- कलेक्टर ने पावरग्रिड अधिकारियों को लगाई फटकार, भुगतान तय किए बिना काम कराने पर उठे सवाल
सिंगरौली. जिले में पावरग्रिड कंपनी की टावर लाइन को लेकर किसानों और कंपनी के बीच विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि कंपनी द्वारा किसानों की पट्टे की भूमि पर टावर लाइन बिछाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। विरोध करने वाले किसानों पर प्रशासनिक कार्रवाई का दबाव बनाने के लिए कलेक्टर न्यायालय से नोटिस तक जारी कराए गए हैं। चिनगी टोला, चितरबई कला, बिहरा, गहिलरा और गदसा गांव के करीब 12 प्रभावित किसानों को नोटिस जारी किए जाने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।
किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन पर टावर लाइन लगाने के लिए पहले उचित मुआवजा और क्षतिपूर्ति तय नहीं की गई। इसके बावजूद कंपनी के अधिकारी प्रशासन और पुलिस का हवाला देकर जमीन उपलब्ध कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी सहमति और उचित भुगतान के बिना भूमि पर काम कराया जाना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि हाल ही में परसदेही गांव में टावर लाइन लगाने का विरोध कर रहे एक किसान की मौत हो गई थी। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया था और मौके पर काफी हंगामा हुआ था। इस घटना के बावजूद टावर लाइन के काम को लेकर किसानों पर दबाव बनाए जाने के आरोपों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
भुगतान तय किए बिना कैसे शुरू होगा काम?
पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रभावित किसानों को जमीन, टावर लाइन के कॉरिडोर और फसल के नुकसान का कितना भुगतान किया जाना है, यह अब तक स्पष्ट रूप से तय नहीं किया गया है। किसानों का आरोप है कि कंपनी के अधिकारी पहले काम कराने का दबाव बना रहे हैं और बाद में मुआवजे को लेकर मोलभाव किया जा रहा है मामले की जानकारी सामने आने के बाद कलेक्टर ने पावरग्रिड कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रभावित किसानों की जमीन, टावर लाइन के कॉरिडोर और फसल नुकसान का कुल भुगतान कितना किया जाना है, इसे पहले निश्चित किया जाए। कलेक्टर के इस निर्देश के बाद कंपनी के अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
विरोध के बीच जारी है टावर लाइन का काम
प्रभावित किसानों का कहना है कि वे विकास कार्य के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उनकी निजी पट्टे की भूमि पर टावर लगाने से पहले पारदर्शी प्रक्रिया और उचित भुगतान जरूरी है। किसानों का आरोप है कि मौजूदा स्थिति में उन्हें अपनी ही जमीन के संबंध में दबाव का सामना करना पड़ रहा है। पावर ग्रिड कंपनी की ओर से मौका देखकर किसानों को मुआवजा दिया जाता है कहीं पर 20 लाख तो कहीं पर 25 लाख और कहीं पर 10 और 5 लाख भी दिया जाता है। अब कलेक्टर के निर्देश के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पावरग्रिड कंपनी प्रभावित किसानों के लिए भूमि, कॉरिडोर और फसल नुकसान का भुगतान किस आधार पर तय करती है। साथ ही, प्रशासनिक नोटिस झेल रहे किसानों की आपत्तियों का निराकरण किस स्तर पर होता है, इस पर भी सभी की नजर है।
पांच गांवों के 12 किसान प्रभावित
प्रभावित गांवों में चिनगी टोला, चितरबई कला, बिहरा, गहिलरा और गदसा गांव के करीब 12 किसानों को कलेक्टर न्यायालय से नोटिस जारी किए गए हैं। किसानों का आरोप है कि टावर लाइन के लिए उनकी पट्टे की भूमि पर दबाव बनाया जा रहा है। प्रभावित किसान भुगतान और प्रक्रिया स्पष्ट होने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि मुआवजा को सार्वजनिक किया जाए और उसी के आधार पर भुगतान किया जाए। आरोप है कि कानून और प्रशासनिक दबाव का इस्तेमाल कर जमीन पर काम शुरू कराने के बजाय पहले किसानों के अधिकार और भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ऐसे समझें हकीकत
चितरबई और बिहरा गांव में टावर लाइन के लिए पावरग्रिड कंपनी के अधिकारियों की ओर से किसानों को भुगतान को लेकर अलग- अलग आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। किसानों के अनुसार, कंपनी के अधिकारी वीरेंद्र नरवरे मौके पर पहुंचे और करीब 25 लाख रुपए भुगतान का आश्वासन दिया। इसके बाद मुकुंद भंडारी मौके पर पहुंचे तो उनके द्वारा 13 से 14 लाख रुपए भुगतान की बात कही गई। भुगतान को लेकर मोलभाव का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। बाद में कंपनी के प्रबंधक आरआर यादव ने भी किसानों को 12 से 13 लाख रुपए भुगतान करने का आश्वासन दिया। कंपनी के अधिकारियों द्वारा एक ही जमीन के लिए अलग-अलग राशि बताए जाने से किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कलेक्टर के निर्देश से कंपनी पर बढ़ा दबाव
कलेक्टर ने पावरग्रिड अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों की जमीन, टावर लाइन कॉरिडोर और फसल नुकसान का कुल भुगतान पहले निर्धारित किया जाए। इसके बाद ही मुआवजे और क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी। किसानों का कहना है कि भुगतान तय किए बिना जमीन पर काम कराने का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।