आलेख : श्रीकांत द्विवेदी
सिंगरौली। बीते 7 माह पूर्व 7 जनवरी को जिले के सरई थाना क्षेत्र अंतर्गत नौढिया निवासी रामकमल पांडेय का शिवगढ़ के बर्दिया नाला सुतिहिया मे रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई थी। इस रहस्यमयी मौत का राज सरई पुलिस नहीं खोलना चाहती है। 7 माह बीत गए लेकिन पीड़ितों को आज तक पुलिस न्याय नहीं दे पाई है।
मृतक के भाई का आरोप है कि एसडीओपी देवसर और तत्कालीन टीआई ने मामले को गुमराह किया है। पीड़ित ने कहा कि नवागत टीआई ने कहा था कि निष्पक्ष जांच कराएंगे लेकिन अभी तक कोई जांच नहीं हुई है अब तो कह रहे हैं कि उनकी मौत करंट से हुई थी डॉक्टर की रिपोर्ट कह रही है। लेकिन आरोप में यह भी कहा जा रहा है कि बालू चोरी के मामले को छुपाने के लिए तत्कालीन टीआई ने करंट दिखाकर मामले को रफा दफा करने में जुटे हुए थे।
मृतक रामकमल पांडे के भाई कृष्ण कमल पांडे ने एसडीओपी राहुल सैयाम और तत्कालीन टीआई शेषमणि पटेल पर आरोप लगाते हुए कहा है कि तत्कालीन टीआई शेषमणि पटेल के द्वारा सरई थाना क्षेत्र के शिवगढ़ बर्दिया नाला से दिन रात बराबर रेत की चोरी करवाते थे। आरोप में यह भी कहा गया कि जो पुलिस कह रही है कि मेरा भाई गाय खोजने गया था। जबकि पुलिस सरासर गलत कह रही है। मेरा भाई कहीं गाय खोजने नहीं गया था और ना ही करंट में फंसने से उसकी मौत हुई है। पूरी तरीके से पुलिस मामले को उलझाई हुई है। क्योंकि जिस दिन रामकमल की मौत हुई है वह 7 जनवरी थी। उस दिन रात को तकरीबन 12 बजे रामकमल अयोध्या शर्मा के यहां रामायण गा रहे थे।
वहीं पर सरई पुलिस आई और रामकमल से कहीं की आपका ट्रैक्टर दो ट्रिप बालू लेकर निकल गया है अब कोई झगड़ा विवाद नहीं होगा फिर से अपनी गाड़ी भेज दीजिए। इतना कह कर पुलिस चली गई। पीड़ित ने बताया कि रामायण गाने के बाद रामकमल शिवगढ़ गए। वहां क्या विवाद हुआ। किसी को कुछ पता नहीं है। उन्हीं के ट्रैक्टर से पुलिस के द्वारा रामकमल पांडे का शव ट्रैक्टर में रखवा कर घर भेज दिया गया।
सवाल यह है कि अगर करंट से उनकी मौत हुई होती तो पुलिस कभी भी शव उठाकर घर ना भेजती और घटना स्थल से साक्षय को ना छुपाया गया होता। इस घटना में पूरी तरीके से तत्कालीन टीआई की संलिप्तता थी। क्योंकि पीड़ित ने आरोप में बताया कि घटना के दिन अल सुबह जब सरई थाने गया तो तत्कालीन टीआई शेषमणि पटेल और एसडीओपी के द्वारा डाट कर भगा दिया गया था और रिपोर्ट नहीं लिखी गई थी। अगले दिन 8 जनवरी की सुबह तकरीबन 7 दूसरे के कहने पर रिपोर्ट लिखी गई और उस रिपोर्ट में हमारा हस्ताक्षर नहीं लिया गया अन्य का हस्ताक्षर लेकर करंट दिखाकर मौत होना लिखा गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि यह पूरी घटना जानबूझकर की गई है पुलिस ने ट्रैक्टर रेत में लगा हुआ था उसको नहीं दर्शाया है क्योंकि यह दर्शाती की ट्रैक्टर बालू चोरी कर रहा था तो खुद पुलिस फंस जाती। अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए पुलिस मनगढ़ंत कहानी बनकर करंट से मौत होना दिख रही है अब तो पुलिस ना तो सीडीआर दिखा रही है। पीड़ित ने कहा कि मेरे भाई की सोची समझी हत्या हुई है अब पुलिस मामले को दबा रही है। हमको न्याय नहीं मिल रहा है।
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