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CM साहब! सिंगरौली में सुबह भी ताले में कैद कोतवाली, कोतवाली प्रभारी बेपरवाह या फिर सिस्टम लाचार

सिंगरौली। लगता है सिंगरौली की कानून व्यवस्था ने भी अब “आराम” को प्राथमिकता दे दी है। तभी तो शहर में अपराधी दिनदहाड़े सक्रिय हैं और कोतवाली… वो तो सुबह-सुबह ही चैनल गेट में कैद नजर आती है। अब इसे आधुनिक पुलिसिंग कहें या फिर व्यवस्था की नई परिभाषा, समझ पाना थोड़ा मुश्किल जरूर है।

एक तरफ बैंक ऑफ महाराष्ट्र में दिनदहाड़े डकैती की घटना से लोग सहमे हुए हैं, तो दूसरी ओर ट्रैफिक सिग्नलों की एक दर्जन बैटरियां भी चोरी हो रही हैं। यानी अपराधी अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। लेकिन इधर कोतवाली का चैनल गेट शायद उन्हें खुला मैदान देने के लिए बंद रखा गया है, ताकि कोई बाधा न आए। इस संबंध में जब सीएसपी उमेश प्रजापति से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया‌।

तस्वीर भी कम दिलचस्प नहीं है। सुबह का वक्त, आम जनता अपनी समस्याएं लेकर थाने की ओर बढ़ती है, और वहां स्वागत में मिलता है, एक बंद गेट। अब जनता को समझ नहीं आता कि शिकायत दर्ज कराएं या पहले ताले के खुलने का इंतजार करें।
अब सवाल यह उठता है कि कोतवाली प्रभारी इस व्यवस्था से वाकिफ हैं या नहीं? या फिर सब कुछ सिस्टम के भरोसे छोड़ दिया गया है, जो शायद खुद ही लाचार नजर आ रहा है। क्योंकि अगर सब कुछ ठीक होता, तो थाने के दरवाजे कम से कम सुबह तो खुले मिलते।

ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि जिस थाने पर पूरे शहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही खुद सुरक्षित मोड में बंद पड़ा है। अपराधी खुले में, और कानून चैनल गेट में बंद हैं, यह समीकरण सिंगरौली में फिलहाल बिल्कुल फिट बैठता दिख रहा है। अब देखना यह है कि इस बंद गेट की खुलवाने की जिम्मेदारी किसके पास है, कोतवाली प्रभारी के पास, या फिर उस सिस्टम के पास जो हर सवाल पर चुप्पी साध लेता है।

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सिंगरौली जिले को कौन चला रहा

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