वन विभाग का आरोप, पुलिस सहयोग नहीं, माफिया रिवॉल्वर दिखाकर थाने से ले गए टिपर, 20 घंटे बाद मामला दर्ज

अपने ही जाल में उलझती जा रही है चितरंगी पुलिस, सोन घड़ियाल के प्रतिबंध क्षेत्र से अवैध रेत खनन और परिवहन से जुड़ा हैं मामला, हर महीने करोड़ों रुपए की रेत हो रही चोरी, चितरंगी पुलिस पर माफियाओं को संरक्षण देने के लगते रहे हैं आरोप

सिंगरौली : अवैध रेत खनन और परिवहन के लिए बदनाम चितरंगी थाना पुलिस एक बार फिर अपने कार्य प्रणाली के चलते सुर्खियों में है। अब चितरंगी थाना परिसर में शासकीय अभिरक्षा में खड़े अवैध रेत से भरे टिपर वाहन को कथित रूप से रिवॉल्वर के बल पर छुड़ाकर ले जाने की घटना ने पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वन विभाग के अधिकारियों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस का दावा घटना को लेकर अलग कहानी बयान कर रहा है। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। हालांकि 20 घंटे बाद चितरंगी पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

वन विभाग के अनुसार, संरक्षित क्षेत्र सोन घड़ियाल अभयारण्य के अंतर्गत सोन नदी से अवैध रेत परिवहन की सूचना मिलने पर कार्रवाई की गई थी। टीम ने अवैध रेत से भरे एक टिपर वाहन को पकड़ा और विधिवत जब्ती की प्रक्रिया शुरू की। आरोप है कि जब वाहन को सुरक्षा के लिए थाने लाया जा रहा था, तभी हथियारबंद लोग मौके पर पहुंचे और धमकी देते हुए वाहन को जबरन छुड़ाकर ले गए।

सोन घड़ियाल वन परिक्षेत्र अधिकारी चतुर सिंह का कहना है कि अवैध रेत लोड टिपर पकड़ने के साथ ही थाना प्रभारी को फोन पर सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिस की ओर से कोई प्रभावी सहयोग नहीं मिला। उनका दावा है कि आरोपी थाने के भीतर तक पहुंच गए, कर्मचारियों को रिवॉल्वर दिखाकर धमकाया और जब्त वाहन को लेकर फरार हो गए। इतना ही नहीं, वाहन को बाहर निकालते समय थाना परिसर का गेट भी क्षतिग्रस्त हुआ, जो घटना की गंभीरता को और स्पष्ट करता है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि वाहन को थाने के बाहर से ही छुड़ाकर ले जाया गया और घटना की जांच की जा रही है।

पुलिस और वन विभाग के बयानों में यह सीधा टकराव कई सवाल खड़े करता है। यदि घटना थाने के बाहर हुई तो गेट कैसे टूटा और यदि भीतर हुई, तो सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो हर महीने करोड़ों रुपए की रेत की चोरी कर रहा है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई अक्सर कागजों तक सीमित रहती है और माफिया बेखौफ होकर कानून को चुनौती देते रहते हैं। जब आरोपी हथियार लेकर थाना परिसर तक पहुंच जाएं और शासकीय जब्ती को ही पलट दें, तो आम नागरिक की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आरोपियों की गिरफ्तारी होगी, क्या जब्त वाहन बरामद होगा और क्या जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी या फिर यह मामला भी समय के साथ फाइलों में दबकर रह जाएगा। वनपरिक्षेत्र अधिकारी सोनघड़ियाल अभ्यारण चितरंगी चतुर सिंह के शिकायत पर टीपर क्रमांक यूपी 64 टी 0381 के वाहन स्वामी सूर्यांश सिंह पिता अरविंद सिंह निवासी ग्राम झरकटिया और चालक दीपक केवट पिता शिवचरण केवट उम्र 40 वर्ष, निवासी राजावर नौगई थाना गढ़वा के खिलाफ मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू की है।

वन विभाग की थाना प्रभारी ने नहीं किया सहयोग

चितरंगी थाना प्रभारी सुरेश तिवारी की भूमिका इस पूरे मामले में गंभीर सवालों के घेरे में है। वन विभाग का स्पष्ट आरोप है कि अवैध रेत से भरा टिपर पकड़ने के बाद सहायता मांगी गई, पर पुलिस का सहयोग नहीं मिला। इसके बाद हथियारबंद लोग थाने तक पहुंचे और शासकीय जब्ती को ही पलटकर वाहन छुड़ाकर ले गए। पुलिस का बयान वन विभाग से उलट है, जिससे संदेह और गहराता है। जब थाना परिसर की सुरक्षा ही भरोसेमंद नहीं दिखे, तो आम नागरिक क्या उम्मीद करे? क्षेत्र में प्रतिबंधित सोन नदी से रेत चोरी के आरोपों के बीच थाना प्रभारी की निष्क्रियता कानून व्यवस्था पर सीधा प्रहार प्रतीत होती है।

अपने जाल में उलझ गई पुलिस

अवैध रेत प्रकरण ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग और पुलिस के परस्पर विरोधी बयानों ने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बना दिया है, जिससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि व्यवस्था खुद अपने ही जाल में उलझ गई है। जब शासकीय अभिरक्षा में पकड़ा गया वाहन कथित तौर पर हथियारों के दम पर छुड़ा लिया जाए और घटना के मूल तथ्यों पर ही सहमति न बने, तो जवाबदेही से बचने की कोशिशें साफ नजर आती हैं। क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत खनन के आरोपों के बीच यह प्रकरण चितरंगी पुलिस की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है और पारदर्शी जांच की मांग तेज हो गई है।

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