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रिश्वत के दम पर कोविड के कर्मचारियों की सेवा बरकरार का आरोप कलेक्टर को कर्मचारी किए गुमराह

  • सीएमएचओ ने कहा हमारी सुनी ही नहीं गई
  • ईमानदारी से काम करने वालों को दिखाया गया बाहर का रास्ता

सीधी।।  प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए लाखों जतन कर लें लेकिन जिले में बैठे अधिकारी ये सोच कर बैठे हैं कि जब तक जेब नहीं भरेगी तब तक ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारी नहीं रखे जाएंगे। कौन काम अच्छा कर रहा है, कौन नहीं, इससे अधिकारियों को मतलब नहीं रहता है, उनको तो सिर्फ अपनी जेब भरने से मतलब रहता है।

कोरोना कॉल में कुछ कोविड-19 के कर्मचारियों की तानाशाही सामने आई थी जहां सिर्फ रजिस्टर में हाजिरी लगाने आया करते थे और अगर गलती से कोई कुछ बोल दिया तब उसके खिलाफ फर्जी शिकायतों का अंबार लग जाया करता था। वहीं इन कर्मचारियों को सीएमएचओ का संरक्षण प्राप्त था जिसकी वजह से लापरवाही तथा रिश्वतखोरी पर कोई भी कार्रवाई आज तक नहीं की गई है। इसके पूर्व में भी कोविड-19 के कर्मचारियों को रिनुअल करने की एवज में 10 से 25 हज़ार की रिश्वत लेने की खबरें आई थीं। ताजा मामला स्वास्थ्य व्यवस्था के फीवर क्लीनिक से सामने आया है। जहां कोरोना काल में ईमानदारी से काम करने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है तो वहीं नेतागिरी और काम नहीं करने वालों को आगे के लिए नियुक्ति की गई है। आरोप यह भी है की सीएमएचओ के नाम से कोविड-19 में पदस्थ एक डॉक्टर ने 10 से 15 हज़ार रुपये की वसूली की है।

ये है पूरा मामला
कोरोना कॉल में जब देश संकट से गुजर रहा था तब सीधी के स्वास्थ्य विभाग में कोविड-19 के कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। भर्ती कर्मचारियों में से कुछ महिला कर्मचारियों ने ईमानदारी के साथ देश सेवा की भावना से काम किया था। तो वहीं दूसरी तरफ कुछ कर्मचारी तानाशाही रवैया अपनाए हुए थे जहां रजिस्टर में हाजिरी लगाने बस आया करते थे। बीते सोमवार को कलेक्टर को फीवर क्लीनिक में पदस्थ स्टाफ नर्सों ने शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।

स्टाफ नर्सों द्वारा बताया गया कि फीवर क्लीनिक तथा डीसीएससी में कोरोना काल से लेकर अब तक बिना गैर हाजिर हुए इमानदारी से सेवा दी हैं लेकिन जनवरी से रिनुअल होना था लेकिन फीवर क्लीनिक में तैनात एक डॉक्टर ने फोन करके कहा कि 10 हज़ार प्रति व्यक्ति सीएमएचओ साहब मांग रहे हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर  उक्त स्टाफ नर्स ने बताया कि नौकरी बचाने के बकायदा उक्त डॉक्टर को पैसे दिए हैं तथा जिन्होंने पैसा नहीं दिया उनका लिस्ट से नाम गायब कर दिया गया। जहां पीड़ित नर्सों ने कलेक्टर को शिकायती आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।

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क्राइटेरिया का हुई अनदेखी
कोरोना कर्मचारियों को भर्ती करने हेतु कलेक्टर ने क्राइटेरिया निर्धारित की थी, बताया गया कि कलेक्टर के द्वारा फीवर क्लीनिक डीसीएससी तथा आइसोलेशन वार्ड में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों को रखने की बात कही गई थी। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने रिश्वत के दम पर उन कर्मचारियों को रखा है जो फीवर क्लीनिक डीसीएसी तथा आइसोलेशन वार्ड में कभी सेवा दिये ही नहीं हैं। उक्त कर्मचारियों को रिश्वत के दम पर फीवर क्लीनिक आइसोलेशन वार्ड तथा डीसीएससी दिखाकर उनकी रिनुअल की डेट आगे बढ़ा दी गई है। जहां रिश्वतखोरी का विरोध करते हुए स्टाफ नर्स रीना पटेल समेत आधा दर्जन नर्सों ने कलेक्टर को शिकायती आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।


सीएमएचओ ने कहा मेरी चली ही नहीं
कोरोना कॉल से ही दो सीएमएचओ की लड़ाई जारी है जहां डॉक्टर आर.यल. वर्मा हाई कोर्ट से स्टे लाकर सीएमएचओ की कुर्सी तो संभाले हैं लेकिन आज तक लापरवाही कहें या राजनीतिक संरक्षण के चलते डीडीओ प्रभार नहीं दिया गया है। जिसका नतीजा यह है कि स्वास्थ्य विभाग में दो दल बट गया है। सीएमएचओ डॉ. आर.एल. वर्मा ने कहा कि हमारे द्वारा सिर्फ इमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों की लिस्ट रिनुअल हेतु दी गई थी लेकिन हमारी लिस्ट से कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि डॉ. बीएल मिश्रा की लिस्ट से उन्ही कर्मचारियों को रखा गया है जो पूर्व से ही काम नहीं करते थे तथा विवादित रहे हैं। वहीं अगर कोई भी लापरवाही होती है तो इसका खामियाजा जिला प्रशासन समेत स्वास्थ्य विभाग को भुगतना पड़ सकता है।

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