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Indian ‘राइस मैन’ ने दुनिया को खिलाया चावल और इतिहास में कर लिया अपना नाम दर्ज

Indian : राइस मैन गुरदेव सिंह खुश पंजाब के जालंधर में जन्मे गुरदेव सिंह खुश को पूरी दुनिया ‘राइस मैन’ के नाम से जाना जाता है.

Indian : गुरुदेव चावल के लिए वही व्यक्ति हैं.जिन्हें चावलों का जनक नाम से जाना जाता हैं. जो हरित क्रांति के जनक नॉर्मन बोरलॉग ने गेहूं को दिया था.

 

इतिहास में उनकी ब्लॉकबस्टर IR36 और IR64 चावल की किस्मों की तरह दुनिया भर में कभी भी कोई खाद्य फसल नहीं लगाई गई है.जो इन किस्मो का मुकाबला कर सके! दुनिया भर में ‘राइस मैन’ के नाम से मशहूर गुरदेव सिंह खुश का नाम दुनियाभर में धान के लिए हरित क्रांति में हमेशा याद रखा जाएगा. इनकी खोजी गई चावल की ब्लॉकबस्टर IR36 और IR64 किस्में दुनियाभर में उगाई गई. आपको ये जानकर हैरानी होगी लेकिन जितने बड़े पैमाने इनके चावलों को दुनिया भर में उगाया गया, इतना किसी और फसल को कभी नहीं उगाया गया. आज भी चावल की इस किस्म को बड़े पैमाने पर खाया जाता है.तथा भारत में यह हर एक की मन पसंद हैं. Indian

प्रमुखता से दिखाना

जालंधर में जन्मे गुरदेव सिंह खुश को दुनिया भर के लोग ‘राइस मैन’ के नाम से जानते हैं.तथा दुनिया में हर कोई इनकी तारीफ़ करता हैं क्युकीं इन्होने दुनिया को चावल की सौगात दी थी. Indian

IR36 और IR64 चावल की किस्मों को दुनिया भर के कई क्षेत्रों में नहीं लगाया जाता है।
गुरदेव के नेतृत्व में, 75 देशों में 643 किस्मों की कुल 328 चावल प्रजनन लाइनें जारी की गईं.जो की हर किसी को पसंद आयी थी. Indian

नई दिल्ली। आपने आयरन मैन, स्पाइडर मैन और यहां तक ​​कि पैडमैन के बारे में तो सुना ही होगा. परन्तु क्या आपने ‘राइस मैन’ का नाम सुना है? जी हां.. ‘राइस मैन’, तो आइए आज बात करते हैं ‘राइस मैन’ की, जिनके अविष्कार किए गए चावल दुनिया भर के लोग खाते हैं. Indian

पंजाब के जालंधर में जन्में गुरदेव सिंह खुश को दुनिया भर के लोग ‘राइस मैन’ के नाम से जानते हैं.और दुनिया में चारो तरफ इनकी प्रसंशा की जाती हैं. हरित क्रांति के जनक नॉर्मन बोरलॉग ने गेहूं को हैप्पी राइस कहा था. Indian

गुरदेव सिंह का जन्म 22 अगस्त, 1935 को पंजाब के जालंधर में हुआ था. इनके बारे में एक दिलचस्प बात जानकर आप चौंक जाएंगे कि दुनिया के इस राइस मैन ने अपने उम्र के 32 सालों तक कभी धान के खेत नहीं देखे थे.और वह धान के बारे में जानते तक नहीं थे. खुश ने 1955 में एग्रीकल्चर कॉलेज लुधियाना से ग्रेजुएशन पूरा किया. Indian

वही से उन्हें धान की नॉलेज मिली थी. पढ़ाई में अच्छे खुश को उनके अच्छे नंबरों की बदौलत कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस (यूसीडी) में मास्टर्स के लिए आसानी से एडमिशन मिल गया. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि खुश का रिसर्च चावल पर ना होकर राई पर था. साल 1966 में उनको अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) से बुलावा आया. Indian

