मध्यप्रदेश सरकार ने वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए बगदरा अभयारण्य क्षेत्र के 64 गांवों के लिए विकास कार्यों का रास्ता खोल दिया है। यह अहम निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में लिया गया, जिससे वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
सिंगरौली जिले में स्थित बगदरा अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1977 में मुख्य रूप से काले हिरणों के संरक्षण के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ यहां वन्यजीव संरक्षण की स्थिति मजबूत हुई, लेकिन अभयारण्य क्षेत्र में बसे गांवों के विकास कार्य नियमों और स्वीकृति प्रक्रियाओं में अटके रहे। सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगातार बाधाएं आती रहीं, जिससे ग्रामीण जीवन प्रभावित होता रहा।

सरकार का मानना है कि यह निर्णय मानवीय दृष्टिकोण और पर्यावरणीय संतुलन- दोनों को ध्यान में रखकर लिया गया है। अब इन गांवों में आधारभूत ढांचा विकास, आवास योजनाएं, जल आपूर्ति, विद्यालय और स्वास्थ्य सेवाओं को गति मिल सकेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और पलायन में कमी आने की संभावना भी जताई जा रही है।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि वन्यजीव संरक्षण से कोई समझौता नहीं होगा। बगदरा क्षेत्र के बराबर वन क्षेत्र को अन्य प्रस्तावित अभयारण्यों में जोड़ा जाएगा, जिससे प्रदेश की जैव विविधता और संरक्षित वन क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे। इस पहल को संतुलित नीति का उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें संरक्षण और विकास दोनों को समान महत्व दिया गया है।
स्थानीय ग्रामीणों में फैसले को लेकर उत्साह का माहौल है और प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि विकास योजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारा जाए, ताकि दशकों से प्रतीक्षित बदलाव अब वास्तविक रूप ले सके।