सिंगरौली। जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित परसौना में बीते सोमवार को जेबीटी कंपनी का ट्रेलर दूध बेचने जा रहे अन्ने पाल को रौद दिया था जहां मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मृतक अन्ने सड़क के काफी किनारे से जा रहा था। बाबजूद इसके अनियंत्रित स्पीड ट्रेलर वाहन ने उसे रौंद दिया। भीड़भाड़ वाले इलाके में गाड़ी की स्पीड देखकर लोगों का कहना है कि चालक नशे में था नहीं तो यह हादसा नहीं होता।
बता दें कि शराब के नशे में गाड़ी चलाना और चलवाना, कानून और ज़िंदगी दोनों से खिलवाड़ है। यहां चलवाने वालों पर भी न केवल जिम्मेदारी तय हो बल्कि उनके खिलाफ अपराधिक प्रकरण भी दर्ज होना चाहिए। कोल ट्रांसपोर्टरों पर कंपनियों में समय से कोयला आपूर्ति का दबाव रहता है। ऐसे में वह ड्राइवरों का फिजिकल टेस्ट या फिर ड्राइवर नशे में है कि नहीं बिना जांच पड़ताल किए उससे ट्रेलर वाहनों की चाबी दे दी जाती है।
नतीजा खुद में बिना कोई कंट्रोल किये ट्रेलर अनियंत्रित स्पीड से चलते हैं और हादसों के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में कंपनियों की जिम्मेदारी होती है कि वह नशेड़ी ड्राइवर को ट्रेलर की स्टेरिंग ना पकड़ाएं। वहीं जिला प्रशासन को भी आएं दिन कोल ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों से हो रहे हादसों पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। सूत्रों का दावा है कि परसौना-रजमिलान रोड पर बीते सोमवार को करीब 8.30 बजे शराब के नशे में जेबीटी कंपनी का धुत एक ट्रेलर चालक ने तेज रफ्तार ट्रेलर चलाते हुए बाइक से जा रहे एक दूधवाले को कुचल दिया था । जिससे उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई।
घटना से गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दिया था। जिससे करीब 6 घंटे तक न केवल कोल परिवहन बंद रहा बल्कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को खूब पसीना बहाना पड़ा। वही इस घटना से प्रशासन और स्थानीय कंपनियों की साख पर भी बट्टा लगा। जबकि इस घटना का मुख्य जिम्मेदार जेबीटी कंपनी हैं।
जेबीटी कोल ट्रान्सपोर्टर श्रम कानून को दिखा रहा ठेगा
जेबीटी कोल ट्रान्सपोर्टर कंपनी श्रम कानून को ठेगा दिखाकर कोल ट्रांसपोर्ट कर रहा है। सूत्रों का दावा है कि कंपनी प्रबंधन श्रमिकों का लगातार शोषण कर रही है। कई श्रमिकों को कम सैलरी दी जा रही है। जबकि कई को तो पीएफ दिया ही नहीं जा रहा। वहीं ड्राइवरों से 12 घंटे काम लिए जा रहे हैं। हां ज्यादा फेरों का लालच देकर बोनस जरूर दिया जाता है। कई बार बोनस के लालच में ड्राइवर ज्यादा फेरे लगाने के चक्कर में तेज रफ्तार से चलते हैं। और हादसों के शिकार हो जाते हैं।
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