February 11, 2026

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सिंगरौली के स्कूल में बच्चों का झाडू लगाते वीडियो वायरल, डीईओ आगामी चुनाव की तैयारी में जुटे?

सिंगरौली : ज़िले के लंघाडोल इलाके के एक हाई स्कूल से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर करने वाली एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां बच्चों के हाथों में किताबों और कलम की जगह झाडू थमा दी गई है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की हकीकत सामने आ गई है। चर्चा है कि शिक्षा विभाग की जिम्मेदार डीईओ स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की वजाय अपनी राजनीतिक विसात बिछाने में लगे हैं। यही वजह है कि स्कूलों की आये दिन दुर्गति का वीडियो वायरल होता है।

जिन हाथों में किताबे और कलम होनी चाहिए उन हाथों में झाड़ू थमा दी जाती है। बच्चों से झाड़ू लगवाने से लेकर साफ सफाई का जिम्मा बच्चों पर ही रहता है। वायरल वीडियो में बच्चे स्कूल परिसर में झाड़ू लगाते हुए दिख रहे हैं। जब बच्चों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अक्सर शिक्षक स्कूल से गायब रहते हैं। छात्रा रंजना ने कहा, “शिक्षक कहते हैं कि पहले झाडू लगाओ, फिर पढ़ाई होगी, लेकिन पढ़ाई तो कभी होती ही नहीं। वही बच्चों ने कहा कि स्कूल में सभी विषयों का पीरियड किसी दिन नहीं लगता। शिक्षक लेट क्लास में आते हैं और समय से पहले चले जाते हैं।

https://youtu.be/t97TJQSTkp4?si=zatDrwrDPeF2UL_g

“ग्रामीणों ने भी शिक्षकों की लापरवाही पर गुस्सा ज़ाहिर किया है। अभिभावक सुंदर शाह ने कहा, “हम बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन यहां उनसे साफ़-सफ़ाई कराई जा रही है। एक अन्य ग्रामीण बद्रीनाथ वैश्य ने बताया कि इस स्थिति की शिकायत कई बार अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा है कि जिला शिक्षा अधिकारी आगामी विधानसभा चुनाव में चितरंगी विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। संभवत हुआ राजनीतिक विसात अभी से बिछाने लगे हैं‌। संभवत इसीलिए वह शिक्षकों में जो कसाबट करनी चाहिए वह करने में असफल रहे हैं। 

हाई स्कूल में स्कूली बच्चों का झाड़ू लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। हालांकि मामला सामने आने के बाद, ज़िला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल का निरीक्षण कर कार्रवाई करने की बात कही है। यह मामला न सिर्फ़ शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है, जिस पर प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।

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