गांव का भूल भुलैया रास्ता,आज भी गांव वाले भटक जाते हैं रास्ता,15 Km में 18 चौराहा,45 तिराहा,41 दो रास्तो को क्रास कर पहुंचते हैं घर!

गांव का रास्ता भूल भुलैया है गांव का हर आदमी कई बार गांव का रास्ता भटक कर खदान क्षेत्र पर चले जाते हैं ग्रामीण कहते हैं कि सुबह जिस रास्ते से गुजर कर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं लेकिन शाम होते-होते जब वह वापस आते हैं तो उस रास्ते को एनसीएल उजाड़ देता है और नई जगह एक नया रास्ता बना देता है। जिसके चलते ग्रामीण आए दिन अपने घर जाते समय रास्ता भटक जाते हैं। 

सिंगरौली- मध्य प्रदेश के ऊर्जा धानी के नाम से विख्यात सिंगरौली जिले के नगर निगम क्षेत्र में 1 गांव ऐसा है जहां पहुंचने के लिए रोज रास्ते बदल जाते हैं ग्रामीण घर से मुख्यालय बैढ़न या फिर मुख्यालय से घर जाते समय अक्सर रास्ता भूल जाते हैं उन्हें रास्ता याद दिलाने के लिए एनसीएल ना CISF फोर्स लगाकर न केवल खदान की रखवाली करता बल्कि हर आने-जाने वालों पर भी कड़ी नजर रखता है गांव में जाने के लिए एक निश्चित समय भी निर्धारित की गई है यदि समय खत्म हुआ तो आप इस गांव में इस रास्ते से नहीं जा सकते। इसके पीछे की बजह जानने के लिए पढ़िए यह पूरा लेख।

बता दें कि देश में बिजली उत्पादन के लिए विभाग सिंगरौली जिला राजस्व के मामले में मध्यप्रदेश में सबसे अधिक कमाउ वाला जिला बन चुका है। एनसीएल की कई परियोजनाएं कोयले के उत्खनन में लगी हुई है। जिले के नगर निगम क्षेत्र में भी कोयले का उत्खनन किया जाता है। जिला मुख्यालय से सटे मुहेर गांव में कोयले का प्रचुर भंडार है जिसके चलते गांव के चारों तरफ खुली खदान संचालित हो गई है इन परिस्थितियों में गांव वालों को इन खदानों के बीच से होकर ही मुख्यालय आना जाना होता है। ग्रामीण कहते हैं कि खदान क्षेत्र में कई दशक से हर रोज रास्ते बदल जाते हैं जिसके चलते हुए अपने घर पहुंचने का रास्ता भी भूल जाते हैं। खदान क्षेत्र में इस रास्ते की दूरी करीब 15 किलोमीटर है जिसमें 18 चौराहा,45 तिराहा,41 दो रास्तो को क्रास कर ग्रामीण घर पहुंचते हैं।

गांव वाले झंडा देखकर पहुंचते हैं घर

मुहेर गांव पहुंचने के लिए खदान क्षेत्र से ही होकर गुजरना पड़ता है इस बीच ग्रामीण गांव का रास्ता ना भूले इसके लिए बकायदा रास्ते में लाल झंडे लगाए जाते हैं साथ ही चौराहों पर चौकीदारों की भी तैनाती रहती है जिससे हर आने जाने वालों को सही रास्ते की जानकारी मिल सके। लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता कि हर चौराहों पर एनसीआर के चौकीदार मौजूद हैं ऐसे में अमूमन अक्सर लोग रास्ता भटक का खदान क्षेत्र में या फिर ओवरबर्डन डम्प एरिया ग्रामीण सहित राहगीर पहुंच जाते हैं।

शाम 7 बजे से सुबह 5 बजे तक बंद रहता है रास्ता

दरअसल मुहेर गांव जाने के लिए एनसीएल के अमलोरी परियोजना खदान क्षेत्र से होकर निकलता है यह रास्ता डेंजर जोन में होने के चलते NCL एहतियात के तौर पर ग्रामीणों के आने जाने पर समय निर्धारित कर के रखा है गांव जाने के लिए शाम 7:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक इस रास्ते को बंद करके रखा जाता है इस रास्ते को आम नागरिकों के लिए सुबह 6:00 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे तक खुला रहता है।

खदानों में रोज बदल जाते हैं रास्ते

इस गांव के लोगों का कहना है कि गांव का रास्ता भूल भुलैया है गांव का हर आदमी कई बार गांव का रास्ता भटक कर खदान क्षेत्र पर चले जाते हैं ग्रामीण कहते हैं कि सुबह जिस रास्ते से गुजर कर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं लेकिन शाम होते-होते जब वह वापस आते हैं तो उस रास्ते को एनसीएल उजाड़ देता है और नई जगह एक नया रास्ता बना देता है। जिसके चलते ग्रामीण आए दिन अपने घर जाते समय रास्ता भटक जाते हैं। ग्रामीण कभी एनसीएल के पहाड़ में तो कभी खदान की नीचे वाले रास्ते पर चले जाते हैं।

ब्लास्टिंग से ग्रामीण परेशान

मुहेर गांव के लोग एमसीएल के अम्लोरी खदान से होते हुए अपने गांव पहुंचते हैं लेकिन एनसीएल में ओवी हटाने का काम कर रहे संविदा कर ज्यादा प्रोडक्शन के लिए मानक से ज्यादा बारूद इस्तेमाल कर ब्लास्टिंग करते हैं जिसके चलते ब्लास्टिंग से बड़े-बड़े पत्थर बोल्डर मुहेत और अमलोरी मार्ग पर फैल जाता है कई बार तो बड़ा हादसा सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मियों की समझदारी ने बड़ी घटना को रोक दिया। ब्लास्टिंग के समय सीआईएसफ राहगीरों को खदान क्षेत्र के पहले रोक दिया जाता है और ब्लास्टिंग होते ही रास्ते को चालू कर दिया जाता है।

गांव के लोग प्रदूषित हवा लेने को मजबूर

विस्फोटक का हर दिन उपयोग करने के चलते पूरा पर्यावरण प्रदूषित हो चुका है पर्यावरण प्रदूषण के बाद भी ग्रामीण मजबूर खदानों के बीच रह रहे हैं ग्रामीणों के हालातों की जानकारी लेने का समय ना तो सरकार में बैठे नुमाइंदों को है और ना ही जिला प्रशासन को अगर है तो सिर्फ कोयले की कि ज्यादा से ज्यादा कोयला का उत्पादन कैसे किया जाए। ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधा सड़क पानी बिजली स्वास्थ्य शिक्षा के लिए मरहूम है।

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