CM Mohan Yadav ध्यान दें,पीड़ित की पहली शिकायत को नजरअंदाज कर पुलिस ने किसके दबाव में बदली कहानी?

चितरंगी पुलिस रात की शिकायत दबाई, दूसरी पर किया केस दर्ज, सच्चाई पर पर्दा क्यों डाल रही पुलिस, एसडीओपी में नहीं दिया कोई जवाब

सिंगरौली। सीएम मोहन यादव ध्यान दीजिए यहां जिले के चितरंगी थाना क्षेत्र में अवैध रेत प्रकरण में रिवाल्वर दिखाने के मामले में परत दर परत राज खुलने लगे हैं। आरोप है कि थाना परिसर के भीतर शासकीय अभिरक्षा में खड़े अवैध रेत से भरे टिपर को रिवाल्वर के दम पर छुड़ाकर ले जाया गया, लेकिन रात में की गई पहली शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके उलट, अगले दिन दर्ज मामले में घटना का स्वरूप ही बदल दिया गया। जिससे पूरे प्रकरण की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर संदेह खड़ा हो गया है।

वन विभाग के अनुसार, सोन नदी क्षेत्र से अवैध रेत लोड कर ले जा रहे टिपर को पकड़कर नियमानुसार जब्ती की कार्रवाई की गई और वाहन को सुरक्षा के लिए थाना परिसर लाया जा रहा था। आरोप है कि रात लगभग 12:30 बजे हथियारबंद लोग पहुंचे, रिवॉल्वर और हॉकी दिखाकर कर्मचारियों को धमकाया और जब्त वाहन को जबरन छुड़ाकर फरार हो गए। वनरक्षक ने अपनी लिखित शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया कि घटना थाना गेट के भीतर प्रवेश के दौरान हुई और आरोपियों ने शासकीय कार्य में खुला हस्तक्षेप किया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी गंभीर शिकायत‌ जिसमें हथियारों के प्रयोग, जान से मारने की धमकी और शासकीय जब्ती में बाधा जैसे आरोप शामिल थे पर तत्काल एफआईआर क्यों नहीं हुई ?

सूत्रों के मुताबिक, अगले दिन दर्ज मामले में घटना को थाना परिसर के बाहर की सामान्य वारदात बताकर केस दर्ज किया गया। यानी मूल शिकायत और दर्ज अपराध के स्वरूप में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। यह अंतर सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि कानूनी गंभीरता को प्रभावित करने वाला है। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिबंधित नदी क्षेत्र से हर महीने करोड़ों रुपये की रेत निकासी के बावजूद कार्रवाई कागजी सीमाओं में सिमटी रही। ऐसे में शासकीय अभिरक्षा में खड़े वाहन को कथित रूप से हथियारों के दम पर छुड़ाया जाना और प्रारंभिक शिकायत का दर्ज न होना, व्यवस्था की पारदर्शिता पर संदेह बढ़ाता है।

अब अपेक्षा है कि पुलिस तथ्यों की स्वतंत्र जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और जवाबदेही तय कर ठोस कार्रवाई की जाए। शुभम सिंह चौहान की शिकायत को लेकर चितरंगी एसडीओपी राहुल सैयाम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि जो भी शिकायत होगी उसकी जांच करके मामला दर्ज किया जाएगा। मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

पुलिस पर खड़े हो रहे कई सवाल

वन पर क्षेत्र अधिकारी चतुर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने सामान्य धारों पर मामला दर्ज किया है जबकि चतुर सिंह ने मीडिया को दिए बयान में स्पष्ट तौर पर कहा कि रेत से जुड़े लोग थाना परिसर में रिवाल्वर और हाकी दिखाते हुए टीपर वाहन छुड़ा कर ले गए, लेकिन पुलिस के एफआईआर में रिवाल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी और शासकीय कार्य में बाधा की धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि क्या गंभीर अपराध को साधारण बनाकर मामले की धार कम करने की कोशिश हुई? यदि घटना सचमुच थाना परिसर के भीतर हुई, तो सुरक्षा व्यवस्था की विफलता पर जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई? और यदि बाहर हुई, तो वन विभाग की विस्तृत शिकायत में दर्ज तथ्यों की जांच किस स्तर पर और किस समय-सीमा में होगी? विरोधाभासी बयानों ने पुलिस की निष्पक्षता पर अविश्वास को और गहरा किया है।

मूल शिकायत दबाई, माफिया के लिए केस किया हल्का

चितरंगी क्षेत्र की वारदात ने कानून व्यवस्था की नींव पर सीधा प्रहार किया है। वनरक्षक की मूल शिकायत में रिवॉल्वर दिखाकर जान से मारने की धमकी, शासकीय कार्य में बाधा और जब्त वाहन को जबरन छुड़ाने जैसे गंभीर तथ्य दर्ज थे, लेकिन उसी आधार पर मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके विपरीत, दूसरे दिन दर्ज केस में आरोपों का स्वरूप हल्का कर दिया गया, जिससे जांच की दिशा और मंशा दोनों पर संदेह गहरा गया है। पहले दिन वनरक्षक ने शिकायत की लेकिन दूसरे दिन शिकायतकर्ता बदल गया। अब सोन अभ्यारण वन परिक्षेत्र अधिकारी चतुर सिंह सामने आए। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यदि मूल शिकायत को नजरअंदाज कर नरम धाराओं में मामला बनाया गया, तो यह कानून के प्रभावी प्रवर्तन पर प्रश्नचिन्ह है और जवाबदेही तय करना अब अनिवार्य हो गया।

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