वनरक्षक पर हमला, 100 डायल की मौजूदगी में थाना गेट तोड़कर फरार हुए आरोपी, शिकायत के 18 घंटे बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
सिंगरौली। जिले में अवैध रेत माफिया के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब थाना परिसर भी सुरक्षित नहीं रह गया है। चितरंगी थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात रिवॉल्वर के बल पर शासकीय अभिरक्षा में खड़े अवैध रेत से भरे टिपर को जबरन छुड़ा ले जाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। इस घटना ने पुलिस और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग सोनघड़ियाल अभयारण्य चितरंगी में पदस्थ वनरक्षक शुभम सिंह चौहान को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सोन नदी के पनवार घाट से अवैध रेत लोड कर एक टिपर वाहन कुसहनिया होते हुए सुदा की ओर जा रहा है। सूचना की पुष्टि करने के बाद वनरक्षक अपनी टीम के साथ ग्राम कुसहनिया पहुंचे, जहां नीले रंग का टिपर वाहन क्रमांक यूपी 64 टी 0381 अवैध रूप से रेत परिवहन करते हुए पकड़ा गया। वाहन चालक के पास रेत के कोई वैध दस्तावेज नहीं पाए गए, जिसके बाद नियमानुसार जप्ती की कार्रवाई की गई।सुरक्षा की दृष्टि से जप्त वाहन को पुलिस थाना चितरंगी लाया जा रहा था। थाना परिसर के गेट पर वाहन को भीतर प्रवेश कराया जा रहा था, तभी रात लगभग 12.30 बजे एक अन्य वाहन से सूर्याश सिंह अपने चार-पांच सहयोगियों के साथ वहां पहुंचा।
आरोप है कि उसने रिवॉल्वर निकालकर वनरक्षक और कर्मचारियों को धमकाया, गाली-गलौज की और शासकीय कार्य में खुला हस्तक्षेप किया।स्थिति उस समय और भयावह हो गई जब आरोपियों ने अपने चालक को आदेश दिया कि इन सब पर गाड़ी चढ़ा दो, जो सामने आए उसे कुचल दो। इसके बाद शासकीय अभिरक्षा में रखे गए टिपर वाहन को जबरन छुड़ाकर थाना परिसर का गेट तोड़ते हुए फरार हो गए। यह पूरी घटना कानून के राज को चुनौती देने जैसी है।
रिवाल्वर दिखाकर थाना से ले गए वाहन
जब रेत माफिया रेत से लोड टिपर वाहन को छुड़ाने आए तो उसे दौरान डायल 100 थाने के बाहर मौजूद थी। लेकिन माफियाओं के तेवर देख कोई भी पुलिसकर्मी उन्हें रोकने का साहस नहीं जुटा पाया। आधा दर्जन रेत माफिया बंदूक और हॉकी के दम पर वाहन लेकर चले गए। वनरक्षक द्वारा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें मारपीट, धमकी, शासकीय कार्य में बाधा और रिवाल्वर के बल पर वाहन छुड़ाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। हालांकि शिकायत के बाद भी अभी तक मामला दर्ज नहीं हुआ है। यदि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो पुलिस और रेत माफियाओं के गठबंधन की पोल खुल जाएंगी। हालांकि, इस बात पर लोग हैरान हैं कि जब अपराध थाना परिसर में हुआ तो आरोपी इतने आराम से कैसे फरार हो गए।
अवैध रेत माफियाओं को खुला संरक्षण
लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन और परिवहन का कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित रहती है। जब अपराधी थाने से ही वाहन छुड़ाकर ले जाने लगे तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या होगा, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से आरोपियों को गिरफ्तार कर टिपर वाहन बरामद करती है और क्या इस दुस्साहसिक कृत्य पर सख्त कार्रवाई हो पाएगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। जिले में कानून व्यवस्था की असली परीक्षा इसी कार्रवाई से तय होगी।
इनका कहना है
थाने के बाहर से रेत लोड वाहन को छुड़ाकर कुछ लोग लेकर भागे हैं।शिकायत के बाद घटना की तस्दीक की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्यवाही की जाएगी।
सुदेश तिवारी, थाना प्रभारी- चितरंगी