रिपोर्ट के अनुसार, इतिहास में कोई भी खाद्य फसल दुनिया भर में व्यापक रूप से उनकी ब्लॉकबस्टर IR36 और IR64 चावल की किस्मों के रूप में नहीं लगाई गई है.तथा यह किस्म दुनिया में बेस्ट हैं. शुरुआत में गुरदेव सिंह को लगा कि चावल खाने वाले ज्यादा नहीं हैं.और इसे पसंद करने वाले लोग कम ही हैं. उसे सबसे ज्यादा रोटी खाना पसंद है. यह उन्हें ‘भारत के मिल्कमैन’ की तरह बनाता है. वर्गीज कुरियन जिन्हें दूध पसंद नहीं था और वह कभी नहीं पी पाते थे. Indian

जबकि गुरदेव ने जुलाई 1967 में फिलीपींस के लॉस बाओस में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) का दौरा करने तक चावल के खेतों को नहीं देखा था. और वह चावल से बिल्कुल अनभिज्ञ थे. किसान करतार सिंह के सबसे बड़े बेटे के रूप में, उनका जन्म 22 अगस्त 1935 को पंजाब में जालंधर जिले की फिल्लौर तहसील के रुड़की गाँव में हुआ था. खुश को याद है कि उसकी 15 एकड़ जमीन में सिर्फ मक्का, गेहूं, मूंग और काले चने उगाए जाते हैं. Indian

इस तरह शुरू हुई कहानी

खुश ने जून 1955 में लुधियाना कृषि कॉलेज से स्नातक किया. उनके अच्छे ग्रेड ने उन्हें विज्ञान में मास्टर के लिए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस यूसीडी में प्रवेश दिलाया. खुश का पीएचडी शोध राई पर था, एक अनाज जो गेहूं और जौ से निकटता से संबंधित है. अगस्त 1966 में, अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के निदेशक रॉबर्ट एफ. चांडलर ने खुश को छह साल पुरानी फर्म में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया.उस समय  खुश एक साल के भीतर आईआरआरआई में शामिल हो गए.और काम करना शुरु कर दिया. Indian

 IR36 तथा IR64 चावल की किस्मों की खोज की गई है

बाद में, वे एक खुश चावल ब्रीडर बन गए क्योंकि आईआरआरआई में सभी चावल पर काम करते थे. और इस बारे में उनकी जानकारी बढ़ती जा रही थी. यहीं पर खुश ने धान की किस्मों धान का उत्पादन किया, विशेष रूप से IR36 और IR64 ने सभी को प्रभावित किया. IR36 मई 1976 में जारी किया गया था और 1980 के दशक में सालाना 11 मिलियन हेक्टेयर में लगाया गया था. इससे पहले इतने बड़े पैमाने पर कोई खाद्य फसल, यहां तक ​​कि चावल भी नहीं बोया गया था.जो की उनका यह सफल प्रयास था. Indian

 ये आंकड़े के कारण ‘राइस मैन’ बनाए थे

खुश आईआरआरआई में एक ब्रीडर के रूप में शामिल हुए, फरवरी 2002 में सेवानिवृत्त हुए, प्रशासनिक पदों में बहुत कम रुचि के साथ.तथा उनका रुझान उस तरफ कम ही था. उनके नेतृत्व में, 75 देशों में 643 किस्मों की कुल 328 चावल प्रजनन लाइनें प्रकाशित हुईं. इनमें से कई, जिनमें IR42 और IR72 शामिल हैं, व्यापक रूप से बोए गए थे.जो असामान्य परिणाम दे रहे थे. परिणामस्वरूप, 1966 और 2000 के बीच वैश्विक चावल उत्पादन में 133.5 प्रतिशत 257 मिलियन से 600 मिलियन टन की वृद्धि हुई. धान की बुआई के लिए इस्तेमाल होने वाले रकबे की बात करें तो इसमें 20.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.जो की यह कोई सामान्य आंकड़ा नहीं हैं. Indian

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Indian 'राइस मैन' ने दुनिया को खिलाया चावल और इतिहास में कर लिया अपना नाम दर्ज
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