NH- 39 का निर्माण कार्य कछुआ चाल से पुनः प्रारंभ, गर्मी में क्या बदल जाएगा नेशनल हाईवे की तस्वीर

पुरानी कंपनी द्वारा जो कार्य कराए गए थे वो आधे-अधूरे होने से वाहनों की आवाजाही में भारी व्यवधान आ रहा था। जिसके चलते वाहनों को चलने में जगह-जगह काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

सीधी -लंबे समय से बार-बार रुकते प्रारंभ होते नेशनल हाइवे- 39 में सीधी-सिंगरौली फोर लेन के अधूरे पड़े निर्माण कार्य अब कछुआ चाल से फिर से शुरू हो चुके हैं। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो आने वाले गर्मी के मौसम के बाद इस नेशनल हाईवे की तस्वीर बदल जाएगी।

नए सिरे से हुए हैं टेंडर

केन्द्रीय सडक़ परिवहन मंत्रालय के हस्ताक्षेप के बाद पिछले वर्ष पुराने टेंडर को निरस्त करने की कार्यवाही के साथ ही नये सिरे से टेंडर आमंत्रण का कार्य पूर्ण किया गया। टेंडर पाने वाली कंपनी द्वारा काफी तेजी के साथ जगह-जगह अपूर्ण पड़े कार्यों को पूरा कराने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। सीधी जिले में बहरी-कुबरी क्षेत्र में सडक़ निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। पुरानी कंपनी द्वारा जो कार्य कराए गए थे वो आधे-अधूरे होने से वाहनों की आवाजाही में भारी व्यवधान आ रहा था। जिसके चलते वाहनों को चलने में जगह-जगह काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

दरअसल पूर्व गैमन इंडिया कंपनी द्वारा पेटी पर दूसरी कंपनी से कार्य कराया जा रहा था। जिसके चलते भुगतान को लेकर दोनों के बीच लंबा विवाद शुरू होने एवं मामला कोर्ट तक पहुंच जाने के कारण करीब तीन वर्ष से नेशनल हाइवे 39 में सीधी-सिंगरौली का कार्य पूरी तरह से ठप्प हो चुका था। अब नए सिरे से दूसरी कंपनी को टेंडर मिल जाने के बाद जगह-जगह अधूरे छोड़े गए निर्माण कार्यों को पूर्ण कराने के लिए मशीनरी उतार दी गई है। कंपनी द्वारा गिट्टी की व्यवस्था के लिए क्रेशर भी लगाए गए हैं। जिससे सडक़ का निर्माण कार्य द्रुतगति से हो सके। बहरी से पूर्व पुल का निर्माण कार्य भी शुरू कराने के लिए मशीने पहुंच चुकी हैं, जिससे यहां अधूरे कार्य को पूर्ण करने के साथ ही पुल में स्लैब डालने का कार्य पूर्ण किया जा सके। इसी तरह बहरी के आगे गोपद नदी के बड़े पुल में पिलर का काम हो चुका है लेकिन ऊपर स्लैब न पडऩे से वाहनों को पुरानी जर्जर संकीर्ण पुल से ही निकलना पड़ रहा है। ऐसे में हादसे भी हो रहे हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग 39 के फोर लेन का कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने के कारण इसका तीव्र विरोध भी हो रहा था। लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर 6 साल बाद भी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य पूर्ण क्यों नहीं हो रहा है। पुरानी कंपनी द्वारा सीधी से सिंगरौली तक की पुरानी टू-लेन सडक़ को फोर लेन में बनाने का कार्य किया जा रहा था। कई जगहों में तो दूसरे लेन के निर्माण के लिए अर्थवर्क का कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है। वहीं सिंगल लेन में भी जगह-जगह कार्यों के अधूरे होने के कारण वाहनों को बार-बार एक लेन से दूसरे लेन में आने की मजबूरी बनी हुई है। नई कंपनी द्वारा जिन स्थानों पर दूसरे लेन के अर्थवर्क का कार्य भी नहीं हुआ था वहां पर मिट्टीकरण का कार्य कराने के साथ ही उसका समतलीकरण भी मशीन से किया जा रहा है। जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों लेनों का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। पुरानी कंपनी द्वारा सीधी जिले की सीमा पर गोपद नदी के आगे पहाड़ कटिंग का कार्य शुरू किया गया था। ये कार्य भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा हुआ है। जिसके चलते इसको भी जल्द ही शुरू होने की संभावना बताई गई है। यदि गोपद नदी के अधूरे पड़े पुल का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाय और उसके आगे पहाड़ की कटिंग एवं फोर लेन का कार्य हो जाय तो भारी वाहनों को भी आने-जाने में काफी समय बचेगा। यात्री वाहनों को सीधी से सिंगरौली पहुंचने में वर्तमान में करीब पांच घंटे का समय लग रहा है। यदि सडक़ की हालत बेहतर हो जाय तो ये दूरी तीन घंटे में ही पूरी की जा सकती है। राष्ट्रीय राजमार्ग के अधूरे पड़े कार्यों को पूर्ण करने के लिए फिर से कार्य शुरू होने से सीधी एवं सिंगरौली जिले के लोगों ने राहत की सांस ली है। उन्हे फिर से उम्मीद बंधी है कि राष्ट्रीय राजमार्ग का अधूरा पड़ा कार्य गर्मी तक में काफी हद तक पूर्ण हो जाएगा। जिससे बरसात में बड़े वाहनों के जगह-जगह फंसने से निर्मित होने वाली जाम की समस्या भी दूर होगी। सिंगरौली जिले में देवसर से बरगवां तक की सडक़ की हालत काफी जर्जर हालत में है। वहीं बहरी से लेकर देवसर के पहले तक की सडक़ भी पूरी तरह से उखड़ चुकी है। यहां से वाहनों को निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

टू-लेन का कार्य अधूरा

राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 39 में सीधी-सिंगरौली मार्ग के फोर लेन निर्माण के लिए शासन द्वारा बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहित की गई है। जिससे सडक़ की चौड़ाई पर्याप्त होने के साथ ही इसका टू-लेन निर्माण भी पूर्ण हो सके। पुरानी कंपनी द्वारा पुरानी टू-लेन सडक़ में ही नवीन सडक़ निर्माण के लिए सीधी जिले में कार्य किया गया था। टू-लेन के लिए जो कार्य किए गए हैं वो पूरी तरह से अधूरे हैं। अधिकांश स्थानों में अर्थवर्क का कार्य ही पूर्ण नहीं किया गया है। जिसके चलते जिन लोगों की भूमि सडक़ में फंसी हुई है व मुआवजा पाने के बाद भी अपना कब्जा बनाए हुए हैं। जिन स्थानों में टू-लेन सडक़ का निर्माण कार्य किया गया है वह जगह-जगह से अधूरे होने के कारण वाहनों को उनका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। नई कंपनी द्वारा टू-लेन के अधूरे कार्यों को पूर्ण करने के लिए फिलहाल ऐसे स्थानों में कार्य किया जा रहा है जहां अर्थवर्क का कार्य ही अधूरा था। अर्थवर्क का कार्य पूर्ण होने के बाद यहां पक्का निर्माण कार्य के साथ ही डामरीकरण का कार्य भी किया जाएगा। अगले महीने से निर्माण कार्यों में और तेजी दिखने लगेगी।

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