REWA का नन्हा Google Boy: गूगल को दी मात, 14 माह के नन्हे से बच्चे ने बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड

समान क्षेत्र में रहने वाले 14 माह के एक नन्हे से बच्चे ने वह कारनामा कर दिखाया है जिससे अब उसे रीवा का सर्च इंजन के नाम से पहचान बन गई है. 14 माह के बच्चे ने गूगल को पीछे करते हुए अद्भुत मेमोरी पावर बनाई है जिससे वह सेकंडो में चीजों को पहचान लेता है.

कहते हैं कि पूत के पाँव पालने में दिख जाते हैं । अर्थात किसी व्यक्ति के भविष्य का अनुमान उसके वर्तमान लक्षणों से लगाया जा सकता है । दरअसल 14 माह के बच्चे काबिलियत देख न केवल मां-बाप बल्कि देश प्रदेश आश्चर्यचकित है । अब इस बच्चे को लिटिल गूगल वायने वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में जगह दी है बच्चे की याददाश्त इतनी तेज है कि वह एक बार देख सुनकर भूल नहीं पाता शुरुआती दौर पर नन्हे बच्चे ने दुनिया भर के देशों के झंडे दिखाकर माता-पिता ने सवाल जवाब किए तो उसने तुरंत सही जवाब दे दिए।

समान क्षेत्र में रहने वाले 14 माह के एक नन्हे से बच्चे ने वह कारनामा कर दिखाया है जिससे अब उसे रीवा का सर्च इंजन के नाम से पहचान बन गई है. 14 माह के बच्चे ने गूगल को पीछे करते हुए अद्भुत मेमोरी पावर बनाई है जिससे वह सेकंडो में चीजों को पहचान लेता है. 25 फरवरी 2022 को एक ऑनलाइन टेस्ट में 26 देशों के राष्ट्रीय ध्वज को कंठस्थ करने के लिए यशस्वी का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। इसके लिए लंदन की संस्था ने उन्हें एक सर्टिफिकेट भी जारी किया है। बताया जा रहा है कि बच्चे ने 6 से 8 माह की उम्र में ही अद्भुत प्रतिभा हासिल कर ली थी तथा 14 माह की उम्र में आते आते लंदन की वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड एजेंसी ने उसकी प्रतिभा को पहचानते हुए उसे खिताब से नवाजा है.

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अद्भुत स्मृति को देख वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स भी हैरान

यशस्वी के पिता संजय मिश्रा मूल रूप से रीवा जिले की गुड तहसील के अमिलिहा गांव तमरा के रहने वाले हैं. संजय मिश्रा के पिता अवनीश मिश्रा दुआरी हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल हैं, जो रीवा बस स्टैंड के पास पुश्तैनी मकान में रहते हैं. संजय लखनऊ स्थित एक विज्ञापन कंपनी के निदेशक हैं, जो लखनऊ के शालीमार कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहते हैं। उसके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा पांच साल का और छोटा बेटा 14 महीने का है। यशस्वी का जन्म 25 दिसंबर 2020 को हुआ था। ऑनलाइन वीडियो में अद्भुत स्मृति को देखकर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स भी हैरान हैं।

मां बेटे का पहचाना हुनर

यशस्वी की मां शिवानी मिश्रा ने कानपुर विश्वविद्यालय से ला की पढ़ाई की है। उन्होंने बताया कि 4 से 8 महीने के बीच यशस्वी ने फूलों और तस्वीरों को पहचानना शुरू कर दिया। फिर वह हर दिन विभिन्न प्रकार के फूलों की पहचान करने लगा। फ्लैश कार्ड के जरिए मां ने यशस्वी को अलग-अलग देशों के झंडों की पहचान करनी शुरू कर दी। सबसे छोटे बच्चे का सबसे बड़ा रिकॉर्ड संजय मिश्रा का कहना है कि वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन की टीम ने बताया कि यशस्वी मिश्रा सबसे छोटे बच्चे हैं, लेकिन उनका रिकॉर्ड सबसे बड़ा है. वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की टीम इन चीजों को देखकर हैरान है। उसके पास अभी तक 14 महीने के बच्चों का कोई रिकॉर्ड नहीं था। हमने टीम को 26 देशों के झंडों का वीडियो भेजा था।

पिता पेशे से है बिजनेस मैन

यशस्वी के दादा अवनीश मिश्रा पेशे से शिक्षक हैं और वर्तमान में वह रीवा के दुआरी हायर सेकेंडरी स्कूल में कार्यरत हैं। यशस्वी के पिता संजय मिश्रा बिजनेस मैन हैं। 14 महीने के यशस्वी की इस उपलब्धि को देखते हुए उसके दादा,माता और पिता आंगे और नाम रौशन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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