उत्तर प्रदेश

UPSC Success Story:   मां आंगनवाड़ी में सहायिका, बेटे ने गाड़ा UPSC में सफलता का झंडा, गांव से ही की थी स्कूली पढ़ाई

UPSC Success Story: Mother was a helper in Anganwadi, son raised the flag of success in UPSC, did schooling from village itself

UPSC Success Story: घरवालों ने बताया कि मौज-मस्ती छोड़ कृष्णपाल सिंह राजपूत हर वक्त पढ़ाई में ही रमे रहते थे. चौंकाने की बात है कि उन्हें अभी तक मोटरसाइकिल भी चलानी नहीं आती है.

UPSC Success Story:  जिले के दो होनहारों ने यूपीएससी में अपनी सफलता का झंडा गाड़कर जिले का मान बढ़ाया. आंगनबाड़ी सेविका का बेटा पांचवीं प्रयास में यूपीएससी में सफलता का परचम लहराया और 472वां रैंक हासिल किया. वहीं ओबरा की बेटी शुभ्रा चौथी प्रयास में यूपीएससी क्रैक कर 197वां रैंक हासिल की है। दोनों के सफलता से परिवार के साथ-साथ उनके शुभचिंतक और पूरे जिलेवासियों में खुशी का माहौल है.

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UPSC Success Story:   मां आंगनवाड़ी में सहायिका, बेटे ने गाड़ा UPSC में सफलता का झंडा, गांव से ही की थी स्कूली पढ़ाई
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UPSC Success Story:  आंगनबाड़ी सेविका मीना देवी का बेटा अंकित सिन्हा मदनपुर प्रखंड के सलैया का रहने वाला है. उसके पिता विपीन बिहारी सिन्हा एक छोटे व्यवसायी हैं. वहीं शुभ्रा ओबरा के मखरा गांव की अरूणजय शर्मा की बेटी है. मां रेणू शर्मा गृहणी हैं.

UPSC Success Story: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली सिविल सर्विसेस एग्जाम, 2021 में मध्य प्रदेश के एक युवा ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है. निवाड़ी जिले के ओरछा के रहने वाले कृष्णपाल राजपूत ने केवल 23 साल की उम्र में 329वीं रैंक हासिल कर अपने साथ परिवार और पूरे इलाके को गौरवान्वित किया है. सोमवार को जैसे ही यूपीएससी ने रिजल्ट की घोषणा की, कृष्णपाल के घर में उत्सव का माहौल बन गया। खुशी से फूले नहीं समा रहे उनके परिवार के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां व शुभकामनाएं देने वालो का ताता लग गया.

एक किसान के पोते, आंगनवाड़ी सहायिका और वकील के बेटे कृष्णपाल सिंह राजपूत ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में 329वीं रैंक हासिल कर पूरे परिवार का नाम रोशन किया है.  23 साल की उम्र में कृष्णपाल ने यूपीएससी को एक जुनून की तरह लिया और दूसरे प्रयास में सफलता अर्जित कर ली. उनकी इस उपलब्धि से पूरा जिला गौरवान्वित हैं.

निवाड़ी जिले की पृथ्वीपुर तहसील के पपावनी नेगुआ गांव में जन्मे कृष्णपाल सिंह राजपूत की परिवार संग ओरछा में रहते हैं. इनकी मां ममता राजपूत पपावनी गांव में आंगनवाड़ी सहायिका हैं, जबकि पिता रामकुमार राजपूत ओरछा जिला अदालत में वकालात करते हैं. वहीं, दादाजी नाथूराम राजपूत किसान हैं.

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UPSC Success Story:   मां आंगनवाड़ी में सहायिका, बेटे ने गाड़ा UPSC में सफलता का झंडा, गांव से ही की थी स्कूली पढ़ाई
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छोटे शहरों से पढ़ाई कर पहुचें इस मुकाम पर

कृष्णपाल सिंह ने 5वीं तक शिक्षा पपावनी गांव में ही हासिल की. 8वीं तक उन्होंने ओरछा में शिक्षा प्राप्त की और 10वीं निवाड़ी से की. इसके बाद 12वीं और ग्रेजुएशन इंग्लिश लिटरेचर में ग्वालियर से किया था.उन्होंने ग्वालियर के एमएलबी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए। पिछले चार साल वे दिल्ली के करोलबाग में रहकर इसकी तैयारी कर रहे थे।अगस्त 1999 में जन्मे कृष्णपाल सिंह हर वक्त पढ़ाई में मशगूल रहते थे और उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले में हर्ष का माहौल है. 2021 में उन्होंने परीक्षा दी और पहले प्रयास में ही 329वीं रैंक हासिल कर ली. UPSC

बाइक तक चलाना नहीं जानते

पिता रामकुमार ने बताया कि उनके बेटे ने छोटी उम्र में ही प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य बना लिया था. 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद से वे अपनी कॉलेज की पढृाई के साथ सिविल सर्विसेज परीक्षा से संबंधित जानकारियां जुटाने लगे थे। इसीलिए वे परिवार की सुख-सुविधा को छोड़ ग्वालियर गए थे, खुशी के इस मौके पर पिता रामकुमार राजपूत ने बताया कि उनका बेटा मौज-मस्ती से परे हर समय अपनी पढ़ाई में ही खोया रहता था. हैरत की की बात है कि कृष्णपाल को अभी तक मोटरसाइकिल भी चलानी नहीं आती. UPSC

कृष्णपाल की कामयाबी से दूसरे छात्रों को कर रही प्रेरित

उनके पिता ने बताया कि कृष्णपाल को कामयाबी उसके परिश्रम और त्याग से मिली है। उसने जब एक बार सिविल सर्विसेज में जाने का फैसला किया तो जी-जान से इसकी तैयारियों में जुट गया. उसके दोस्त भी गिने-चुने हैं. उसका अधिकांश समय तैयारी में ही बीतता था. उन्होंने कहा कि बेटे की कामयाबी से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. निवाड़ी जैसी छोटी जगह के युवा की यह कामयाबी दूसरे छात्रों को भी प्रेरित करेगी. UPSC

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