थोड़ा नर्म आँखों से इस स्मारक को निहारना ये स्मारक कोई ऐसा वैसा नहीं ये पूरा एक करोड़ 20 लाख का है, अगर देखना है तो ट्रामा के सामने बन रहे सीविक सेंटर को देख लीजिए क्यूँकि यहीं स्मारक है जो MIC परिषद के बिच दूरिया ला दिया इसी प्रस्ताव के वजह से MIC माननीय न्यालय का दरवाजा खटखटाया था। वहीं इस परिषद में पार्षदों के मांग पर पीठासीन अधिकारी ने 1 करोड़ 20 लाख के भुगतान की स्वीकृति दे दी। हालाकी हमने परिषद का मिनिट्स पढ़ा नहीं है, भुगतान के पहले पुनः मूल्यांकन होगा या नहीं, गुणवक्ता की जाँच होगा या नहीं या सीधे एक करोड़ 20 लाख का भुगतान Thursday, हला की निगम के आयुक्त भी भुगतान के पक्ष में है।
वर मरे चाहे कन्या,पंडित को दान से मतलब
यह कहावत कभी-कभी बुजुर्ग लोग कहा करते थे, लेकिन मेरी समझ में कभी नहीं आई थी जो अब आई है, खैर आ ही गयी यही क्या कम है ? शायद आप लोगों की भी समझ में आई हो लेकिन कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहें हो, चाहे वो आयुक्त, महापौर, अध्यक्ष मंत्री, दादा, सरकार, व्यापारी, या किसी डर के मारे या फिर जुल्म सहने की आदत पड़ गयी हो, या फिर एक सुन्दर समाज, परिवार की कल्पना ही मर गयी हो, या फिर सोंचते होंगे कि चलो जो हो रहा है वो होने दो, मेरे से क्या मतलब, यानी कुल मिलाकर हराम की खाने की आदत हो गयी हो । आप सोंच रहे होंगे कि अगर मैं ही यह सब करने लगूंगा तो शायद मेरा धंधा बंद हो जायेगा |
चलों मैं ही बता देता हूँ और सवाल भी उठा रहा हूँ – अरे भाई-बहनों!आप लोग जानते हुए भी इस मुशीबत का सामना नहीं कर रहे हैं जो आज दूसरे पर पड़ी समझ के छोड़ दे रहे हैं। कल यह मुशीबत ऐसी हो जायेगी कि आप इससे बचने की लाख कोशिश करेंगे तो भी नहीं बच पाएंगे यदि आप इस धरती पर रहेंगे तो ? आप लोग सोंच रहे होंगे कि ऐसी कौन सी मुसीबत है, जो आदमी इससे बचना भी चाहेगा तो भी नहीं बच सकता है, तो लो सुनो- कौन सी समस्या है और कौन मरेगा वर, किस पंडित को चाहिए दान ।
बता दें कि कार्यकाल 3 साल पूरा होने को आया महापौर अपने वादों पे कितना खरा उत्तरी, निगम अध्यक्ष निगम में विपक्ष की भूमिका में है, अब बात करते है घनघोर ईमानदार आयुक्त की पिछले एक साल में आयुक्त ने अपने बुद्धि, विवेक, अपने सोच से शहर को क्या नयापन दिया ? कभी टाइम मिले तो गौर जरूर कीजियेगा आप सब ने आयुक्त के द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ़ किये जा रहे जाँच भी देखी सुनी और उनके द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार के बारे में भी पढ़ा कही और नहीं तो मेरे फेस बुक पे पढ़ने को मिल जाएगा। साथ ही एक साल से लिखे मेरे हुए हर पोस्ट पर आज भी कायम हू, इसके बाद जिन्हे आप ने चुनकर भेजा उन्होंने क्या किया सिर्फ आयुक्त के साथ मलाई खा रहे है,वैसे एक करोड़ बीस लाख में कुछ कम बेसी हो सकता है।
आज का जोक… क्या सयोग है 10% 10 लाख.. दिल पर मत लेना और गलत फहमी भी मत पालना की हम डर गए।
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