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MP की राजनीति में Cow का प्रवेश,कमलनाथ ने शिवराज की चिंता बढ़ा दी थी, 2023 के चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया ?

Cow's entry in MP's politics, Kamal Nath raised Shivraj's concern, was used for electoral gains of 2023

Cow’s entry in MP’s politics —  गौमाता Cow राजनीति की जोर-शोर से वापसी हुई है। कुल मिलाकर पवित्र गाय पुन: राजनीति का विषय बन गई है। निश्चित रूप से यह बयान हिन्दुत्व ब्रिगेड के लिए कर्णप्रिय था जो नमो को अपनी सोच के अनुसार मानते हैं और इसे अल्पसंख्यक साम्प्रदायिक तत्वों को हिन्दुओं से खतरे के प्रतीक के रूप में प्रयोग करते हैं.लेकिन अब कांग्रेस विधायक ने राजनीति में गाय की इंट्री करा दी है.यहां चिंता गाय Cow के पालन पोषण की नहीं, बल्कि उन करोड़ों हिंदुओं की आस्था की है, जो दोनों पार्टियों का बड़ा वोट बैंक हैं.

बता दे की बुधवार सुबह सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अचानक सोशल मीडिया पर सूचना दी कि गौ-कैबिनेट cow Cabinet बनेगी। इसने सभी को चौंका दिया। यहां तक कि पशुपालन मंत्री प्रेमसिंह पटेल को भी इसकी भनक नहीं लगी, जबकि वे इस कैबिनेट के सदस्य भी हैं. मिडिया रिपोर्ट की माने तो  मंत्री जी ने कहा की – मुझे गौ-कैबिनेट के बारे में अधिकृत जानकारी नहीं है.

मध्य प्रदेश की सियासत में कांग्रेस विधायक ने 2023 में होंने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर गायों Cow की फिर से एंट्री करा दी है. इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के नेता एक बार फिर सक्रिय होते नजर आ रहे हैं. दरअसल, राज्य की राजनीति में शुरू से ही गाय एक बड़ा मुद्दा रही है। इसलिए कांग्रेस विधायक ने गायों Cow को लेकर ऐसा दावा किया है, जिससे राज्य के सियासी मैदान में यह मुद्दा फिर से सामने आ गया है.

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2023 की मुख्य समस्या

वास्तव में, भाजपा और कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पूरी ताकत से फील्डिंग मजबूत करना शुरू कर दी  है. मध्य प्रदेश चुनाव में धार्मिक मुद्दे के बीच प्रदेश की सियासत में फिर से मवेशियों का मुद्दा उठने लगा है. 2018 के विधानसभा चुनाव में भी गायों Cow को लेकर कई वादे किए गए थे. वहीं, कांग्रेस की ओर से यह फिर से शुरू हो गया है.

विकास के एजैंडे से जोड़ा 
भाजपा ने बड़ी चालाकी से गौमाता Cow को अपने विकास के एजैंडे में जोड़ दिया है, जिसके दम पर वह केन्द्र और 19 राज्यों में सत्ता में आई है। गाय भाजपा की दीर्घकालीन रणनीति का हिस्सा है और इसे विभिन्न राज्यों के चुनाव घोषणा पत्र में भी शामिल किया गया है और इसको संरक्षण देने वाले भगवाधारी मंत्री, नेता और स्वामी हैं, जिन्होंने अपनी और पार्टी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इसे एक मुद्दा बनाया है, जिसके माध्यम से वह बहुसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करेंगे और महाराष्ट्र, हरियाणा तथा झारखंड में आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने के लिए इसका उपयोग करेंगे.

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राष्ट्रीय पशु घोषणा की मांग

कांग्रेस की ओर से पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कट्टर हिंदुत्व के रास्ते पर चलते हुए गाय Cow को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की. पीसी शर्मा ने कहा कि “गायों को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। कमलनाथ सरकार के दौरान गौशालाएं बनाई गईं. हम गायों के लिए अथक प्रयास कर रहे थे. कांग्रेस गायों को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की सिफारिश करती थी, लेकिन उससे पहले हमारी सरकार चली गई.” अब बीजेपी मवेशियों के नाम पर खूब राजनीति करती है. हालांकि, अगर गाय का कोई सच्चा रहनुमा है, तो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए अपनी आवाज बुलंद करे और हमारे सुर पर सुर मिलाएं.

