Singrauli: 110 करोड़ 86 लाख रूपये चढ़ा भ्रष्टाचार की भेट,कलेक्टर ने केके स्पन कंपनी का कांट्रैक्टर किया टर्मिनेट, कमिश्नर समेत निगम अमले पर कार्यवाही क्यों नहीं

नगर निगम अमले की लापरवाही के साथ-साथ ठेकेदार ने भी व्यापक पैमाने पर लापरवाही की गयी। जिसका परिणाम यह निकला की केके स्पन इंडिया कंपनी के संविदाकार ने महज 32.64 प्रतिशत ही कार्य कर पाया।

सिंगरौली 30 मार्च। नगरीय क्षेत्र के 45 वार्डों में वर्ष 2017 में सिवरेज पाईप लाईन कार्य के लिए 110 करोड़ 46 लाख रूपये की मंजूरी मिली थी। किन्तु नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही से पांच साल में केके स्पन इंडिया कंपनी लिमिटेड ने महज 32 प्रतिशत ही कार्य किया है। लिहाजा नगर निगम का जिम्मेदार अमला अपना गला बचाने के लिए केके स्पन इंडिया कंपनी को अंतत: टर्मिनेट कर दिया है।

गौरतलब हो कि वर्ष 10 मार्च 2017 में नगर पालिक निगम सिंगरौली में केके स्पन इंडिया के बीच सिवरेज कार्य के लिए एग्रीमेंट हुआ था और कार्य पूर्ण करने की अवधि 36 महीने की तय की गयी थी। इस बीच नगर निगम अमले की लापरवाही के साथ-साथ ठेकेदार ने भी व्यापक पैमाने पर लापरवाही की गयी। जिसका परिणाम यह निकला की केके स्पन इंडिया कंपनी के संविदाकार ने महज 32.64 प्रतिशत ही कार्य कर पाया। इस दौरान उक्त कंपनी के संविदाकार पर घोर लापरवाही व अनियमितता किये जाने के आरोप लगाये जा रहे थे। यहां तक की संविदाकार की लापरवाही से तीन श्रमिकों की कचनी में सिवरेज पाईप लाईन के दौरान दम घुटने से मौत हो गयी थी। इस घटना के बाद भाजपा के नेताओं ने भी कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और निर्धारित अवधि में 9 मार्च 2020 के अंदर कार्य पूर्ण न किये जाने पर संविदा कंपनी को टर्मिनेट करने की मांग पर अड़ गये थे।

कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने हादसे के दिन ही आस्वस्त किया था कि दोषी ठेकेदार को बक्सा नहीं जायेगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। अंतत: नगर पालिक निगम सिंगरौली ने उक्त कंपनी को टर्मिनेट करने का आदेश जारी कर दिया है। केके स्पन कंपनी के टर्मिनेट किये जाने के बाद अब सवाल उठने लगा है कि क्या अकेले केके स्पन इंडिया कंपनी ही दोषी है? 110 करोड़ से अधिक रकम लापरवाही की भेंट चढऩे में क्या ननि के अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं। इस बात को लेकर अब प्रबुद्ध नागरिकों में बहस छिड़ गयी है। कहा जा रहा है कि इसके लिए दोषी ननि के अधिकारियों पर जबावदेही तय होनी चाहिए। उस दौरान के कार्यपालन यंत्री व सहायक यंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। तभी आगामी दिनों में अन्य प्रोजेक्टों में इस तरह की लापरवाही नहीं होगी। फिलहाल नगर पालिक निगम सिंगरौली के सिवरेज प्रोजेक्ट के संविदाकार कंपनी केके स्पन इंडिया को टर्मिनेट किये जाने के बाद भले ही नगर निगम के अधिकारी अपनी स्वयं की पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई न करना कहीं न कहीं उनकी मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है।


ननि अधिकारियों पर ही तय हो जबावदेही
110 करोड़ से अधिक रकम की लागत से सिवरेज प्रोजेक्ट में पलीता लगाने वाले ननि के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। इस तरह की मांग जोर पकडऩे लगी है। कहा जा रहा है कि ननि के अधिकारी अपना गला बचाने के लिए केके स्पन इंडिया कंपनी पर सारा आरोप मढ़ दिये हैं। खुद की जबावदेही मानने से इंकार कर रहे हैं। केके स्पन कंपनी को टर्मिनेट का पत्र भेजकर कार्रवाई करते हुए अपनी पीठ भले ही थपथपा रहे हों, लेकि न अब यह मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता जा रहा है और इस बात की बहस शुरू है कि ननि के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री पर क्या कार्रवाई होगी? जिनके देख-रेख में इतना बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा था और 5 साल में करीब 32.65 प्रतिशत ही कार्य हुआ। जबकि 36 महीने में कार्य पूर्ण करने का टारगेट था।


नगर निगम में गुटबाजी चरम पर
नगर पालिक निगम सिंगरौली में गुटबाजी चरम पर पहुंच गयी है। आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि आपसी गुटबाजी के कारण ही सिवरेज पाईप लाईन का कार्य प्रभावित हुआ है। जिम्मेदार अधिकारी ध्यान भटकाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। ताकि कलेक्टर की नजर उस दौरान के कार्यपालन यंत्री पर न पड़ जाये। इधर नगर निगम में गुटबाजी इतनी तेज हो गयी है कि एक-दूसरे की कमियां तलाशने में लगे हुए हैं और कलेक्टर के समक्ष कुछेक कथित अधिकारी अपने आप को सबसे कर्मठ, लगनशील, कर्तव्यनिष्ठ साबित करने के लिए गुणा-भाग कर रहे हैं और अपने काली करतूतों पर पर्दा डालने के लिए दूसरे अधिकारी को बलि का बकरा बनाने के लिए हाथ पांव मारना शुरू कर दिये हैं। उनकी करतूतें भी अब धीरे-धीरे जगजाहीर होने लगी है।

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