सिंगरौली: ऊर्जा उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाला सिंगरौली जिला अपने ही आदिवासी बहुल गांवों में बुनियादी बिजली सुविधा से वंचित है। विडंबना यह है कि जहां से देश को ऊर्जा मिलती है, वहीं कई बस्तियां आज भी अंधेरे में डूबी हुई हैं। रात होते ही इन गांवों में भय और असुरक्षा का माहौल बन जाता है, क्योंकि अंधेरे में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा लगातार बना रहता है।
चितरंगी जनपद पंचायत क्षेत्र के बैगा आदिवासी बहुल टोलों में बिजली नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बताया कि अंधेरे के कारण कई बार सांप काटने की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
इस गंभीर स्थिति को लेकर जनपद सदस्य ने कलेक्टर को पत्र सौंपकर तत्काल विद्युत लाइन और आवश्यक अधोसंरचना निर्माण कराने की मांग की है। पत्र में ग्राम पंचायत देवरा-1, गड़वानी, कुड़ैनिया प्रथम और मड़डोली सहित कई पंचायतों के आदिवासी टोलों में बिजली न होने का उल्लेख किया गया है।
ऊर्जाधानी कहलाने वाले जिले में ही गांवों का अंधेरे में रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें वर्षों से केवल आश्वासन ही मिल रहा है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि आदिवासी बस्तियों तक बिजली पहुंचाने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाते हैं, ताकि अंधेरे और भय के बीच जी रहे लोगों को राहत मिल सके।