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शिवराज के विकास के कोरे वादों का दंश झेल रहा सीधी जिला…

कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति का शिकार हैं जनप्रतिनिधि,अब तक एक भी काम ऐसा नहीं जो विकास की मिसाल बना हो

सीधी — प्रदेश भर में शिव के राज में सीधी जिले के विकास कार्यों में पूरी तरह से लगा ब्रेक बदस्तूर जारी है। डेढ़ दशक से जिले को ऐसी कोई विशिष्ट उल्लेखनीय सौगात नहीं मिली जिससे सीधी का नाम ऊंचा हो सके। इससे इतर जिले के मतदाता भाजपा प्रत्याशियों को जीत का सेहरा बांधते रहे। जिले की चार विधानसभा क्षेत्रों में तीन पर भाजपा का कब्जा है। पिछले विधानसभा चुनाव में तो भाजपा को चुरहट का गढ़ फतह करनें में भी कामयाबी मिली है। भाजपा का सांसद एवं तीन विधायक होनें के बावजूद सीधी जिले में विकास का पहिया पूरी तरह से थमा हुआ है।

पड़ोसी जिले में सौगातों की बौछार… उधर अविभाजित सीधी का पूर्व में हिस्सा रहे पड़ोसी जिले पड़ोसी जिले सिंगरौली को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह लगातार सौगातें दे रहे हैं। अभी हाल ही में तो सिंगरौली प्रवास के दौरान उन्होनें सौगातों की झड़ी लगा दी। जिसमें मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, आधुनिक आईटीआई कॉलेज के साथ ही ब्लॉक मुख्यालयों को नगर परिषद बनानें की सौगातें दी हैं। सिंगरौली को आदर्श जिला बनानें की घोंषणा भी की गई।

सीधी से कतराते रहे हैं मुख्यमंत्री… सीधी जिले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कार्यक्रम भी विशेष परिस्थितियों में ही बनता है। यहां आनें से वो लगातार कतराते रहते हैं कि कहीं कोई घोषणा करनें का दबाव न बन जाए। पिछली मर्तबा विधानसभा चुनाव से पूर्व यहां आनें पर सीधी को मिनी स्मार्ट सिटी की सौगात जरूर दी गई थी। परंतु ये सौगात भी बजट के अभाव में आज तक मूर्त रूप नहीं ले पा रही है।

सीधी से नाराजगी का सबब… सीधी के प्रति मुख्यमंत्री की उपेक्षा को लेकर जानकारों का कहना है कि शिवराज सिंह के पहली मर्तबा मुख्यमंत्री बननें के करीब छ: माह बाद ही सीधी लोकसभा का उपचुनाव वर्ष 2005-06 में हुआ था। यह चुनाव उनके लिए बड़ी अग्निपरीक्षा होनें से शिवराज ने सीधी लोकसभा क्षेत्र में 75 से ज्यादा आम सभाएं की थीं। उनके तमाम प्रयासों के बावजूद यहां से भाजपा प्रत्याशी जीत नहीं सका। इसका जबरदस्त आघात शिवराज को लगा और उन्होनें इसी उपचुनाव के दौरान की गई अपनी घोषणा पर अमल करते हुए सिंगरौली को जिला बनानें का भागीरथी प्रयास शुरू कर उसे नया जिला बनवाया। सीधी जिले के विकास में सिंगरौली बड़ा स्तंभ था। जिसको उन्होनें अलग कर सीधी को उपेक्षित छोंड़ दिया।

सीधी को छोड़ दिया भगवान भरोसे…

यदि सीधी जिले के विकास को लेकर शिवराज गंभीर होते तो उनके द्वारा 15 वर्षों में यहां के लिए भी कुछ ऐतिहासिक कार्य किए गए होते।


सीधी — जिला मुख्यालय के अलावा तहसील मुख्यालय भी उपेक्षित पड़े हुए हैं। उप तहसील मड़वास को तहसील का दर्जा दिलानें की घोषणा किए हुए कई साल हो चुके हैं। यह घोषणा आज भी अमल में नहीं आ सकी। सीधी जिले के विकास कार्यों को लेकर यहां के जन प्रतिनिधि भी पूरी तरह से निष्क्रिय रहे हैं। उनके द्वारा विकास कार्यों के संबंध में कोई भी मांग बुलंदी के साथ नहीं रखी। संभवत: उन्हें ऐसा लग रहा है कि शिवराज नाराज न हो जाएं। सब कुछ मुखँयमंत्री पर ही छोंड़ दिया गया है। जिसका दंश यहां की जनता को उपेक्षित होकर भुगतना पड़ रहा है। सिंगरौली जिले के अलग होनें के बाद से ही सीधी जिले के हिस्से में विकास के नाम पर शिवराज नें 15 वर्ष बाद भी कुछ नहीं दिया है।

