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Mahavidhyalaya के करोड़ों की बिल्डिंग में पड़ी दरारें दीवाल के ज्वाइंट से टपकने लगा पानी, लीपापोती का शुरू हुआ खेल, पीआईयू के कार्यपालन यंत्री बने अंजान,

Mahavidhyalaya : सिंगरौली 30 अगस्त। देवसर मुख्यालय में तकरीबन 10 करोड़ रूपये की लागत से शासकीय महाविद्यालय भवन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। लेकिन हैण्डओवर होने के पूर्व ही निर्माणाधीन महाविद्यालय के भवन में दरारें पडऩे लगी हैं। वहीं दीवाल के ज्वाइंट से बारिश का पानी टपकने लगा है। भवन निर्माण कार्य को लेकर क्रियान्वयन एजेंसी के कार्यपालन यंत्री व ठेकेदार सवालों के घेरे में आ गये हैं.

Mahavidhyalaya : दरअसल जानकारी के मुताबिक डिस्ट्रिक्ट मिनरल फण्ड से देवसर में महाविद्यालय भवन एवं उत्कृष्ट विद्यालय के बाउण्ड्रीवाल के लिए करीब 9 करोड़ 91 लाख रूपये की मंजूरी मिली। जिसका भूमि पूजन 7 मार्च को तत्कालीन पंचायत मंत्री कमलेश्वर पटेल के मुख्य आतिथ्य, सांसद रीती पाठक व जिला पंचायत अध्यक्ष अजय पाठक के अध्यक्षता व विशेष आतिथ्य में भूमि पूजन किया गया था। महाविद्यालय भवन निर्माण पूर्ण करने के लिए 18 महीने की अवधि तय की गयी। यह कार्य एक संविदा कंपनी को सांैपा गया।

 आरोप है कि महाविद्यालय हैण्ड ओवर के पहले ही गुणवत्ता की पोल खोलने लगा है। महाविद्यालय भवन के अंदर कई जगह बीम व दीवाल में क्रेक दिखने लगा है। साथ ही दो मंजिला  महाविद्यालय भवन के दीवाल से पानी पसीज रहा है। ऐसे हालात में आरोप लगाये जा रहे हैं कि भवन के निर्माण कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी की गयी है। इसकी पूर्व में भी शिकायत पीआईयू के कार्यपालन यंत्री के यहां की गयी। लेकिन उन्होंने शिकायत को अनसुना कर दिया। फिलहाल भवन के निर्माण कार्य में निर्धारित मटेरियल सामग्री लगाने में की गयी कंजूसी को लेकर संविदाकार के साथ-साथ क्रियान्वयन एजेंसी की  कार्यप्रणाली पर तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं. Mahavidhyalaya
बिना सेफ्टी के कार्य में लगे श्रमिक,श्रम अमला बेसुध
निर्माणाधीन भवन में एक नहीं दर्जनों श्रमिक कार्य कर रहे हैं। आंचलिक मीडिया कर्मी जब कल रविवार को तहकिकात करने पहुंच तो किसी भी श्रमिक के पास सेफ्टी हेल्मेट व अन्य सामग्री नहीं था। सभी बिना सेफ्टी के ही कामकाज कर रहे थे। वहीं मीडिया कर्मियों के तहकिकात के समय वहां मौजूद संविदाकार के कर्मचारी ने कानूनी पाठ पढ़ाने लगा। मामला काफी गरमा गया। अंतत: मीडिया कर्मी संतोष कुशवाहा ने जियावन थाना में जाकर लिखित तहरीर दिया है. Mahavidhyalaya
 फिलहाल मीडिया कर्मी ने बताया कि भवन में कई जगह दरार है और एक साइड में दीवाल का कुछ हिस्सा टूट गया है उसे लीपापोती करने में संविदाकार के श्रमिक जुटे रहे। उन्होंने बताया कि बिना सेफ्टी के काम कर रहे श्रमिकों के बारे में पूछताछ की गयी तो सभी अंजान बन गये। साथ ही यह भी आरोप लग रहा है कि सिंगरौली का श्रम विभाग अमला इस मामले में बेसुध है. Mahavidhyalaya
कार्यपालन यंत्री का सिंगरौली के प्रति बढ़ा मोह
पीआईयू कार्यपालन यंत्री मो.कासिम का सिंगरौली से मोहभंग नहीं हो रहा है। दो साल पूर्व इनका यहीं से तबादला हुआ था। प्रदेश सरकार में जुगाड़ लगाकर फिर से सिंगरौली आ गये। बार-बार सिंगरौली आना कार्यपालन यंत्री के कार्यप्रणाली पर भी तरह-तरह के सवाल किये जाने लगे हैं। चर्चा है की चल रहे निर्माण कार्र्यों में व्यापक पैमाने पर कमीशनखोरी है। यह बात किसी से छुपी नहीं है। इस कमीशनखोरी में कार्यपालन यंत्री प्रभावित हैं की नहीं इस पर कुछ भी कह पाना मुश्किल है, लेकिन उन्होंने महाविद्यालय भवन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता के संबंध में चुप्पी साध लेना और जानकारी न देना उल्टा सवाल करना समझ से परे लग रहा है. Mahavidhyalaya
करायी जायेगी जांच
इस संबंध में कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने नवभारत के संवाददाता ने जानकारी साझा करते हुए अवगत कराया। इस पर कलेक्टर ने कहा कि निर्माणाधीन महाविद्यालय भवन की जांच अलग सिविल टीम से करायी जायेगी। यदि मापदण्ड के अनुसार कार्य नहीं मिला तो संबंधित के विरूद्ध कार्रवाई होगी. Mahavidhyalaya

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