भाजपा पर निशाना साधते हुए पीसी शर्मा ने कहा कि आज सड़कों पर गायों Cow को मारा जा रहा है, कमलनाथ सरकार ने गायों के रखरखाव के लिए धन जुटाया था. लेकिन सरकार बदलने से वह पैसा कम हो गया है।अगर वे गाय रखने के लिए पैसे देने की घोषणा भी करते हैं, तो यह गायों को सुरक्षित और अच्छा नहीं बनाएगा. अगर बीजेपी गायों की सच्ची रहनुमा  है, तो उन्हें गायों को राष्ट्रीय पशु घोषित करने दें.

खासकर कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा की मांग का उनकी पार्टी के विधायक आरिफ मसूद ने समर्थन किया. कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, जो हमेशा अपनी टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में रहते हैं, ने पीसी शर्मा के बयान की प्रतिध्वनि करते हुए कहा, “गाय Cow को राष्ट्रीय पशु घोषित करने में कोई आपत्ति नहीं है, अगर यह हिंदुओं को भाता है तो मुसलमानों को कोई आपत्ति नहीं है.” कोई बात नहीं. गायों के कल्याण के लिए हमारा पूरा समर्थन है. अगर देश की विशाल आबादी खुश रहती है, तो हमें कोई समस्या नहीं है.

बदले में बीजेपी

बीजेपी ने कांग्रेस विधायकों की मांगों पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राज्य मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने शिवराज सिंह चौहान को पशुपालकों के लिए एक आकर्षक व्यवसाय बना दिया है, जिस पर कांग्रेस को आपत्ति है. कांग्रेसी कहते हैं इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करो, लेकिन परवाह किसे है। इसकी मांग को लेकर साधु-संतों के सड़कों पर उतरने पर कांग्रेस की केंद्र सरकार ने फायरिंग कर दी. भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस को लोगों को भ्रमित करना चाहिए और इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति बंद करनी चाहिए.

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दरअसल, राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि कांग्रेस 2023 के लिहाज से किसी वर्ग को नाराज कर खुद का नुकसान नहीं करना चाहती है इसलिए अब से कांग्रेस टीम हर वर्ग के लिए साधने की रणनीति में लगी हुई है। इसलिए कांग्रेस ने मवेशियों को राष्ट्रीय पशु घोषित कर बड़ा दांव लगाया है. यही वजह है कि बीजेपी इस मामले में सक्रिय हो गई है.

कांग्रेस एक हजार गौशालाओं का फार्मूला लेकर आई थी

एक अर्शे से प्रदेश की राजनीति में गायों Cow को लेकर प्रदेश की सियासत में लगातार नए दावे किए जा रहे हैं, लेकिन शिवराज सरकार कोई ठोस फैसला नहीं ले पाई है. इस बीच 15 महीने से सत्ता में रही कांग्रेस एक हजार गौशाला का फॉर्मूला लेकर आई थी लेकिन 15 महीने में कमलनाथ सरकार गिर गई और सत्ता की बागडोर एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान के हाथ में आ गई.उपचुनाव में भी यह मुद्दा उठा था.

सत्ता में आते ही शिवराज ने गाय कैबिनेट बनाकर कमलनाथ के ‘गौशाला मिशन’ की पुरानी सुर्खियों को दबाने की कोशिश की है. शिवराज ने 2018 में खजुराहो में जैन मुनि विद्यासागर महाराज के चातुर्मास के दौरान घोषणा की कि जब वह सरकार में लौटेंगे तो वह एक गाय मंत्रालय बनाएंगे. लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ. हालात यह है की आज भी गाय Cow सड़को पर ही हैं.

 हकीकत देखिए… गाय की खुराक 20 रुपये से घटाकर 1.60 रुपये कर दिया गया है

मध्य प्रदेश की सियासत में हर बार एक गाय जारी की गई है. गायों और खलिहानों को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। वर्तमान में राज्य में 1.80 लाख गाय रखने के लिए लगभग 1300 गौशाला हैं। बताया जाता है कि पिछली कमलनाथ सरकार ने बजट में प्रति गाय 20 रुपए दिए थे.

पिछले वित्तीय वर्ष में पशुपालन विभाग का बजट 132 करोड़ रुपये था, जबकि 2020-21 में यह सिर्फ 11 करोड़ रुपये था. यानी करीब 90 फीसदी कटौती हो चुकी है. प्रति गाय आधिकारिक खुराक 20 रुपये से घटकर 1 60 पैसे हो गई है.

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