डिमांड पर ट्रैक्टरों से सप्लाई की चर्चा, अवैध बोल्डर-रेत कारोबार में हर माह लाखों की कथित वसूली के आरोप; जांच हुई तो खुल सकता है नवानगर का पूरा नेटवर्क
सिंगरौली। नवानगर थाना क्षेत्र में बोल्डर के कथित अवैध कारोबार ने अब पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। भकुआर में करीब 100 ट्रैक्टर अवैध बोल्डर का स्टॉक होने की बात सामने आ रही है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में बोल्डर एक-दो दिन में तो जमा नहीं हो सकता। यदि यह स्टॉक लंबे समय से मौजूद है और स्थानीय दावों के मुताबिक डिमांड के अनुसार इसकी बिक्री भी हो रही है, तो फिर थाना प्रभारी और संबंधित बीट प्रभारियों को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि नवानगर क्षेत्र में सिर्फ भकुआर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई इलाकों में भी बोल्डर का कथित स्टॉक किया गया है। जरूरत पड़ने पर इन्हें ट्रैक्टरों के जरिए बैढ़न, विंध्यनगर, नवानगर और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के लिए सप्लाई किए जाने की बात कही जा रही है। मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि बोल्डर एनसीएल के ओवरबर्डन (ओबी) से निकलता हैं। लेकिन जांच का विषय यह है कि बोल्डर किसकी अनुमति से बाहर लाया गया, किन वाहनों से परिवहन हुआ और इसके संबंध में वैध दस्तावेज व रॉयल्टी नहीं होने के बाद भी पुलिस ने इसे क्यों नहीं पड़ा।
इधर स्थानीय सूत्रों के हवाले से पुलिस पर अवैध बोल्डर और रेत कारोबार से हर माह लाखों रुपये की कथित वसूली की चर्चा भी सामने आ रही है। कथित वसूली के मामले में पुलिसकर्मी प्रकाश सिंह का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस या संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना बाकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भकुआर में 100 ट्रैक्टर अवैध बोल्डर का स्टॉक मौजूद है तो इसकी वैधता की जांच अब तक क्यों नहीं हुई? प्रशासन, खनिज विभाग और एनसीएल संयुक्त रूप से स्टॉक, परिवहन और स्रोत की जांच करें तो पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आ सकती है।
100 ट्रैक्टर बोल्डर, फिर भी निगरानी कहां?
भकुआर में करीब 100 ट्रैक्टर बोल्डर के कथित स्टॉक ने पुलिस की गश्त और बीट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री का जमा होना कोई अचानक हुई गतिविधि नहीं हो सकती। ऐसे में सवाल यह है कि है कि क्या जिम्मेदारों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानकर भी अनदेखी की गई ? वहीं सूत्रों की माने तो अवैध बोल्डर-रेत कारोबार से पुलिस पर हर माह लाखों रुपये की कथित वसूली की चर्चा है। प्रकाश सिंह का नाम भी सूत्रों के हवाले से सामने आ रहा है। आरोप सही हैं या महज चर्चा निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
ओबी से बोल्डर आया तो दस्तावेज कहां हैं?
भकुआर में करीब 100 ट्रैक्टर बोल्डर का कथित स्टॉक कई सवालों को जन्म दे रहा है। यदि यह सामग्री एनसीएल के ओवरबर्डन से निकली है तो उसका स्रोत, परिवहन अनुमति, वाहन रिकॉर्ड और वैध दस्तावेज जांच के दायरे में आने चाहिए। एनसीएल द्वारा ओबी से निकले बोल्डर और पत्थरों से घिसकर बनी रेत के परिवहन पर प्रतिबंध के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री का स्टॉक कैसे पहुंचा, यह बड़ा सवाल है। आखिर किसकी अनुमति से यह परिवहन हुआ? संबंधित विभाग यदि स्टॉक से लेकर परिवहन तक की कड़ी जांच करें तो कथित कारोबार की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।