सिंगरौली। जिले के सरई क्षेत्रातर्गत संचालित एक गर्ल्स हॉस्टल में रह रही कक्षा आठवीं की छात्रा के मां बनने का मामला सामने आने के बाद सर्व शिक्षा अभियान की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। छात्रावास में रह रही लड़कियों का मेडिकल चेकअप हुआ होता तो शर्मसार कर देने वाली घटना को रोका जा सकता था। लेकिन छात्राओ की सुविधाओं और रखरखाव करने की जिम्मेदार बंद कमरे से छात्रावासों की मॉनिटरिंग करते हैं और छात्रावास में मिलने वाली सुविधाओं के पैसों का कैसे बंदर बांट करना है उसका प्लान तैयार करते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर में नाबालिग छात्रा ने सामुदायिक अस्पताल में नवजात बच्चे को जन्म दिया। इस जानकारी के बाद से ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा गया। फिलहाल पुलिस अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है। शर्मशार कर देने वाली इस घटना ने जिला परियोजना समन्वयक के कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि यदि छात्रावास में रूटिंग मेडिकल चेकअप होता तो इस घटना को रोका जा सकता था।
केंद्र सरकार छात्रावास की छात्राओं के मेडिकल चेकअप के लिए मेडिकल कंटीन्जेंसीज फंड भी मुहैया कराता है ताकि छात्रों का मेडिकल चेकअप प्रतिमाह हो सकें। लेकिन कई महीनो से छात्रों का मेडिकल चेकअप नहीं हुआ नतीजा सबके सामने है। सूत्रों की माने तो छात्रावासों को मिलने वाली मेडिकल कंटीन्जेंसी फंड में करीब 1 लाख रुपए सरकार द्वारा रिलीज किया जाता है। लेकिन इस फंड का उपयोग छात्रों के मेडिकल चेकअप में नहीं बल्कि छात्रावास अधीक्षक और डीपीसी को बतौर रिश्वत के लिए उपयोग किया जाता है।
इस मामले को लेकर जब डीपीसी राम लखन शुक्ला का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो वह व्यस्तता का हवाला देकर फोन काट दिया। इससे एक बात तो साबित हो गई कि वह अब मीडिया के सवालों से बच रहे हैं।
आखिर छात्रा की गर्भावस्था कैसे छिपी रही….
नाबालिक छात्रा के मां बनने के बाद छात्रावास अधीक्षक और डीपीसी सवालों के घेरे में आ गए। वहीं अब सवाल यह है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने तक छात्रा की गर्भावस्था कैसे छिपी रही। छात्र की गर्भावस्था की जानकारी ना मां-बाप को लगी और ना ही अधीक्षिका को, यह बड़ा सवाल है। वहीं छात्रावास अधीक्षका दीप्ति सिंह ने भी माना की छात्रावास में मेडिकल चेकअप कई महीनो से नहीं हुआ था। साथ ही उन्होंने कहा कि लड़की छुट्टियों के दौरान घर जाती रहती थी। वह अपनी परीक्षा भी घर से आकर ही दे रही थी। ऐसे में संभावना है कि घर जाने के दौरान वह गर्भवती हुई होगी। इस मामले की विभागीय जांच के साथ ही सरई थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया ने भी शुरू कर दी है। वह छात्रा से जुड़े लोगों सहित गांव वालों से जानकारी जुटा रहे हैं।
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