जान जोखिम में डालकर ट्रेन से उतारते हैं कोयला, माफिया कनेक्शन से करोड़ों का रैक कोयला पहुंच रहा चिमनी भट्ठा
सिंगरौली। देश की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के गोरबी-बी ब्लॉक से कोयला रैक के साथ छेड़छाड़ और टनों माल गायब होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि योजनाबद्ध तरीके से रैक से कोयला उतारकर उसे स्थानीय डंपिंग पॉइंट पर जमा किया जाता है और फिर सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश व बहरी की ओर भेज दिया जाता है। पूरे नेटवर्क की निगरानी में नायडू नामक व्यक्ति की भूमिका को लेकर क्षेत्र में तीखी चर्चा है, जबकि खान और मिश्रा पर संचालन में सहयोग के आरोप लग रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि गोरबी-बी ब्लॉक से रैक रवाना होते समय मजदूरों की टीम पहले से तैनात रहती है। मौका मिलते ही कोयला उतारकर अस्थायी डंपिंग स्थल, बताया जा रहा है कि ग्राम पड़री पर जमा किया जाता है। देर रात ट्रकों में लोडिंग कर ‘बिना वैध चालान’ के परिवहन किया जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह सिलसिला महीनों से जारी है और इससे कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा तंत्र पर है। जिस मार्ग से रैक गुजरते हैं, वहां कड़ी निगरानी अपेक्षित है, लेकिन कथित तौर पर निगरानी ढीली रही। बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतनी बड़ी मात्रा में कोयला निकलना संभव नहीं है ऐसी चर्चा आम है। एनसीएल प्रबंधन की चुप्पी और विभागीय सक्रियता का अभाव संदेह को और गहरा रहा है। क्या यह केवल चोरी है, या संगठित सिंडिकेट? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को जानकारी नहीं, या वे आंखें मूंदे हुए हैं? क्षेत्रीय सामाजिक-राजनीतिक हलकों में भी मामला गरमा गया है। मांग उठ रही है कि उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, परिवहन श्रृंखला की डिजिटल ट्रैकिंग हो और दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी की साख पर गंभीर आंच आएगी।
पड़री में अस्थायी भंडारण, रात में ट्रक मूवमेंट
गोरबी-बी ब्लॉक से निकलने वाले कोयले के कथित अवैध खेल में अब डंपिंग से डिस्पैच का पैटर्न सामने आ रहा है। आरोप है कि रैक से उतारा गया कोयला पहले ग्राम पड़री में अस्थायी तौर पर इकट्ठा किया जाता है और फिर रात के अंधेरे में ट्रकों के जरिए बाहर भेज दिया जाता है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक दिन के समय कम गतिविधि दिखाकर निगरानी से बचने की कोशिश की जाती है, जबकि देर रात अचानक ट्रक मूवमेंट बढ़ जाता है। बताया जाता है कि अस्थायी डंपिंग स्थल पर बिना किसी वैध चालान या तौल पर्ची के कोयला रखा जाता है। इसके बाद चुनिंदा ट्रकों को लोड कर अलग-अलग रूट से डिस्पैच किया जाता है, ताकि ट्रैफिक और जांच बिंदुओं पर संदेह कम हो।
जान जोखिम में डालकर ट्रेन से उतारते हैं कोयला
सिंगरौली में कोयला रैक से जान जोखिम में डालकर कोयला उतारते हैं । आरोप है कि कोयला माफिया के आधा सैकड़ा तक लोग ट्रेन पर चढ़कर संगठित तरीके से कोयला नीचे गिराते हैं, जिससे हर पल हादसे का खतरा बना रहता है। आरोप है कि इस अवैध उताराई के पीछे रेलवे पुलिस और कंपनियों से जुड़े कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत काम कर रही है। यदि आरोप सही हैं, तो यह केवल चोरी नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाला संगठित जोखिम भरा खेल है। यदि निगरानी तंत्र सख्त है, तो ट्रेन से कोयला उतारने जैसी गतिविधि बिना अंदरूनी सहमति के कैसे संभव हो जाती है, यह बड़ा सवाल है।