वीडियो सामने आने के बाद भी नगर निगम के अधिकारी मौन, आखिर किसके आदेश पर सरकारी फायर ब्रिगेड निजी काम में लगी
सिंगरौली। जनता की सुरक्षा के लिए तैनात नगर निगम की फायर ब्रिगेड अगर किसी जनप्रतिनिधि की गाड़ी धोने में इस्तेमाल होती दिखाई दे तो सवाल उठना लाजिमी है। सिंगरौली में मंगलवार को सामने आए एक कथित वायरल वीडियो ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में नगर निगम की फायर ब्रिगेड से भाजपा विधायक रामनिवास शाह की गाड़ी पर पानी की बौछार कर उसे साफ करते हुए दो कर्मचारी दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो नगर निगम कमिश्नर सविता प्रधान के आवास के बाहर का है। वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी संसाधनों के निजी इस्तेमाल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि फायर ब्रिगेड वाहन के जरिए गाड़ी पर पानी की बौछार की जा रही है। एक कर्मचारी फायर ब्रिगेड से पानी चला रहा है, जबकि दूसरा व्यक्ति गाड़ी को साफ करता नजर आ रहा है। वीडियो मंगलवार का बताया जा रहा है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि इसमें दिखाई दे रहा घटनाक्रम सही है तो यह सवाल बेहद गंभीर है कि आखिर आपातकालीन सेवा के लिए उपलब्ध फायर ब्रिगेड का इस्तेमाल निजी वाहन की सफाई के लिए किस अनुमति से किया गया।
फायर ब्रिगेड का मूल दायित्व आगजनी और आपात परिस्थितियों में लोगों की जान-माल की रक्षा करना है। ऐसे में उसके निजी इस्तेमाल की तस्वीर सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल यदि नियम विरुद्ध हुआ है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। अब सवाल वीडियो का नहीं, जवाबदेही का है बल्कि सरकारी फायर ब्रिगेड निजी वाहन धोने पहुंची तो आदेश किसका था?
कमिश्नर आवास बना विधायक की गाड़ी का ठिकाना?
मामले को लेकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि विधायक की गाड़ी नगर निगम कमिश्नर के सरकारी आवास पर क्यों मौजूद थी। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कमिश्नर आवास का इस्तेमाल विधायक की गाड़ी के लिए अनाधिकृत आवास और कार्यालय की तरह किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो ने इस पूरे मामले को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।
कमिश्नर ने कहा- मैं कुछ नहीं कहूंगी
मामले में नगर निगम कमिश्नर सविता प्रधान से जब वायरल वीडियो और फायर ब्रिगेड के इस्तेमाल को लेकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, मैं इस मामले में कुछ नहीं कहूंगी। कमिश्नर के इस जवाब के बाद सवाल और गहरा गया है कि यदि सरकारी संसाधन नियमों के तहत इस्तेमाल हुए हैं तो उनके बारे में जानकारी सार्वजनिक करने से परहेज क्यों किया जा रहा है।
विधायक से संपर्क नहीं हो सका
वहीं, मामले में सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। विधायक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर निगम की फायर ब्रिगेड निजी वाहन की सफाई के लिए कमिश्नर आवास तक किसके निर्देश पर पहुंची? क्या इसके लिए कोई लिखित अनुमति थी? यदि अनुमति थी तो किस अधिकारी ने दी और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल का खर्च किस मद से वहन किया गया?