छतरपुर, मध्य प्रदेश: मुंबई के भिवंडी में आयोजित एक कार्यक्रम में कथावाचक और पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने यूजीसी कानून को लेकर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर उन्होंने देश में समानता और एकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत में किसी भी तरह की असमानता या भेदभाव नहीं होना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट रूप से कहा,भारत में न कोई अगड़ा हो और न कोई पिछड़ा। यहां केवल भारतीय होने की भावना ही सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि कानूनों और नीतियों के माध्यम से जनता को बांटने की बजाय जोड़ने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि यूजीसी कानून को इस दृष्टि से लागू किया जाए कि सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़े और कोई भी वर्ग या समुदाय हाशिए पर न रहे।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना ही सच्चा राष्ट्रधर्म है। उन्होंने उपस्थित छात्रों और नागरिकों से अपील की कि वे हमेशा अपने देश को पहले स्थान पर रखें और किसी भी प्रकार की सामाजिक या शैक्षणिक असमानता को बढ़ावा न दें।
कवि कुमार विश्वास के बाद अब धीरेंद्र शास्त्री का यूजीसी पर यह बयान सुर्खियों में है। उनका यह संदेश समाज और सरकार दोनों के लिए स्पष्ट संकेत है कि शिक्षा और नीतियों का उद्देश्य केवल लोगों को जोड़ना और समान अवसर देना होना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने धीरेंद्र शास्त्री की बातों का स्वागत किया और इसे शिक्षा क्षेत्र में समानता को बढ़ावा देने वाली दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
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