Transfer Controversy : CM डॉ. मोहन यादव जी सिंगरौली में जियावन और यातायात थाना दो महीने से निरीक्षक विहीन है, कई चौकियां बिना प्रभारी के चल रही हैं, और जब इन गंभीर सवालों पर जवाब मांगा जाता है तो जिम्मेदारों की ओर से ‘फ़ालतू बात मत करो’ जैसा बयान सामने आता है। यह केवल एक विवादित टिप्पणी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला संकेत है। अब यह मामला महज लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पोस्टिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता और नीयत दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लाइन में निरीक्षक मौजूद हैं तो तैनाती क्यों नहीं हो रही। क्या किसी खास दबाव, सिफारिश या सेटिंग के चलते पोस्टिंग रोकी जा रही है? यदि नहीं, तो फिर आखिर किसके आदेश पर महत्वपूर्ण थाने और चौकियां खाली छोड़ी जा रही हैं? यह स्थिति सीधे-सीधे कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ मानी जा रही है।
सूत्रों की मानें तो जिले में स्टाफ की उपलब्धता के बावजूद जिम्मेदार पदों पर नियुक्ति न होना अंदरूनी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। एक ओर अपराध नियंत्रण, गश्त और वारंट तामील जैसी जिम्मेदारियां हैं, वहीं दूसरी ओर नेतृत्व विहीन थाने व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। ऐसे में अगर कोई बड़ी आपराधिक घटना होती है तो उसकी जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाएगा।
स्थानीय लोगों में इस मुद्दे को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है। अब मांग उठने लगी है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह साफ किया जाए कि आखिर तैनाती क्यों नहीं हो रही।
सबसे बड़ा सवाल
क्या जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर स्थिति पर जवाब देंगे या फिर हर सवाल को ‘फ़ालतू’ बताकर टालते रहेंगे ? और अगर सिस्टम ऐसे ही चलता रहा, तो सिंगरौली की कानून व्यवस्था कब तक सुरक्षित रह पाएगी?