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सीधी-सिंगरौली रेलवे में भू अर्जन के लिए चाहिए 300 करोड़,27 गांव के भू-स्वामी राशि पाने का कर रहे इंतजार,SIDHI NEWS


सीधी-सिंगरौली रेलवे लाइन को लेकर अभी भी 27 गांवों का मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। भुगतान को लेकर हितग्राही तो परेशान हैं ही, वहीं प्रशासन द्वारा भी इस मामले में कोई पहल नहीं की जा रही है। तीन वर्ष से राशि न मिलने के कारण धारा का प्रकाशन दूसरी बार कराने की नौबत आई लेकिन नहीं लगता कि इस बार भी भुगतान हो पाएगा। ऐसी स्थिति में कहीं तीसरी बार धारा के प्रकाशन की नौबत सामने न आने पाए इस पर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन को पहल करने की जरूरत है। ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन के सीधी जिले के लिए भू-स्वामियों को मुआवजा का इंतजार करना पड़ रहा है।

भू-अर्जन शाखा सीधी में रेलवे द्वारा अधिग्रहित की गई जमीन के लिए राशि का आभाव बना हुआ है। करीब 300 करोड़ रूपये विभाग की ओर से जरूरत है लेकिन भू-अधिग्रहण के लिए विभाग के पास फूटी कौड़ी नहीं बची है। बिना मुआवजा दिए जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता, ऐसी स्थिति में पटरी का निर्माण कार्य प्रारंभ करने में और भी विलम्ब का सामना करना पड़ सकता है। राशि को लेकर मांग पत्र कलेक्टर के माध्यम से रेलवे अधिकारियों के पास भेजे गये हैं किन्तु दो वर्ष से केन्द्र सरकार से राशि प्राप्त नहीं हो पा रही है।

बता दे कि चुरहट, गोपदबनास सहित बहरी तहसील अंतर्गत भू-अधिग्रहण का काम लंबित पड़ा हुआ है। भू-अर्जन अधिकारी के अनुसार अब तक 288 करोड़ रूपये मुआवजा वितरण का कार्य पूर्ण हो चुका है शेष राशि रामपुर नैकिन, चुरहट, गोपद बनास व बहरी तहसील में अधर में है। ऐसी स्थिति में जिनकी जमीन अधिग्रहित हो चुकी है वो तो यही आस लगाए हैं कि उनका भुगतान शीघ्र होगा लेकिन रेलवे विभाग एवं प्रशासन इस मामले में पहल नहीं कर पा रहा है। 

27 गांवों में जारी नहीं हो पाई भू-अधिग्रहण की राशि 
जिले के चार तहसीलो अंतर्गत रेलवे पटरी निर्माण के लिए जमीन पटरी का अधिग्रहण करना है लेकिन अभी तक 27 गांव में रेलवे में अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा वितरित नहीं हो पाया है। जिसमें चुरहट तहसील के पांच गांव, गोपद बनास तहसील के 6 एवं बहरी तहसील के 16 गांव सम्मिलित हैं जिन्हे अभी तक मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इन गांवों में मुआवजा के लिए 300 करोड़ रूपये की जरूरत है। 


14 करोड़ का भुगतान लंबित
प्रशासन के द्वारा जिन जमीन का धारा 21 के तहत अवार्ड पारित कर जमीन को अधिग्रहित कर लिया गया है उस गांव के भी प्रभावित किसानों को मुआवजा का वितरण नहीं हो पाया है। बताया गया है कि जमीन अधिग्रहित हो चुकी है उन किसानों को भुगतान के लिए 14 करोड़ 35 लाख की जरूरत है किन्तु विगत दो वर्षों से सरकार से राशि न मिलने के कारण भुगतान लंबित पड़ा हुआ है। 

सांसद पर ही लोगों की टिकी हैं निगाहें
रेलवे में अधिग्रहित जमीन को लेकर जिले के भू-स्वामियों की निगाहे सांसद रीती पाठक पर टिकी हैं। उन्हे उम्मीद है कि उनके मार्फत ही भुगतान प्रक्रिया करायी जा सकती है। हालांकि तीन वर्षों से मुआवजा राशि न मिलने के कारण अब लोग सरकार एवं प्रशासन पर नाराजगी जताने लगे हैं। सांसद को भी अब तेज पहल करने की जरूरत है। अब देखना बाकी है कि इस मामले में सांसद द्वारा अपने तेज प्रयासों से कब तक में सफलता अर्जित जा सकेगी जिससे इस निर्माण कार्य को आगे गति मिल सके। 

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