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चितरंगी में कोरेक्स पर पुलिस की कैश कार्रवाई, तीन को छोड़ दो पर केस की चर्चा

छ: पकड़े गए, पर एफआईआर में नाम सिर्फ  दो की चर्चा, बाकी तीन का गायब होना बना पहेली

सिंगरौली।  चितरंगी थाना क्षेत्र में कोरेक्स कारोबार पर रोक लगाने के दावों के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के कटघर्रे में खड़ी है। यूपी के घोरावल क्षेत्र से लगातार चितरंगी में कोरेक्स सिरप पहुंचने का सिलसिला जारी है और आश्चर्यजनक रूप से हर खेप के साथ पुलिस की सक्रियता से ज्यादा उसकी संदिग्ध चुप्पी चर्चा में आ रही है। ताजा मामले में चितरंगी थाना पुलिस ने सुबह करीब पांच से छ: लोगों को अवैध कोरेक्स सिरप के साथ पकड़ा था, लेकिन शाम होते-होते एफआईआर में सिर्फ  दो नाम दर्ज होने की चर्चा है। बाकी तीन-चार लोग कैसे गायब हो गए, यह रहस्य थाना परिसर से लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कोरेक्स के साथ पकड़े गए तीन-चार लोगों को छोड़ने के लिए कथित रूप से 2-2 लाख रुपये की वसूली की बात सामने आ रही है। हालांकि पुलिस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। मामले की पुष्टि के लिए थाना प्रभारी से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव करना भी उचित नहीं समझा। इससे अंदेशा और गहरा गया कि क्या वाकई मामला वही है,  जिसके चर्चे सड़क से लेकर चौराहे तक हो रहे हैं। चर्चा यह भी है कि थाना प्रभारी ने दो तीन लोगों पर मामला दर्ज कर अपनी औपचारिकता पूरी करने की ड्यूटी निभाएंगे जबकि बाकी तीन-चार को रातों-रात निर्दोष घोषित कर दिया गया। सवाल यह है कि अगर पांच-छ: लोग पकड़े गए थे, तो कार्रवाई सिर्फ  दो पर ही क्यों होने की बात सामने आ रही है। क्या शेष तीन-चार लोगों की गलती अचानक खत्म हो गई या फिर गलती का राशि-निर्धारण कर लिया गया। चर्चा यह भी जाता है कि चितरंगी में अब कार्रवाई सिरप की बोतलों पर नहीं, बल्कि नोटों के बंडलों पर निर्भर करती है।

कैश कार्रवाई के लगते रहे हैं आरोप

पिछले कई महीनों से चितरंगी में कोरेक्स और अन्य नशे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई होती रहती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर बार कुछ लोग पकड़ में आते हैं, कुछ पर केस दर्ज होता है और बाकी का मामला मैनेज हो जाता है। यह पैटर्न अब इतना साफ  दिखने लगा है कि लोग इसे कैश कार्रवाई का नाम दे रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पुलिस नशे के खिलाफ  लड़ रही है या नशे के कारोबारियों की बोतलें पकड़कर कैश कलेक्शन के इंतजाम में हैं। थाना प्रभारी सुदेश तिवारी की चुप्पी और संदिग्ध कार्रवाई को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि चितरंगी में कोरेक्स का कारोबार सिर्फ  तस्करों नहीं, बल्कि तंत्र के सहारे फल-फूल रहा है।

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