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नगर निगम की नाक के नीचे रोज बर्बाद हों रहा लाखों लीटर पानी, पार्षद बोले- मुझे कभी दिखाई नहीं दिया!

प्रतिदिन वार्ड 29 में डिस्चार्ज पाइप से लाखों लीटर पानी हो रहा बर्बाद, जिम्मेदारों की चुप्पी सवालों के घेरे में

सिंगरौली। एक तरफ सरकार और जिला प्रशासन जल संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रहे हैं। बैठकों का दौर चल रहा है, योजनाएं बनाई जा रही हैं और आम जनता को हर बूंद बचाने का संदेश दिया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। नगर निगम की नाक के नीचे ही जल संरक्षण की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

नगर निगम कार्यालय से महज आधा किलोमीटर दूर वार्ड क्रमांक 29 के विजय बंधु पेट्रोल पंप के मुख्य मार्ग के किनारे बनी डिस्चार्ज पाइपलाइन से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी नाली पर बहकर बर्बाद हो रहा है। हालात यह है कि यह पानी सीधे बगल के खेतों में भर रहा है और नालों के जरिए लगातार बहता जा रहा है, जिससे साफ है कि पानी का कोई उपयोग नहीं हो रहा, सिर्फ बर्बादी हो रही है। सड़क के ठीक किनारे स्थित यह पूरा सिस्टम हर गुजरने वाले को साफ नजर आता है, लेकिन इसी रास्ते से रोज निकलने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को यह गंभीर समस्या दिखाई नहीं देती। हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि दिनभर आवागमन करते हैं, लेकिन इस गंभीर समस्या पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा। ऐसा प्रतीत होता है मानो यह खुली बर्बादी उनकी नजर में कोई मुद्दा ही नहीं है। सवाल यह उठता है कि जब जिम्मेदारों के दरवाजे के सामने ही पानी यूं बह रहा है, तो शहर के अन्य हिस्सों में हालात कितने बदतर होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।एक ओर जहां गर्मी के दिनों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह हजारों-लाखों लीटर पानी का यूं बह जाना नगर निगम की लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार हरकत में आते हैं या फिर यह बर्बादी यूं ही जारी रहती है।

लाखों लीटर पानी बर्बाद, जिम्मेदार फिर भी बेपरवाह

नगर निगम के वार्ड 29 में डिस्चार्ज पाइप से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी खुलेआम बहकर बर्बाद हो रहा है, लेकिन जिम्मेदारों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। सालों से हजारों लीटर पानी सड़क पर बहता रहा, लेकिन जिम्मेदारों की नजर इस बर्बादी पर नहीं पड़ी। जब पार्षद रामनरेश साह से इस मामले में सवाल किया गया तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि मुझे कभी गिरता हुआ पानी दिखाई ही नहीं दिया और ना ही किसी ने इसकी शिकायत की। अब सवाल उठ रहा है कि क्या जनता की समस्या जानने के लिए सिर्फ शिकायतों का इंतजार किया जाएगा? क्या जनप्रतिनिधि का काम सिर्फ शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करना है या फिर अपने क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखना भी उनकी जिम्मेदारी है? वर्षों से बहता पानी व्यवस्था की लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है और पार्षद का यह बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

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