नंदगांव-अकलाड़ाड में स्टॉक के बावजूद कार्रवाई नहीं, मांग के मुताबिक बोल्डर पहुंचाने वाले नेटवर्क पर उठे सवाल
सिंगरौली। नवानगर थाना क्षेत्र के नंदगांव और अकलाड़ाड में एनसीएल के ओवरबर्डन से निकलने वाले बोल्डर के कथित अवैध कारोबार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इलाके में जगह-जगह बोल्डर का स्टॉक किया गया है और मांग के अनुसार इन्हें घरों की नींव सहित निर्माण कार्यों के लिए सप्लाई किया जा रहा है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि खुलेआम चल रहे इस कारोबार की जानकारी जिम्मेदारों तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
स्थानीय लोगों के अनुसार ओवरबर्डन से पत्थर निकालकर नंदगांव और अकलाड़ाड में अलग-अलग स्थानों पर जमा किए जाते हैं। बताया जा रहा है कि एक स्थान पर आंगनवाड़ी केंद्र के बगल में भी बड़ी मात्रा में बोल्डर का स्टॉक किया गया है। ऐसे स्थान पर पत्थरों का जमावड़ा न केवल कथित अवैध कारोबार की ओर इशारा करता है, बल्कि जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
आरोप है कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय पत्थर माफिया डिमांड के मुताबिक बोल्डर की सप्लाई करते हैं। यदि ये बोल्डर एनसीएल के ओवरबर्डन क्षेत्र से बिना अनुमति निकाले जा रहे हैं, तो यह खनिज और परियोजना सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिहाज से गंभीर विषय है। सवाल यह भी है कि ओवरबर्डन क्षेत्र से पत्थर बाहर निकालने की अनुमति किसके पास है और परिवहन के लिए कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए जा रहे हैं?
पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है और पुलिस की कथित शह के बिना इतने बड़े स्तर पर स्टॉक और सप्लाई संभव नहीं है। लाखों रुपये की कथित अवैध वसूली के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बोल्डर का कारोबार वैध है तो दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते और अगर अवैध है तो नवानगर पुलिस अब तक कार्रवाई से क्यों बच रही है? मामले में एनसीएल, खनिज विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।