नए क्षेत्र नगर परिषद बननें को मोहताज… प्रदेश का सबसे पुराना जिला होनें के बावजूद सीधी की आज भी गिनती पिछड़े जिलों में होती है। यहां न तो उद्योग धंधे हैं और न ही कोई बड़े संस्थान। रेल आनें का सपना कब पूरा होगा उसको लेकर भी समय निश्चित नहीं किया जा सकता। किसी भी जिले के विकास का पैमाना वहां उपलब्ध उद्योग धंधों और बड़े संस्थान ही होते हैं। इनके अभाव के चलते जिले में काफी बेरोजगारी है। युवाओं को काम धंधे न मिलनें से बड़े शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सीधी जिले के विकास को लेकर कभी भी गंभीरता से पहल नहीं की गई। यहां के मतदाता भले ही भाजपा के प्रति समर्पित रहे हों लेकिन उनके क्षेत्र आज भी विकास को मोहताज है। सीधी जिले में नए स्थानों को नगर परिषद क्षेत्र बनानें की मांग स्थानीय जनता द्वारा अवश्य ही लंबे अरसे से की जा रही है लेकिन जन प्रतिनिधियों द्वारा इसको मुख्यमंत्री के समक्ष जोरदार तरीके से नहीं रखा जा रहा है। वर्तमान में ब्लॉक जनपद मुख्यालय सिहावल, कुसमी के साथ ही मड़वास एवं बहरी को नगर परिषद क्षेत्र बनानें की आवश्यकता है। यह क्षेत्र यदि नगर परिषद का दर्जा पा लेते हैं तो उनकी मूलभूत जरूरतें स्थानीय स्तर पर ही पूरी होने लगेंगी।वहीं नगर पालिका परिषद सीधी क्षेत्र के परिसीमन का कार्य भी सालों से लटका हुआ है। यदि परिसीमन सही तरीके से किया जाए तो सीधी को नगर निगम का दर्जा भी मिल सकता है।

स्वास्थ्य और शिक्षा में भी उपेक्षित… सीधी जिला स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में काफी उपेक्षित है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए यहां मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मांग कई दशकों से उठ रही है। जिसको लेकर यहां के जन प्रतिनिधियों द्वारा उच्च स्तर पर जोरदार प्रयास न करनें से यह सौगात सीधी जिले से दूर होती जा रही है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सीधी जिले को कुछ भी नहीं मिला है। पॉलिटेक्रिक कॉलेज कांग्रेस प्रदेश सरकार द्वारा सीधी को मिला था। यह अवश्य था कि भवन के अभाव में इसका संचालन कई वर्षों तक सिंगरौली में होता रहा। बाद में भाजपा शासन में इसका संचालन शुरू हुआ। आईटीआई जब सभी जिला मुख्यालयों में खुला तो सीधी का नंबर भी लग गया था। सीधी जिला मुख्यालय में पुराना लॉ कॉलेज था। जो भाजपा के कार्यकाल में व्यवस्थाओं के अभाव में बंद हो चुका है। संजय गांधी महाविद्यालय परिसर में भवन की सुविधा उपलब्ध होनें के बाद भी बंद पड़े लॉ कॉलेज का संचालन कई वर्षों बाद भी नहीं हो रहा है।

5 वर्ष पूर्व इंजीनियरिंग कॉलेज की थी घोषणा इंजीनियरिंग कॉलेज सीधी में खोलनें की घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 5 वर्ष पूर्व की गई थी। जो आज भी पूरी नहीं हो सकी है।उधर देखा जाए तो सीधी जिला स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में काफी पिछड़ा हुआ है। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के ज्यादातर पद खाली पड़े हैं। यहां पदस्थ डॉक्टर गंभीर रोगियों की जान बचानें के लिए तत्परता के साथ प्रयास करनें की बजाय सीधे रेफर कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का हाल तो और भी बेहाल है।

एकजुट गंभीर प्रयास की जरूरत… वर्तमान में जो परिस्थितियां सीधी के साथ निर्मित हैं उसको लेकर सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों द्वारा गंभीर एवं एकजुट होकर गंभीर प्रयास करने की सख्त जरूरत है वरना सीधी जिले का विकास यहां के लोगों के लिए सिर्फ एक झूठा चुनावी वादे का जुमला और एक कोरा सपना ही साबित होता रहेगा।

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