CM Shivraj बकरी पालक किसानों के लिए की बड़ी तैयारी, प्रतिदिन 3:30 करोड़ होगा हस्तांतरित,यह है प्लान

सीएम शिवराज सिंह चौहान बकरी पालन किसानों की आय बढ़ाने के लिए एमपी स्टेट कोऑपरेटिव डेहरी फेडरेशन को प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं जहां एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन इसी महीने 15 नवंबर से जनजातीय क्षेत्रों में बकरी के दूध (Goat milk) का संकलन भी शुरू करेगा. इस योजना का मकसद आदिवासी लोगों की आय (Income) बढ़ाना है। संचालक के.प्रबंध शमीमुद्दीन ने जानकारी दी है कि फेडरेशन द्वारा संचालित दुग्ध संघों द्वारा प्रतिदिन लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की राशि का हस्तांतरण शहरी अर्थ-व्यवस्था से ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था में किया जा रहा है.

शमीमुद्दीन ने कहा कि दुग्ध संकलन करने वाले टैंकरों में डिजिटल लॉक और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाएगा, दूध में किसी भी तरह की मिलावट नहीं की जा सकेगी.उन्होंने कहा कि पशुपालन (Animal Husbandry) और मत्स्य पालन से भी आय में इजाफा हुआ है. लॉकडाउन के दौरान जहां कई रोजगार प्रभावित हुए थे, वहीं इस दौरान सभी 6 दुग्ध संघों द्वारा दुग्ध उत्पादक किसानों से 2 करोड़ 54 लाख लीटर दूध अतिरिक्त रूप से खरीदा गया. इसके लिए दुग्ध उत्पादकों को 94 करोड़ रूपये का अतिरिक्त भुगतान होने से उन्हें एक महत्वपूर्ण आर्थिक संबल मिला.

जनजातियो से दूध की खरीदेगी सरकार

बताया कि फेडरेशन द्वारा संचालित दुग्ध संघों द्वारा प्रतिदिन लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की राशि का हस्तांतरण शहरी अर्थ-व्यवस्था से ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था में किया जा रहा है.दुग्ध संघों द्वारा 7 हजार से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों के 2.5 लाख सदस्यों के माध्यम से प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध का संकलन किया जा रहा है.लॉकडाउन के दौरान जहां कई रोजगार प्रभावित हुए थे, वहीं इस दौरान सभी 6 दुग्ध संघों द्वारा दुग्ध उत्पादक किसानों से 2 करोड़ 54 लाख लीटर दूध अतिरिक्त रूप से खरीदा गया.

नए उत्पादों का विकास

दुग्ध संघों द्वारा नवीन उत्पाद निर्माण सुविधाओं का भी निर्माण किया जा रहा है.इंदौर में आइसक्रीम और जबलपुर में पनीर संयंत्र की स्थापना की गई है जबकि सागर तथा खंडवा में नवीन दुग्ध प्र-संस्करण स्थापित किये गए हैं.दुग्ध चूर्ण निर्माण में आत्म-निर्भरता के मद्देनजर इंदौर में 30 मीट्रिक टन क्षमता के संयंत्र की स्थापना की जा रही है.दुग्ध संघों द्वारा आपूर्ति किए जा रहे दूध, घी, दही, पेड़े, मट्ठा, श्रीखंड, पनीर, छेना रबड़ी, गुलाब जामुन, रसगुल्ले, आइस्क्रीम, शुगर-फ्री पेड़ा, मिल्क केक, मीठा दही, फ्लेवर्ड मिल्क आदि गुणवत्ता के चलते लोगों में काफी लोकप्रिय हैं.

प्रशिक्षित लोग रहेंगे डेयरी संयंत्रों में

शमीमुद्दीन ने बताया कि डेयरी संयंत्रों में प्रशिक्षित जन-शक्ति उपलब्ध कराने के लिए दूध एवं दुग्ध पदार्थ तकनीशियन का ट्रेड औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से प्रारंभ किया गया है. स्मार्ट सिटी की अवधारणा के अनुरूप नये स्मार्ट पार्लर भी स्थापित किये जा रहे हैं।दुग्ध संघों में वेब आधारित ईआरपी सॉफ्टवेयर का क्रियान्वयन शुरू किया गया है.इससे दूध संकलन से दूध वितरण तक की संपूर्ण प्रक्रिया एकीकृत कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित होगी.

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने देगें जानकारी

दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को दुग्ध उत्पादक के साथ विक्रय के अतिरिक्त कई अन्य सुविधाएं भी दी जा रही हैं. दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए समितियों को पोषक आहार के बारे में भी जानकारी देगें।इनमें उचित मूल्य पर पशु आहार, चारा बीज, पशु नस्ल सुधार, पशु प्रबंधन प्रशिक्षण, किसान क्रेडिट कार्ड, पशुओं की डी-वार्मिंग, बच्चों के लिए पुरस्कार योजना और बीमा योजना का लाभ शामिल है.

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