भाजपा में घमासान, कांग्रेस में फूट,परिषद बैठक में महापौर का सियासी खुलासा!

परिषद बैठक में नहीं पहुंचे एमआईसी सदस्य, दोपहर के बाद कल तक के लिए बैठक स्थगित

सिंगरौली : नगर निगम की परिषद बैठक गुरुवार को सियासी टकराव का अखाड़ा बन गई, जहां भाजपा में घमासान, कांग्रेस में फूट और आम आदमी पार्टी की कार्यशैली पर तीखे सवाल एक साथ सामने आए। बैठक की शुरुआत होते ही माहौल गरमा गया और आरोप-प्रत्यारोप के बीच निगम की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़ी दिखाई दी। जिसके बाद परिषद की बैठक शुरू हुई और आधे घंटे के लिए स्थगित हो गई। दोबारा जब बैठक शुरू हुई तो पार्षदों के आरोप के बाद शुक्रवार तक के लिए परिषद बैठक स्थगित कर दी गई।

बता दें परिषद बैठक में सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम तब सामने आया जब भाजपा के पार्षदों ने ही अपने दल से जुड़े नगर निगम अध्यक्ष को घेरते हुए भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लगाए और बैठक से वॉकआउट कर दिया। वार्ड क्रमांक 42 के पार्षद संतोष शाह ने नाली निर्माण समेत कई कार्यों में राशि आहरित होने के बावजूद काम न होने का मुद्दा उठाया और जांच की मांग की।

भाजपा पार्षदों के इस कदम ने साफ संकेत दिया कि पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी परिषद बैठक का बहिष्कार कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस पार्षद शेखर सिंह, अखिलेश सिंह और प्रेम सागर मिश्रा की बैठक में मौजूदगी ने पार्टी के भीतर मतभेद को सार्वजनिक कर दिया। इन पार्षदों के रुख से यह संकेत मिला कि वे संगठनात्मक लाइन से अलग खड़े नजर आए, जिससे कांग्रेस खेमे में असहजता और बढ़ गई।

बैठक में महापौर की मौजूदगी के बावजूद एमआईसी के एक भी सदस्य का परिषद में नहीं पहुंचना चर्चा का प्रमुख विषय बना रहा। विपक्षी पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब नगर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी, तब एमआईसी सदस्यों की अनुपस्थिति क्या दर्शाती है।
आरोप लगाए गए कि नगर के विकास से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता का अभाव है और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है। एजेंडा और प्रक्रियाओं को लेकर भी परिषद में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। पार्षदों ने नगर के अधूरे कार्यों, सिविक सेंटर और सड़कों की खराब स्थिति को लेकर जवाब मांगे।

कई पार्षदों ने यह तक कहा कि लंबे समय से बैठक न होना और बार-बार न्यायालयी प्रक्रियाओं का हवाला दिया जाना विकास कार्यों में बाधा बन रहा है।हंगामे और विरोध के बीच बैठक का माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि अंततः कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा तेज है कि नगर निगम में दलगत सीमाएं धुंधली हो रही हैं और अंदरूनी खींचतान का असर सीधे प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। बैठक में कार्यपालन यंत्री संतोष पाण्डेय समेत भाजपा व कांग्रेस के पार्षद मौजूद थे।

एमआईसी गायब, मेयर घिरीं, अध्यक्ष के जवाब गोलमोल

परिषद की बैठक में उस समय तीखा टकराव देखने को मिला जब एमआईसी सदस्यों की गैरमौजूदगी पर महापौर सीधे निशाने पर आ गईं। पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब नगर के अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी, तब एमआईसी सदस्य सदन से दूर क्यों रहे। महापौर से बैठक की वैधता, विकास कार्यों में देरी और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर जवाब मांगा गया, लेकिन स्पष्टता के बजाय जिम्मेदारी टालने के आरोप लगे। स्थिति तब और गरमा गई जब नगर निगम अध्यक्ष के जवाब को पार्षदों ने गोलमोल बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। पार्षदों के साथ नेता प्रतिपक्ष सीमा जायसवाल, पार्षद भारतेन्दू पाण्डेय समेत अन्य कई पार्षदों ने बैठक छोड़कर चले गए। ननि अध्यक्ष देवेश पाण्डेय ने एजेण्डे पर फिर से चर्चा करने के लिए कहा जहां कांग्रेस पार्षद अखिलेश सिंह ने सीधे महापौर रानी अग्रवाल पर विफर गए।

पार्षदों ने कहा आखिर चर्चा से क्यों भाग रही महापौर

मेयर रानी अग्रवाल ने उच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए बताया कि एजेण्डे में अन्य बिन्दु जोड़ने का अधिकार परिषद को नही है। उन्होंने नपानि अधिनियम का हवाला भी दिया। वहीं अध्यक्ष ने आयुक्त को इसका जवाब देने के लिए कहा। जहां आयुक्त सविता प्रधान के निर्देश पर उपायुक्त आरपी वैश्य ने सदन को बताया कि परिषद की बैठक में यदि एक तिहाई पार्षद किसी बिंदु पर सहमत हैं तो उस बिंदु को एजेंडे में शामिल किया जा सकता है। उपायुक्त के जवाब से मेयर नाखुश दिखी। जहां फिर से पार्षद अखिलेश सिंह ने मेयर को कहा कि आप नगर का विकास नही करता चाहती हैं। हम सब एक साल बाद फिर से जनता के बीच जाएंगे तो क्या जवाब देंगे। आप ने चुनाव के वक्त क्या-क्या वायदे किए थे,एक भी वायदे क्यों नही पूरा किए।उन्होने यह भी कहा कि महापौर आप कार्यवाही बाधित न करें। करीब दस महीने से नगर परिषद की बैठक नही बुलाई गई। आप चर्चा से भाग रही हैं। बात-बात में न्यायालय जाने की क्या जरुरत है। आप के बदौलत सिविक सेंटर का मामला न्यायालय पहुंचा है। यह काम कब होगा,साथ ही नगर निगम के निर्माणाधीन कार्य कब पूर्ण किए जाएंगे। उन्होने यहां तक कहा कि मेयर के कामकाज एवं नपानि के सिस्टम का घोर विरोध करता हूं।

About The Author