार्ड के एक ही बेड पर दो-दो महिलाओं को एक साथ लेटाना और बिना मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ महिलाओं व उनके परिजनों का उसी कक्ष में होना निश्चित रूप से कहीं न कहीं अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है। स्वास्थ्य महकमा के सूत्र बताते है की CMHO महिला प्रेमी है वह नर्सो या फिर महिलाओं से खूब दरबार करते है। दरबार के बीच यदि कोई जरूरी काम भी आ जाता है तो वे उसे छोड़ देते हैं।

यह कोई पहला मामला नही हैं इसके पूर्व भी ऐसा देखने को मिला था। लेकिन एक बार फिर इसी तरह की लापरवाही होने पर इसके क्या मायने निकाले जाएं या यूं कहा जाए कि अस्पताल प्रबंधन कोविड-19 की तीसरी लहर को लेकर किसी भी तरह चिंतित नहीं है। यही कारण है कि चिकित्सालय में उपचार के लिए आए सैकड़ों की संख्या में मरीज बिना मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग के प्रतिदिन देखे जा रहे हैं। लेकिन कोविड-19 गाइड लाइन का पालन कराने अस्पताल प्रबंधन तनिक भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

 

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