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होल-पैक के मुहाने पर बोलेरो, NCL के अमलोरी खदान में सुरक्षा नियम ताक पर, हादसे को न्योता देती लापरवाही

कलिंगा कंपनी के कार्यक्षेत्र में सुरक्षा नियमों की निगरानी पर सवाल, वीडियो सामने आने के बाद जांच की उठी मांग

सिंगरौली। कोयला खदानों में सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन अमलोरी खदान से सामने आया एक वीडियो इन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में कलिंगा कंपनी के कार्यक्षेत्र में भारी मशीनरी और होल-पैक क्षेत्र के नजदीक एक बोलेरो वाहन की आवाजाही दिखाई दे रही है। जिस स्थान पर भारी मशीनें और खनन गतिविधियां संचालित हो रही हों, वहां हल्के वाहन की इस तरह मौजूदगी ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि अमलोरी ओपनकास्ट खदान में कलिंगा कंपनी द्वारा खनन से संबंधित कार्य किया जा रहा है। खदान में डंपर और अन्य भारी मशीनरी लगातार संचालित होती है। ऐसे में एचईएमएम के आसपास हल्के वाहनों की आवाजाही दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकती है। खासकर भारी वाहनों के ब्लाइंड स्पॉट में आने वाला छोटा वाहन चालक के लिए दिखाई देना मुश्किल हो सकता है।

वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बोलेरो को इस क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति किस आधार पर मिली? क्या वाहन अधिकृत था और क्या चालक को खदान के निर्धारित ट्रैफिक नियमों की जानकारी थी? क्या बोलेरो निर्धारित एलएमव्ही मार्ग से ही होल-पैक क्षेत्र तक पहुंची? यदि यह क्षेत्र केवल अधिकृत खनन गतिविधियों के लिए निर्धारित था तो वहां हल्के वाहन की मौजूदगी की अनुमति किस अधिकारी ने दी।

खदान सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों में हल्के वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और एचईएमएम से अलग सुरक्षित यातायात व्यवस्था पर जोर दिया जाता है। ऐसे में वीडियो की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि मौके पर निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं। वायरल वीडियो कब का और किस खदान का है इसकी पुष्टि समाचार पत्र नहीं करता।

जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में

मामले में केवल बोलेरो चालक की भूमिका नहीं, बल्कि साइट पर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय बनती है। यदि वाहन अनधिकृत क्षेत्र में पहुंचा था तो उसे रोकने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी थी? वीडियो सामने आने के बाद अब एनसीएल प्रबंधन और सुरक्षा अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। खदान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले ही सुरक्षा में संभावित चूक रोकना जरूरी है।

छोटी चूक, बड़ा हादसा

ओपनकास्ट खदान में डंपर और अन्य एचईएमएम के ब्लाइंड स्पॉट बेहद संवेदनशील होते हैं। हल्के वाहन के अचानक सामने आने से टक्कर की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए एलएमव्ही की आवाजाही निर्धारित मार्ग, अनुमति और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप होना जरूरी है। वायरल वीडियो में दिख रही स्थिति यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सवाल सीधा है कि होल-पैक जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा नियम आखिर किसके इशारे पर ताक पर रखे गए।

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