सिंगरौली। एनसीएल के जयंत खदान में चड्ढा ओवी कंपनी का डीजीएमएस उल्लंघन वायरल फोटो से बेनकाब हो गया है। एक ही ट्रैक पर पीला लोडेड ट्रक व दो प्राइवेट कारें- मौत का जीता जागता सबूत होने के बाद भी मामलें कुछ जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा दबाया जा रहा है। इसके बाद अब खदान क्षेत्र के विस्थापित मजदूरों ने खान सुरक्षा महानिदेशालय को फोटो भेजकर तत्काल जांच की मांग करते हुए हड़ताल करने की तैयारी में जुटा है।
एनसीएल के जयंत खदान में एक ही ट्रैक पर डंपर और प्राइवेट गाड़ियों का फोटो वायरल होने के बाद एनसीएल में हड़कंप मचा है। जयंत खदान सड़क पर मुख्य पीली लोडेड ट्रक (बीच में), दो छोटी कारें (विपरीत दिशा) में दौड़ते नजर आ रहे हैं। खदान की सड़क में ना तो कोई डिवाइडर बनाया गया है और ना ही टर्न आउट दिया गया है। जबकि डीजीएमएस सर्कुलर 9/2008—ट्रक-प्राइवेट के अलग ट्रैक अनिवार्य, डिवाइडर ट्रक टायर जितना ऊंचा (1.5 मीटर+), ऊपर 1 मीटर चौड़ा, नीचे 2.5 मीटर होना जरूरी हैं । सड़क ट्रक+5 मीटर चौड़ी, ग्रेडिएंट 1:16, मोड़ पर ब्रेकिंग विजिबिलिटी—सब गायब है। नाले एक तरफ, प्राइवेट वाहन मैनेजर अनुमति से चल सकता है लेकिन सारे नियम यहां चढ़ा कंपनी तोड़ता नजर आता है। वर्करों का आरोप है कि चड्ढा कंपनी मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। सुरक्षा की बात करने पर वर्करों का ट्रांसफर कर दिया जाता है या फिर नौकरी से ही निकाल दिया जा रहा है।
ट्रक होड़ से जान खतरे में!
जयंत सीएमपीएल खदान के मजदूर गुस्से में हैं। चड्ढा कंपनी ने उन्हें जबरन दुधीचुआ खदान भेजना शुरू कर दिया है। मजदूर चिल्ला रहे, ट्रक हादसों से हमारी जान पर बन आई, अब हड़ताल करेंगे। पिछले 5 साल में कभी ट्रक पलटने तो कभी कारों की टक्कर से तो कभी हेवी मशीन की चपेट में आने से अब तक करीब 20 मौतें हो चुकी है। बावजूद जिसके एनसीएल के बड़े अफसर चुप्पी साधे हैं।
धमकी, मारपीट के बाद अब बबलू मिश्रा की संपत्ति चर्चा में
सूत्र बताते है कि कंपनी के कर्ताधर्ता बबलू मिश्रा पर लोगों को धमकाने, मारपीट करने और बेरोजगार युवकों से पैसे लेकर नौकरी देने जैसे आरोप पहले से ही लगते रहे हैं, लेकिन अब उनकी कथित अकूत संपत्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षेत्र में यह सवाल उठने लगे हैं कि बबलू मिश्रा के पास महंगी कारें, और कथित बेनामी संपत्तियां आखिर कहां से आईं। चौक-चौराहों पर लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि कहीं यह संपत्ति खदान ठेकों और अवैध डीजल कारोबार से की गई काली कमाई का नतीजा तो नहीं है। आरोपों के बीच स्थानीय स्तर पर अब मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
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